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डीवीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम की लड़ाई में धनबाद बेहाल, 10-10 घंटे बत्ती गुल

डीवीसी और झारखंड बिजली वितरण निगम की लड़ाई में धनबाद बेहाल, 10-10 घंटे बत्ती गुल

धनबाद (DHANBAD) : झारखंड बिजली वितरण निगम पर डीवीसी बकाया वसूली के लिए दबाव बनाए हुए है तो इसका खामियाजा भुगत रहे हैं धनबाद के लोग. हाल के दिनों में बिजली कटौती की रफ़्तार बढ़ गई है. कई इलाकों में तो दस-दस घंटे बिजली नहीं रह रही है. इधर डीवीसी ने झारखण्ड बिजली वितरण निगम को फिर एक पत्र लिख कर कहा है कि अप्रैल से नवंबर 2021 के बीच हरेक माह 549 करोड़ का बकाया हो गया है, जबकि 1624 करोड़ का बकाया पहले से ही है. अब यह राशि बढ़कर 2173 करोड़ की हो गई है जबकि इस पर सूद नहीं जोड़ा गया है.  

डीवीसी और बिजली वितरण निगम के विवाद में पीस रहे उपभोक्ता

डीवीसी अपना बकाया वसूलने के लिए सारे हथकंडे अपना रहा है तो दूसरी ओर वितरण निगम भी उपभोक्ताओं की गर्दन मरोड़कर पैसा वसूलने में लगा हुआ है. लेकिन उपभोक्ताओं को जीरो कट बिजली कब से मिलेगी, मिलेगी भी या नहीं, यह एक बड़ा सवाल है. कोयलांचल में बिजली संकट बना हुआ है और डीवीसी ने जब से सप्लाई में कटौती की है, तब से स्थिति और भी खराब हुई है. इधर मेंटेनेंस के नाम पर तो कभी ब्रेकडाउन के कारण उपभोक्ताओं को बिजली मिलती नहीं है. उद्योग धंधे जो चल भी रहे हैं, उनकी हालत इतनी अच्छी नहीं है कि जेनरेटर चलाकर वह उद्योग व्यवसाय को चला सके. ऊपर से लगातार बिजली महंगी होती जा रही है. 

वैकल्पिक व्यवस्था बन गई है मजबूरी

लोगों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत घरों में इनवर्टर, जेनरेटर की व्यवस्था करना अब मजबूरी हो गई है. बिजली विभाग उपभोक्ताओं से पैसे की वसूली तो करता है लेकिन उनको सुविधाएं नहीं देता. किसी को भी यह जानकर आश्चर्य होगा कि धनबाद बिजली वितरण निगम डिवीजन में एक भी लाइनमैन बिजली विभाग के पेरोल पर नहीं है. सारी व्यवस्थाएं मैनडेज कर्मियों के भरोसे चल रही है. अगर आपकी लाइन खराब हो गई तो पहले तो जी हुज़ूरी करिए और अगर यदि कोई बनाने के लिए आ गया तो आप अपनी किस्मत समझ लीजिये. बनाने के बाद उनका डिमांड भी पूरा करना होता है, वे साफ कहते हैं कि अगर आप कुछ दीजिएगा नहीं तो हम लोगों का पेट कैसे चलेगा. 

तारों का मकड़जाल तो जान ले रहा है

यह तो हुई एक बात, दूसरी तरफ बिजली के तारों का जो मकड़जाल है, वह जान लेने लगा है. अभी हाल ही में झरिया में दो लोगों की मौत हो गई. इसके कुछ दिन पहले बैंक मोड में तार गिरने से मां-बेटी और एक ठेले वाला घायल हो गया था. लोगों को सुरक्षित और जीरो कट बिजली देना बिजली वितरण निगम की जिम्मेवारी है लेकिन इस जिम्मेवारी निभाने से निगम कोसों दूर है. यह बात भी सही है कि लाइन लॉस के नाम पर बहुत बिजली बर्बाद होती है, बिजली चोरी भी होती होगी, लेकिन लाइन लॉस जो होता है, वह सिस्टम के अपडेट नहीं रहने के कारण होता है. बिजली विभाग इस पर अगर अपना ध्यान केंद्रित करें तो निगम को भी राहत मिलेगी और उपभोक्ताओं के बोझ में भी कमी आएंगी.

रिपोर्ट: अभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो हेड (धनबाद)

Published at:18 Dec 2021 01:35 PM (IST)
Tags:News
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