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हे राजेंद्र बाबू ! इन्हें माफ करना, इनसे भूल हो गई.....

हे राजेंद्र बाबू ! इन्हें माफ करना, इनसे भूल हो गई.....

सरायकेला (SARAIKELA) : देश के प्रथम राष्ट्रपति देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद की आज जयंती है. भारतीय लोकतंत्र के शिल्पकार डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती के मौके पर देश के कई जगह पर कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है और उनकी कृतियों को याद कर उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली जा रही है.  लेकिन इस महत्वपूर्ण दिन और इस खास मौके की अहमियत से बेफिक्र सरायकेला जिला अपनी दिनचर्या निभाने में ही मशगूल हैं. जहां एक तरफ जिले में जोर-शोर से हर पंचायत में आपके अधिकार आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन कर प्रशासन लोगों की समस्या दूर कर हमदर्दी जता रही है. वहीं नेता आने वाले पंचायत चुनाव में अपनी जीत का ताना बाना बुनने और वोट बैंक को साधने में जुटे हैं. समाज के बुद्धिजीवी वर्ग भी अलग-अलग तरह की इंगेजमेंट है. लोकतंत्र के सभी स्तंभ और समाज के विभिन्न वर्गों को अब तक डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती की याद शायद अब तक नहीं आई है.

राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा का है बुरा हाल

सरायकेला नगर पंचायत द्वारा गुदरी बाजार में लगाए गए डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा को देख तो यही लगता है. दोपहर का समय गुजर चुका है और डॉ राजेंद्र प्रसाद की जयंती के मौके पर उनकी प्रतिमा अभी भी श्रद्धा के दो फूलों के लिए तरस रही है. मूर्ति पर के गले में फूलों की माला और प्रतिमा स्थल पर कुछ बिखरे फूल तो हैं, लेकिन वह भी पुराने और मुरझाए हुए हैं. शायद किसी कार्यक्रम के दौरान कुछ महीने पूर्व इस पर चढ़ाए गए होंगे. इस बदतर हालात की तस्वीर यहीं तक सीमित नहीं है बल्कि बदहाली का यह आलम है कि डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रतिमा स्थल के अगल-बगल न सिर्फ कचरे का ढेर है बल्कि प्रतिमा के ठीक पीछे शराब की बोतल व गिलास भी बिखरी पड़ी है. मानो ऐसा लगता है शराबियों का इस प्रतिमा स्थल के पीछे जमावड़ा लगता है और रोज यहां जाम छलकते हैं.

नई पीढ़ी को दें मार्गदर्शन

इस बदहाली को देखकर आंख में आंसू ही आ रहे हैं कि हम और हमारी भावना कहां से कहां पहुंच चुकी है. आज हम इसी तरह अपने महापुरुषों को भूलाएंगे तो अपने गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को कैसे बचा पाएंगे और हम अपनी नई पीढ़ी को मार्गदर्शन व प्रेरणा के रूप में क्या दे पाएंगे. यह समाज के हर एक वर्ग के लिए सोचने का विषय है. अगर हम देश के शिल्पकारो को यूं ही भूलते जाएंगे तो देश के सुंदर भविष्य का निर्माण कैसे कर पाएंगे. ऐसे में समाज के सभी वर्ग से न्यूज़ पोस्ट की अपील है कि अपने देश की सभ्यता संस्कृति और विरासत से जुड़ी अनमोल धरोहर और प्रेरणा पूज्य महापुरुषों को हमें याद रखना चाहिए और नई पीढ़ी को भी याद रखने हेतु प्रेरित करना चाहिए ताकि हमारा गौरवशाली इतिहास और समृद्ध हो.

रिपोर्ट: विकास कुमार, सरायकेला

Published at:03 Dec 2021 04:51 PM (IST)
Tags:News
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