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टाटा के खिलाफ गोलबंद झामुमो और आदिवासी संगठन, 13 दिसंबर को गेट जाम करेगा माझी परगना महाल

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 2:39:25 AM

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) - ज्यादा दिन नहीं हुए जब बीते 17नवंबर को झामुमो ने रोज़गार, अप्रेंटिस में बाहरी लोगों की भर्ती समेत स्थानीय लोगों के रोज़गार के मुद्दे को लेकर टाटा स्टील और टाटा ग्रुप की अन्य कंपनियों के गेट को दिन भर जाम कर दिया था. उस दौरान विभिन्न शिफ्टों में कार्यरत कर्मचारी कंपनी में ही बंधक जैसा बने रहे. हालात सामान्य करने के लिए व्यापक संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती करनी पड़ी थी. तब ये सवाल विपक्ष ने उठाया था कि अपनी ही सरकार के शासनकाल में क्यों झामुमो आंदोलन कर रही है? अब आदिवासियों के परंपरागत संगठन माझी परगना महाल ने 13दिसंबर को टाटा स्टील का मेन गेट जाम करने की घोषणा की है. संगठन टाटा से पिछले 100 सालों का हिसाब मांगेगा कि इन सालों में कितने आदिवासियों को रोज़गार दिए गए? गेट जाम करके संगठन एक प्रदर्शन करेगा जिसमें आदिवासियों और मूलवासियों के अधिकारों की मांग की जाएगी. इसके माध्यम से संगठन टाटा से ये पूछेगा कि लोगों ने जिस सुनहरे भविष्य की कल्पना करके अपनी ज़मीन टाटा को सौंपी थी उन सपनों का क्या हुआ? संगठन टाटा से पूछेगा कि कार्यक्रमों के नाम पर करोड़ों खर्च करनेवाली टाटा ने आदिवासियों के लिए क्या किया? आज भी अप्रेंटिस में बाहरियों की बहाली होती है, आदिवासी को क्या मिलता है?

टाटा के खिलाफ गोलबंद होकर जारी आंदोलन

माझी परगना महाल को परोक्ष रूप से झामुमो का समर्थन मिलेगा. एक तरफ झामुमो और विभिन्न आदिवासी संगठन अचानक टाटा के खिलाफ गोलबंद होकर आंदोलन कर रहे. वहीं कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ इंटक नेता सह झारखंड इंटक के अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय ने सीएम हेमंत सोरेन को इस संबंध में पत्र लिखकर आगाह किया है, कि इसे रोका न गया तो झारखंड की छवि धूमिल होगी. राकेश्वर पांडेय ने पत्र के माध्यम से सरकार को ध्यान दिलाया है कि जमशेदपुर में जिस तरह झामुमो ने गेट जामकर भयादोहन किया और दिन भर कर्मचारी कंपनी परिसर में फंसे रहे वह चिंता का विषय है, क्योंकि इस घटना ने न सिर्फ झारखंड की छवि धूमिल की है बल्कि सरकार के ही उस प्रयास को धक्का पहुंचा है. जिसके तहत पिछले दिनों दिल्ली में इन्वेस्टर्स मीट में झारखंड में निवेश करने के लिए न्योता दिया जा रहा था. राकेश्वर पांडेय ने सीएम से ऐसे आंदोलनों पर विराम लगाने की अपील की है.

सरकार के लिए विपक्ष के तीखे सवाल

उधर विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए पूछा है कि अपनी ही सरकार है तो झामुमो क्यों टाटा का गेट जाम कर रही है. मुद्दों को लेकर सीएम के माध्यम से टाटा के पदाधिकारियों के साथ वार्ता करके क्यों नहीं हल किया जा रहा है? प्रदेश भाजपा प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने तो इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष रखते हुए आरोप लगाया है कि आंदोलन के पीछे झामुमो-कांग्रेस के नेता निजी हित के सौदे कर रहे हैं जिसकी जांच होनी चाहिए. कुणाल ने कहा कि टाटा के खिलाफ इस माहौल से पूरे देश में नकारात्मक संदेश गया है. ये सीधे सीधे असली जनमुद्दों से ध्यान भटकाकर अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति करना है जो खेल झारखंड खासकर जमशेदपुर मे खेला जा रहा है. बता दें कि पिछले दिनों ही कांग्रेस नेता सह स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भी टाटा के खिलाफ बयानबाज़ी करते हुए बिष्टुपुर में जे एन टाटा की मूर्ति को धोकर मुंह पर काला कपड़ा बांधकर कुछ देर मौन व्रत धारण कर लिया था. आरोप लगाया था कि टाटा के वर्तमान अधिकारी भगवान बिरसा मुंडा की मूर्ति पर फूल चढ़ाकर श्रद्धांजलि नहीं दे रहे हैं.

रिपोर्ट : अन्नी अमृता, ब्यूरो हेड, जमशेदपुर

Tags:News

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