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कोरोना के बाद पिता नहीं जमा कर पाए प्राईवेट स्कूल  की फीस, हताश बेटी ने दे दी जान..जिम्मेदार कौन ?

BY -
Anni Amrita  Jamshedpur
Anni Amrita Jamshedpur
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 5:32:54 AM

पिता नहीं जमा कर पाए प्राईवेट स्कूल  की फीस, स्कूल ने काट दिया नाम,पिता ने सरकारी स्कूल में नाम लिखवाया तो किशोरी ने दे दी जान, कौन ज़िम्मेदार?

कोरोना के नए वेरिएंट ओमीक्रोन के संभावित खतरों में जीती दुनिया कोरोना के पिछले वेरीएंट से उपजे हालातों से अब तक नहीं उबर पाई है।लोग तिल तिल मर रहे हैं।किसी की नौकरी छूट रही है तो कोई बच्चों के स्कूल की फीस नहीं भर पा रहा है?

सरकार ऐसे मामलों को दरकिनार कर रही है और समाज प्रतिभाएं खो रहा है।आज लौहनगरी में जो कुछ हुआ वह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर गरीबों और आम आदमी को कौन मदद करेगा?कैसे जीवन चलेगा जब लोग और बच्चे इतने मायूस हो जाएंगे?विपरीत हालातों में सरकार कम से कम हाथ तो रखे इससे भी हिम्मत मिलती है लेकिन अफसोस कि ऐसा दिखता नहीं।

 जमशेदपुर  के बारीडीह बस्ती के रहनेवाले प्रदीप श्रीवास्तव की 15वर्षीय बेटी भूमि श्रीवास्तव  ने प्राईवेट स्कूल से नाम काटे जाने के बाद मजबूरन  पिता द्वारा सरकारी स्कूल में नाम लिखवाने पर दुखी होकर फांसी लगाकर जान दे दी।दरअसल आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे और गार्ड का काम करनेवाले प्रदीप बारीडीह हाई स्कूल में पढ़ रही अपनी बेटी की 24हज़ार रुपये की फीस नहीं जमा कर पाए थे।फलस्वरूप स्कूल प्रबंध ने नाम काट दिया।उसके बाद मजबूरीवश पिता ने सरकारी स्कूल हिंदुस्तान मित्र मंडल में  नाम लिखवा दिया जिसके बाद से बेटी दुखी रहती थी और उसने ये कदम उठाया।एमजीएम में मौजूद बच्ची के  पिता ने दुखी होकर बताया कि साल बर्बाद न हो इसलिए सरकारी में नाम लिखवा दिया और कोशिश थी कि हालात सुधरते फीस किसी तरह जमा करते।लेकिन उसी बीच ये घटना हो ग ई।
इस घटना से पूरे इलाके के लोग दुखी हैं।कई लोगों ने कहा कि बच्चों को हार  नहीं माननी  चाहिए और सरकारी स्कूल को कम नहीं समझना चाहिए।वहीं कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि सालों से एक खास स्तर में पढ़ने के बाद अचानक बच्चे के साथ ऐसा हो तो विचलित होना स्वाभाविक है लेकिन ऐसे माहौल में काऊंसलिंग की जरूरत रहती है जिस ओर सरकार और समाज दोनों उदासीन है।वहीं कुछ लोगों ने द न्यूज़ पोस्ट से बात करते हुए सवाल उठाया है कि जिस तरह लगातार स्कूल में फीस जमा न कर पाने की वजह से नाम काटने की घठनाएं हो रही हैं आखिर उस पर कौन लगाम लगाएगा।न काऊंसलिंग की व्यवस्था न आर्थिक मदद आखिर जनता को किससे भरोसे छोड़ा गया है?दूसरी तरफ सरकार मंत्री और नेताओं के बंगले बनाने को लेकर काफी गंभीर है।यहां आम जनता पिस रही है रो रही है उसको लेकर कोई पहल नहीं।निजी स्कूल भी बुरे दौर से गुजर रहे और वे अभिभावकों से वसूल रहे, कोई लगाम कसने वाला नहीं।
द न्यूज़ पोस्ट की अपील है कि किसी भी परिस्थिति में लोग, बच्चे या युवा  ऐसे कदम न उठाएं।

 

Tags:News

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