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जल, जंगल, जमीन की सरकार, सड़क पर आदिवासी

जल, जंगल, जमीन की सरकार, सड़क पर आदिवासी

रांची (RANCHI) 23 दिसम्बर 2021 को कई आदिवासी संगठनों ने सयुंक्त रूप से उपायुक्त कार्यालय रांची के समक्ष एकदिवसीय महाधरना दिया. धरना आदिवासी जमीन के दखल देहनी आदेश होने के बाद भी वर्षों तक उस जमीन में दखल नहीं दिलाए जाने और  SAR कोर्ट द्वारा आदिवासी जमीन को गलत ढंग से कम्पन्सेशन कर हजारों एकड़ जमीन को  गैर आदिवासियों को दे दिये जाने के खिलाफ दिया गया.

ये हुए शामिल

विभिन्न आदिवासी संगठनों राजी पड़हा झारखण्ड, आदिवासी महासभा, आदिवासी अधिकार मंच, केंद्रीय सरना समिति, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा, अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद, झारखण्ड क्षेत्रीय पड़हा समिति हटिया, आदिवासी हातु महासभा खूँटी आदि धरने में मौजूद रहे. इन सभी संगठनों के द्वारा उपायुक्त राँची को विभिन्न मांगों से सम्बंधित एक माँग पत्र सौंपा गया. 

ये है मांग

माँग रखी गई की आदिवासी जमीन की 5000 से अधिक दखल देहनी के लंबित मामलों पर यथाशीघ्र दखल दिलाया जाय, SAR कोर्ट द्वारा जितने भी आदिवासी जमीन का गलत ढंग से कम्पन्सेशन कर गैर आदिवासियों को आदिवासी  जमीन दिया गया है. उन सभी कम्पन्सेशन की जाँच कर आदिवासियों को जमीन वापस किया जाय. SAR कोर्ट से कम्पन्सेशन करना बंद किया जाय तथा SAR कोर्ट को सशक्त बनाया जाय. इस महा धरना कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और भूमि माफियाओ के मिलीभगत से CNT Act का उल्लंघन कर आदिवासियों के हजारों एकड़ जमीन को लूट लिया गया है. आदिवासियों के धर्मिक और सामाजिक जमीन पर भी अवैध रूप से कब्ज़ा कर लिया गया है. यहां तक की गैरमजरुआ भुईंहरी पहनई जमीन तक को कम्पन्सेशन कर गैर आदिवासियों के नाम से जमाबंदी कर दी गई है. आदिवासियों के हजारों एकड़ खतियानी रैयती जमीन पर गैर आदिवासी लोग  गैर क़ानूनी ढंग से फर्जी कागजात बना कर कब्ज़ा जमाये हुए है और आदिवासी लोग अपने पुस्तैनी जमीन से वंचित हो गए है,वक्ताओं ने कहा के अविलंब इस मामलें पर उचित कार्रवाई कर आदिवासियों को उनकी जमीन वापस किया जाय और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई किया जाय साथ ही आदिवासियों के जमीन से खिलवाड़ करना बंद हो.  जितने भी दखल देहनी के मामलें लंबित हैं.उस जमीन पर जल्दी दखल दिया जाय नहीं तो  आदिवासी समाज खुद ही अपने जमीन पर दखल लेने का काम करेगी.  पूरे झारखण्ड में आंदोलन हेतु उलगुलान का बिंगुल फुंकेगी.

ये हुए शरीक

इस महाधरना को मुख्य रूप से आदिवासी महासभा के संयोजक सह पूर्व मंत्री देवकुमार धान, आदिवासी अधिकार मंच के अध्यक्ष सुभाष मुंडा,आदिवासी महासभा के अध्यक्ष नारायण उरांव,अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के राँची जिला अध्यक्ष कुंदरसी मुंडा, झारखण्ड क्षेत्रीय पड़हा समिति हटिया के अध्यक्ष अजित उरांव,आदिवासी महासभा के महासचिव बुधवा उरांव,अमित मुंडा, प्रकाश टोप्पो, महेश मुंडा, मधुवा कच्छप, प्रफुल लिंडा, जयंत कच्छप, भुनेश्वर टाना भगत ने सम्बोधित किया इस मौके पर मुख्य रूप से बुधराम उरांव, अगस्तुस उरांव, विनोद भगत, महतो भगत, राजेन्दर उरांव, बांदे उरांव, सोमा उरांव,रेखा कच्छप, पनचोला उरांव, अनीता उरांव, बसंती उरांव समेत सैकड़ो लोग उपस्थित थे. 

रिपोर्ट : रंजना कुमारी (रांची ब्यूरो)

Published at:23 Dec 2021 05:43 PM (IST)
Tags:News
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