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जानिए धनबाद में कैसे हुई थी 375 कोल श्रमिकों की जिंदा जलसमाधि...

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 7:32:43 PM

धनबाद(DHANBAD)- आज से 46 साल पहले 27 दिसंबर, 1975 को धनबादवासी कभी नहीं भूल सकते हैं. इस ब्लैकडे के हादसे को सुनकर रूह कांप जाती है. दरअसल इसी दिन झारखंड के धनबाद में सेल की चासनाला कोलियरी की 500 फिट गहरे खदान  में ऐसी घटना हुई, जिसने पूरी दुनिया का दिल दहला दिया था. प्रथम पाली में खदान में पानी भर गया था. खदान में काम पर गए 375 खनिकों की जिंदा जल समाधि हो गई थी. देश के लिए कोयला खनन करते हुए इन कामगारों ने अपना जीवन बलिदान कर दिया.  इस हादसे ने कई मां की गोद सूनी कर दी, कई सुहागिनों का सिंदूर मिट गया. अनेक बहनों से उनका भाई छिन गया. तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया. आज  सोमवार को बलिदानियों की 46 वीं बरसी पर चासनाला में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. जहां विधायक राज सिन्हा ने शहीद वेदी पर पुष्प अर्पण कर इनकी शहादत को नमन किया. सर्वधर्म सभा हुई. सेल के अधिकारी, बलिदानियों के स्वजन, खदान के कामगार, श्रमिक यूनियन के लोगों ने भी श्रद्धांजलि दी.

रूस और पौलेंड से ली गई थी मदद

कई साल तक चली हादसे की जांच में पता चला कि अधिकारियों की लापरवाही से दुर्घटना हुई थी. खदान में रिसने वाले पानी को जमा करने को बड़ा बांध बनाया गया था. हिदायत दी गई थी की बांध के 60 मीटर की परिधि में ब्लास्टिंग नहीं हो, लेकिन अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज कर हैवी ब्लास्टिंग कर दी. इस लापरवाही की वजह से 375 खनिकों की जल समाधि हो गई. दुर्घटना के बाद कई महीनों तक खदान से पानी निकाला गया. इसमें पोलैंड, रूस के वैज्ञानिकों से भी मदद ली गई थी.

चासनाला खदान हादसे पर बनी थी फिल्म काला पत्थर

चासनाला खदान दुर्घटना को एशिया के सबसे बड़े माइंस हादसों में माना जाता है. घटना के चार साल बाद 1979 में बॉलीवुड के मशहूर फ़िल्म निर्देशक यश चोपड़ा ने काला पत्थर फिल्म बनाई थी.  इसमें अमिताभ बच्चन और शत्रुघ्न सिन्हा,शशि कपूर ,नीतू सिंह राखी गुलजार ,प्रेम चोपड़ा ,पूनम ढिल्लों ,मदन पूरी प्रवीण बाबी जैसे नामचीन कलाकारों ने अभिनय किया था. अमिताभ ने कोयला मजदूर की सशक्त अभिनय से  पहली बार कोयला मजदूरों के दर्द को रुपहले पर्दे पर लाया थी. यह फिल्म काफी सराही गई.

कई माह तक हुआ था शवों का अंतिम संस्कार

चासनाला में हुई खदान दुर्घटना के बाद महीनों तक पानी में रहने के कारण शव सड़ चुके थे. खदान से शव निकालने के बाद मृतक की पहचान बैटरी वाली बत्ती, टोपी, कपड़े आदि से की गई थी. कई माह तक दामोदर नदी के किनारे शवों का अंतिम संस्कार किया जाता रहा था. क्योंकि ये शव महीनों बाद मिले थे.

न्यायाधीश सएन सिन्हा ने की थी दुर्घटना की जांच

दुर्घटना की जांच न्यायाधीश एसएन सिन्हा को सौंपी गई थी. जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने का मामला सामने आया था. इस रिपोर्ट को श्रम विभाग को सौंप दिया गया. तत्कालीन परियोजना पदाधिकारी, प्रबंधक, सेफ्टी अधिकारी और अन्य को दुर्घटना के लिए दोषी मानकर बर्खास्त कर दिया गया था.

रिपोर्ट; अभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो हेड, धनबाद

Tags:News

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