✕
  • News Update
  • Trending
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Local News
  • Special Stories
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • covid -19
  • LS Election 2024
  • TNP Explainer
  • International
  • Blogs
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. News Update

खौफ के साए में जहां होती थी अफीम की खेती, आज खिल रहे गेंदा के फूल

BY -
Ranchi Bureau
Ranchi Bureau
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 16, 2026, 6:09:45 PM

चतरा (CHATRA) : अफीम की खेती पर नकेल कसने का प्रयास अब रंग लाने लगा है. पुलिस के पुलिस, प्रशासन एवं वन विभाग के संयुक्त अभियान से अफीम की खेती करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है. आधुनिक ड्रोन कैमरे के इस्तेमाल से अफीम की खेती काफी हद तक रुकी है. पुलिस, प्रशासन एवं वन विभाग की जागरूकता का परिणाम है कि गांव के लोग अब अफीम की खेती का काम छोड़ करके गेंदा के फूल सहित अन्य नकदी फसल की खेती करने में लग गए हैं. इस काम को लेकर किसानों में काफी उत्साह भी है और उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ा है.

यहां 1000 एकड़ में होती थी अफीम की खेती

झारखंड चतरा का एक ऐसा जिला है जो भौगोलिक रूप से काफी दुरूह क्षेत्र में फैला हुआ है. जंगल एवं पहाड़ों की तलहटीओं में पिछले कुछ वर्षों से अफीम की खेती बड़े पैमाने पर हो रही थी. इन खेतों तक पुलिस के लिए पहुंचना काफी मुश्किल था. लेकिन इस वर्ष अफीम की खेती को पर नकेल कसने के लिए पुलिस वन विभाग एवं प्रशासन की संयुक्त अभियान ने अफीम खेती करने वालों की कमर तोड़ दी है. पुलिस की टीम जंगलों में पहुंचकर ड्रोन कैमरे की मदद से अफीम की खेती करने वालों की पर कार्रवाई कर रही है. पुलिस को जिन क्षेत्रों में अफीम की खेती के बारे में सूचना मिलती है, पुलिस की टीम अत्याधुनिक तकनीक से लैस ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल कर अफीम की खेतों तक पहुंचते हैं. अफीम की लहलहा रही फसल को भी पूरी तरह नष्ट कर दे रहे हैं. बताया जाता है कि चतरा जिला में तकरीबन 1000 एकड़ में अफीम की खेती कई वर्षों से हो रही थी. लेकिन पुलिस के कारगर सख्त रवैया के कारण अफीम की खेती पर अंकुश लग रहा है.

असर जागरुकता अभियान का

दूसरी ओर ग्रामीणों पर भी जागरूकता अभियान का काफी असर पड़ा है. पिछले कुछ महीनों से पुलिस, वन विभाग एवं प्रशासन की टीम के द्वारा गांव-गांव में जाकर जागरूकता अभियान चलाया गया. पुलिस, प्रशासन एवं वन विभाग के द्वारा सभी पंचायत सचिवालय एवं गांव गांव में पोस्टर अभियान भी चलाया गया और यह बताया गया कि अफीम की खेती से न सिर्फ जमीन की उर्वरा शक्ति खत्म होती है बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी प्रभावित होती है. इसी का परिणाम है कि अब लोग अफीम की खेती छोड़कर गेंदा फूल एवं अन्य नगदी फसलों की खेती में लगे हैं. गिधौर प्रखंड के जपुआ गांव के किसान सेवक दांगी का कहना है कि पहले अफीम की खेती के कारण पुलिस का खौफ रहता था और घर परिवार से दूर रहना पर रहना पड़ता था. लेकिन अब गेंदा फूल की खेती से अच्छी कमाई हो रही है और सुकून के साथ अपने परिवार के साथ रहते  हैं. उन्होंने बताया कि गेंदा के फूल में भी काफी अच्छी आमदनी होती है इसके अलावा टमाटर, मटर, धनिया सहित अन्य फसलों का भी किसानों के द्वारा खूब उत्पादन किया जा रहा है. पुलिसिया दबाव के कारण अफीम की खेती पर अब रोक लगी है. हालांकि अभी भी कुछ सुदूरवर्ती क्षेत्रों में अफीम की खेती होने की सूचना मिल रही है.

एसपी ने कहा, सराहनीय है किसानों का प्रयास

 चतरा के एसपी राकेश रंजन ने कहा है कि किसानों का यह प्रयास सराहनीय है. उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से जागरूकता अभियान चलाया गया और इसी का परिणाम है कि किसान आज अफीम की खेती को छोड़कर गेंदा फूल एवं अन्य नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह अभियान आने वाले समय तक चलता रहेगा. एसपी का कहना है कि चतरा जिला को अफीम की खेती से मुक्त करना है और चतरा को नशा से मुक्त बनाने के लिए अफीम की खेती पर पूरी तरह नकेल कसना पुलिस का अंतिम लक्ष्य है. उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के चतरा प्रवास के दौरान भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अफीम की खेती नहीं करने की अपील किसानों से की थी.

रिपोर्ट : संतोष कुमार, चतरा

 

Tags:News

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.