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दाने-दाने का मोहताज शहीद का परिवार, धरे रह गए हेमंत सरकार के वादे

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 10:23:27 PM

बोकारो (BOKARO) जिले के घरवाटाडं पंचायत निवासी शहीद विनोद यादव ने लगभग तीन साल तक सीआरपीएफ 74वीं बटालियन में अपनी ड्यूटी की. बता दें कि ड्यूटी के दौरान 4 अप्रेल 2014 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में वह वीरगति को प्राप्त हो गए. उनके शहीद होने के दो दिनों बाद झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहीद विनोद यादव के घर पहुंचकर उनके परिवार को सांत्वना देते हुए हर सम्भव मदद करने का आश्वासन दिया था. उस वक्त मुख्यमंत्री ने सरकार के तरफ से शहीद पर आश्रितों को राज्य में नियोजन के साथ साथ एक पेट्रोल पंप दिलाने और आर्थिक सहायता देने की बात कही थी, लेकिन मुख्यमंत्री का आश्वासन आज तक धरा का धरा ही रह गया. इधर इन दिनों शहीद विनोद यादव के परिवार की जिंदगी काफी कठिनाइयों में कट रही है.

पेट्रोल पंप और आर्थिक सहायता राशि देने की बात नहीं हुई पूरी

इस संबंध में शहीद की पत्नी अंजू देवी ने नम आखों से बताया उनके पति की वीरगति प्राप्त होने के बाद राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और सुबोध कांत सहाय उनके घर पर आए थे. उन्होंने वादा किया था कि नियोजन, एक पेट्रोल पंप और आर्थिक सहायता राशि देने की बात कही थी. मगर अभी तक परिवार वालों को कुछ नहीं मिला है. सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते काटते थक चुकी है, मगर बाबुओं के कान में जूं तक नहीं रेंगती. पता नही सरकार उनकी सुध कब तक लेगी.

नि:शुल्क शिक्षा की मदद

गोमिया विधायक डॉ लंबोदर महतो ने उनके पारिवारिक स्थिति को देखते हुए शहीद के बच्चों को तेनुघाट डीएवी में नि:शुल्क शिक्षा दिलाने में मदद की. सरकारी सहायता के लिए उन्होंने शहीद के परिवारों को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास भी गए. उनकी मांगों के लिए विधानसभा में भूख हड़ताल भी किया, मगर कहीं कुछ सुनवाई नहीं हो सकी है. वहीं शहीद विनोद यादव की मां ने बताया कि बेटे के शहीद होने के बाद उनके पति विशेश्वर यादव की भी मृत्यु हो गई. चार बेटे और दो बेटियां हैं. शहीद हो चुका बेटा ही घर चलाता था. उसके चले जाने के बाद परिवार काफी मुसीबतों का सामना कर रहा है. वे लोग सरकारी बाबुओं के दफ्तरों के चक्कर लगाते लगाते अब थक चुकी हैं. फिलहाल खेती-बाड़ी कर अपना जीवन यापन कर रहे हैं.

रिपोर्ट : संजय कुमार, बोकारो (गोमिया )

Tags:News

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