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आश्वासन से जगी आस, अब डूब क्षेत्र के वोटर भी बनेंगे लाभों के हकदार

आश्वासन से जगी आस, अब डूब क्षेत्र के वोटर भी बनेंगे लाभों के हकदार

सरायकेला (SARAIKEL) – जिला के राजनगर प्रखंड क्षेत्र के कुजू पंचायत के सारजमडीह गांव के लोगों को सिर्फ राशन कार्ड और वोट का अधिकार ही मिला है. सरकार के जनकल्याणकारी योजनाओं से यहां के ग्रामीण वंचित हैं. जी हां, राजनगर प्रखंड के ईचा-खरकई बांध परियोजना के डूब क्षेत्र की दो पंचायत के लगभग 26 हजार से अधिक की आबादी के लोगों को सिर्फ राशन कार्ड और चुनाव में मताधिकार का लाभ मिला है. ईचा-खरकई बांध बनेगा या नहीं बनेगा इस द्वंद के बीच जद्दोजहद करते इस क्षेत्र के लोग सरकारी विकास योजनाओं से वंचित हैं. हालांकि जब द न्यूजपोस्ट ने इस बाबत डीसी अरवा राजकमल से बात की, तो उन्होंने कहा कि इस मामले में जल्द ही पहल की जाएगी.

यह है मामला

वर्ष 1984 में ईचा-खरकाई बांध परियोजना का शुभारंभ हुआ था. इसमें राजनगर प्रखंड की दो पंचायत हेरमा व कुजू के करीब 21 गांव पूर्णत डूब क्षेत्र घोषित किए गए हैं. डैम निर्माण  की योजना राजनीतिक और अन्य कारणों से विगत 36 वर्षों से लटके रहने के कारण उक्त क्षेत्र के लोगों को सरकार की विकास योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. वहीं सरकारी फाइलों में विस्थापित होने का दर्जा मिलने के बावजूद उनका पुनर्वास भी सही तरीके से नहीं हो पाया है. डैम का निर्माण नहीं होने और पुनर्वास नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी उन्हीं गांव में रह रहे हैं. डूब क्षेत्र घोषित हो जाने के कारण सरकार उक्त गांव में विकास का काम नहीं करा पा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि दोनों पंचायतों के लोगों को सिर्फ वोट देने का अधिकार है पर सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार नहीं है. सरकारी योजनाओं में सिर्फ राशन कार्ड का लाभ मिला है. आधारभूत संरचना के विकास जैसे सड़क, पानी, शौचालय, स्वास्थ्य आदि जैसे योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है. हेरमा और कुजू पंचायतों के कुछ गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र घोषित है. दोनों ही पंचायतों के ग्रामीण कच्ची जर्जर सड़क से आवागमन करने को विवश है. पानी के लिए वर्षों पहले लगे चापाकल हैं जो अब खराब हो गए हैं. लेकिन उनकी मरम्मत भी नहीं हो रही है. गांव में एक भी तालाब नहीं है. लोगों को 1 किलोमीटर दूर स्थित खरकई नदी में जाकर नहाना पड़ता हैं. सारजमडीह से प्रखंड कार्यालय की दूरी लगभग 25 किलोमीटर और जिला कार्यालय की दूरी 50 किलोमीटर है.सड़क जर्जर होने के कारण गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ अन्य लोगों को भी आने जाने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ता है.

एक चापानल के भरोसे 240 की आबादी

सारजमडीह के ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक आने के लिए देश आजादी के बाद अभी तक सड़क नहीं बनी है. गांव में बना चबूतरा भी जर्जर हो चुका है. लोगों को उज्जवला योजना व अन्य योजना का भी लाभ नहीं मिला हैं. शौचालय नहीं बनने के कारण महिलाओं को शौच के लिए 1 किलोमीटर दूर नदी जाना पड़ता है. गांव में एक भी पक्का मकान नहीं है. सभी लोग पुआल व खपरा के घर में रहते हैं. डूब क्षेत्र घोषित होने के कारण ग्रामीण को पीएम आवास व मनरेगा कार्य से भी लोग वंचित है.

 डैम का काम अधूरा

वर्ष 1984 में मात्र 129 करोड़ रुपए की राशि से प्रस्तावित ईचा-खरकई डैम  की लागत वर्ष 2020 में बढ़कर 6000 करोड़ पहुंच चुकी है. लेकिन डैम का काम अभी तक शुरू नहीं हो पाया न ही उसके डूब क्षेत्र के लोगों को पुनर्वास किया गया है.

 पलायन को हैं मजबूर

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित व रोजगार नहीं मिलने के कारण लोग दूसरे राज्य बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई, आदि शहरों में कार्य करने चले जाते है. सरकार ने डूब क्षेत्र घोषित कर हमारे साथ अन्याय किया है. सरकार की किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ वे नहीं ले पा रहे हैं. गांव  के कई युवक  डिप्लोमा,आई.टी.आई किए हैं परंतु चालीयामा में स्थित रुंगटा माइन्स में उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा है. कंपनी में बाहर के व्यक्ति को ही कार्य में लगाया जा रहा है. जिससे गांव के युवक रोजगार से वंचित व दूसरे राज्य पलायन होने को मजबूर हो रहे हैं. ये गांव आते हैं  ईचा-खरकई बांध के डूब क्षेत्र में ईचा,सारजमडीह,बंदोंडीह, कुमड़ी,रेगाड़बेड़ा,देहरीडीह,बालीडीह,मझगाँव,नीमडीह, महुलडीह,चंदनखीरी,गुलीया, हेरमा,यदुडीह,हाथीसेरेग, धोलाडीह,

ग्रामीण की मांग

सारजमडीह गांव के लोग दशकों से विकास कार्य वंचित है. उनका सरकार से अनुरोध है कि उनके गांव में सड़क, पानी एवं अन्य लाभकारी योजना का लाभ दिया जाय. वही लोगों ने अब आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि अब उन्हें विकास नहीं मिला तो वह वोट भी नहीं देंगे. आगामी पंचायत चुनाव में वह इसको लेकर अपने हक की आवाज बुलंद करेंगे.

ग्रामीणों का कहना है

ग्रामीण बबलु बोड़ा का कहना है कि 36 वर्षों से ईचा-खरकई बांध परियोजना 21 गांव के ग्रामीणों के लिए गले की हड्डी बन गई है. न डैम पूरा हो रहा है ओर न हीं मुआवजा और पुनर्वास का लाभ मिल रहा है. वहीं साधु पाड़िया का कहना है कि डूब क्षेत्र होने का दंश दो पंचायत के लोगों को भुगतना पड़ रहा है. विकास कार्य यहां नहीं चलाए जाने से ग्रामीण पानी, सड़क समेत अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. गांव के ग्रामीण केरा लागुरी का कहना है कि कोइ वर्षों से आधारभूत संरचना का विकास नहीं हो रहा है. नतीजा लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. जो आने वाला पंचायत चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनेगा.

 डीसी का आश्वासन, जल्द होगी पहल


डूब क्षेत्र के लोगों से जुड़ी समस्या के बारे में पूछे जाने पर डीसी अरवा राजकमल ने बताया कि यह सही है कि डूब क्षेत्र होने के कारण आधारभूत संरचनाओं व अन्य विकास योजनाओं को यहां लेने में नीतिगत दिक्कत हो रही है. लेकिन अब इस क्षेत्र के लोगों की समस्या दूर करने हेतु जल्द पहल होगी. उन्होंने कहा कि झारखंड के मुख्यमंत्री द्वारा यह निर्देश दिया गया है कि सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के तहत आई समस्याओं को जनहित के दृष्टिकोण को प्राथमिकता देते हुए समाधान किया जाए. ऐसे में सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में डूब क्षेत्र से आए पीएम आवास, अंबेडकर आवास या अन्य योजनाओं हेतु जो आवेदन आए हैं उसे जल्द संकलन किया जाएगा. फिर जिला प्रशासन इन क्षेत्रों में लोगों की आवश्यकता से जुड़ी योजनाओं को लेकर सरकार के पास अनुशंसा करेगी. तब सरकार के नीतिगत निर्णय के आधार पर यहां लोगों की समस्या दूर करने वह विभिन्न योजनाओं को लागू करने की पहल होगी. डीसी के इस आश्वासन के बाद अब डूब क्षेत्र के लोगों को आशा की नई किरण दिखाई पड़ी है. उन्हें उम्मीद है कि अन्य क्षेत्रों की भांति डूब क्षेत्र के लोगों को भी विभिन्न विकास योजनाओं का लाभ मिलेगा.

रिपोर्ट : विकास कुमार, सरायकेला

Published at:28 Dec 2021 12:12 PM (IST)
Tags:News
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