गुमला(GUMLA): जिला में बनने वाला बाई पास सड़क का सपना लम्बे समय बाद भी पूरा नही हो सका है. इसे लेकर लोग लगातार सवाल उठा रहे है. कई बार यह मुद्दा राजनीतिक मुद्दा भी बना, लेकिन राजनीतिक दल के लोगों ने इसे केवल चुनावी मुद्दा बनाकर ही छोड़ दिया. इसे लेकर लोग सवाल उठा रहे हैं.
गुमला शहर से दो राष्ट्रीय राजमार्ग 43 और 143 गुजरता है. इसके कारण शहर में जाम की स्तिथि बनी रहती है. इसको लेकर सम्मिलित बिहार के समय से ही गुमला शहर के बाहर से बाईपास सड़क के निर्माण की मांग की जा रही थी. कई बार यह मामला बिहार विधानसभा के साथ संसद में भी उठाया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई. जब झारखंड अलग राज्य बना तो झारखंड के प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी द्वारा इस सड़क का शिलान्यास किया गया. मगर, काम केवल शिलान्यास तक ही सिमट कर रह गया. उसके बाद हर चुनाव में यह मुद्दा छाया रहा, लेकिन काम नही हुआ. जब सूबे में मुख्यमंत्री के रूप में रघुवर दास ने मोर्चा संभाला था तो उन्होंने इसे ना केवल गंभीरता से लिया था बल्कि इसका शिलान्यास कर इसका काम भी शुरू किया था, 12 किमी तक बनने वाली सड़क का निर्माण कार्य छत्तीसगढ़ के ठेकेदार को करोड़ो रूपये में दिया गया था. लेकिन काम की गति क्या है, इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि आज तक काम पूरा नही हुआ है. लोगो ने कहा कि काम शुरू होने पर खुशी थी लेकिन आज तक काम पूरा नही हो सका. इससे लोगो को काफी परेशानी हो रही है.
सरकार की उदासीनता के कारण अटका है काम
गुमला का बाई पास सड़क का अधूरा काम सरकार की उदासीनता के साथ ही पदाधिकारियो में विकास के प्रति उदासीनता को दर्शाता है. लोगो मे इसे लेकर बन रहे आक्रोश को देखते हुए कांग्रेस जेएमएम गठबंधन की सरकार होने के बाद भी कांग्रेस के कई नेता जिसमें रमेश कुमार चीनी, विक्की उरांव, राजनील तिग्गा और रोशन बरवा ने आवाज उठाया है. इसके बाद जिले के दौरे पर आए सूबे के मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने भी इसे गंभीर मामला मानते हुए इसे पूरा करवाने के लिए केंद्र की सरकार से बात करने के साथ ही जल्द काम पूरा करवाने की बात कही है. काम कब तक पूरा होगा? यह कोई नही बता पा रहा है, क्योंकि सड़क निर्माण के बहुत बड़े हिस्सा का काम अभी भी सही रूप से शुरू नही हुआ है. साथ ही पुल का निर्माण भी बाधित है. इससे सड़क के जल्द पूरा पूरा होने पर संशय बना हुआ है. कांग्रेस के वरीय उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने तो इसको लेकर आमरण अनशन पर जाने की भी बात कही है.
यह कोई पहला अवसर नहीं है, जब बाईपास सड़क को लेकर गंभीरता से बात हो रही है. जब इसका काम पूरा हो जाए तभी इन चर्चाओं का कोई मायने समझ मे आएगा. राज्य के मंत्री की गंभीरता से एक बार फिर से उम्मीद तो जगी है लेकिन इस उम्मीद को जमीन पर कितना उतारा जाता है. यह तो आने वाला समय ही बताएगा.
रिपोर्ट: सुशील कुमार सिंह, गुमला
