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संताल जनजातियों के द्वारा मनाया जा रहा है महापर्व सोहराय,तीसरे दिन का क्या होता है महत्व । पढ़ें इस खबर में

संताल जनजातियों के द्वारा मनाया जा रहा है महापर्व सोहराय,तीसरे दिन का क्या होता है महत्व । पढ़ें इस खबर में

गोड्डा (GODDA )पुरे प्रदेश सहित संताल परगना के सभी जिलों में संताल जनजाति के बीच मनाये जाने वाला महापर्व सोहराय की धूम इन दिनों चरम पर है.पारम्परिक परिधान के साथ पारम्परिक वाद्य यंत्रों के साथ गाँव गाँव से टोलियाँ बनाकर नृत्य करने की तस्वीरें सामने आती हैं.युवाओं से लेकर बुजर्गों यहाँ तक की बच्चे भी बढ़ चढ़कर झूमते हुए नजर आते हैं .प्रकृति से लेकर पशुपक्षी के साथ जुड़ा यह पर्व काफी हर्षोल्लास के साथ मनाया भी जाता है.इस पर्व में प्रत्येक दिन की अलग अलग महत्ता और मान्यताएं होती हैं .ऐसी ही महत्व और मान्यता पर्व के तीसरे दिन खुटाव बांधना पर्व का भी होता है .सोहराय के तीसरे दिन पर्व का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है.

गाँव की गलियों में सोहराय गीत और नृत्य का किया जाता है आयोजन 

इस अवसर पर मवेशियों की पूजा अराधना की जाती है.मवेशियों को स्वच्छ जल से स्नान कराकर बैलों के सिंग पर सरसों तेल व सिंदूर लगाया जाता है .प्रत्येक घर के सामने जोग मांझी मसी चौड़े अपने देख रेख में मजबूत खूंटा गाड़ते हैं.मांझी हडाम प्रत्येक खूंटे के पास जाकर बैलों की स्तुति और आराधना करते हैं और खूंटे से बैलों को बाँध दिया जाता है.फिर आराधना करते हुए जमकर पुरुषों द्वारा पयकाहा नाच किया जाता है.इसके बाद गाँव की गलियों में सोहराय गीत और नृत्य का आयोजन किया जाता है.मगर गोड्डा जिले के एक गाँव से ऐसे ही नृत्य की तस्वीरें आई हैं.जहां बैलों के चारों तरफ ढोल मांदर के साथ नाचते हुए नजर आ रहे लोग बीच बीच में बैलों को उकसाने का भी काम कर रहे हैं .बैल बीच बीच में अपना गुस्सा भी व्यक्त करता हुआ नजर आ रहा है .चारों तरफ बच्चों और महिलाओं की भीड़ भी दिख रही है.हम ये नहीं कहते कि नृत्य करना गलत है.मगर जिस तरह से बैल रह रह कर अपना गुस्सा व्यक्त करता हुआ दिख रहा है ऐसे अगर किसी खुट्टे  से बैल ने अपना रस्सी तोड़ लिया और हमलावर हो गया तो फिर क्या होगा.

अजित कुमार सिंह (गोड्डा )

Published at:13 Jan 2022 02:00 PM (IST)
Tags:News
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