जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : औरत हो औऱत की तरह रहो, मर्द बनने की कोशिश ना करो, हद में रहो. ये वो लफ्ज़ हैं जो एक आम भाषा के तौर पर हम आए दिन सुनते हैं. चाहे वह भारत हो या अमेरिका. पुरुष खुद को श्रेष्ठ औऱ बलवान समझता है. तभी तो अमेरिका जैसे राष्ट्र में भी एक महिला को उपराष्ट्रपति बनने में सालों लग जाते हैं औऱ राष्ट्रपति के पद पर तो आज तक कोई महिला पहुंच भी नहीं पाई है. जहां तक भारत की बात है तो भारत में महिलाओं पर अत्याचार कम होने की बजाए बढ़ते ही जा रहा हैं. क्या गांव, क्या शहर, चारों तरफ हिंसा, महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाएं मन को व्यथित कर देती हैं.
यह है कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य
आखिर महिलाओं को क्यों उनके अधिकार हासिल नहीं होते? जो समाज महिलाओं के साथ भेदभाव और हिंसा करता है, क्यों न उसी समाज के बीच जाकर संवाद स्थापित किया जाए? कुछ ऐसी ही सोच के साथ संस्था ‘युवा’ जमशेदपुर से सटे ग्रामीण इलाके पोटका प्रखंड में जागरूता अभियान चला रही है. 16 दिवसीय इस जागरूकता अभियान का तेंतला पंचायत भवन में विधायक संजीव सरदार, झारखंड विकलांग मंच के अध्यक्ष अरूण कुमार, तेंतला पंचायत की मुखिया दीपांतरी सरदार और ‘युवा’ की सचिव वर्णाली चक्रवर्ती ने शुभारंभ किया. कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है. साथ ही उनको ये भी समझाना है कि सिर्फ मारपीट जैसी शारीरिक हिंसा ही हिंसा नहीं है बल्कि पढ़ाई से वंचित रखना, एक जैसे काम के बदले पुरूषों की अपेक्षा कम पारिश्रमिक देना, अधिकारों से वंचित करना, मानसिक प्रताड़ना देना ये सभी हिंसा की श्रेणी में आते हैं. लेकिन, जानकारी के अभाव में महिलाएं आवाज़ नहीं उठा पाती. दूसरी तरफ, आवाज़ उठाने वाली महिलाओं के प्रति समाज संवेदनशील नहीं रहता. ‘युवा’ की सचिव वर्णाली चक्रवर्ती कहती हैं कि महिलाओं को सुरक्षित करने से ज्यादा उनके अधिकारों को सुरक्षित करने की जरूरत है. ऐसा हो जाए तो महिलाएं अपने आप सुरक्षित हो जाएंगी.
नुक्कड़ नाटकों के द्वारा महिलाओं को किया जा रहा जागरूक
पोटका प्रखंड में ‘युवा’ हल्के फुल्के अंदाज़ में लोगों को महिलाओं के अधिकार को लेकर जागरूक कर रही है. 16 दिनों तक चलनेवाले इस कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटकों, संवाद, पेंटिंग, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को महिला अधिकार, महिलाओं के साथ भेदभाव, थर्ड जेंडर, एलजीबीटी के साथ असंवेदनशील औऱ भेदभावपूर्ण व्यवहार जैसे मुद्दों के प्रति जागरूक किया जा रहा है. इन कार्यक्रमों के माध्यम से खासकर लड़कियों, महिलाओं के मनोबल को बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है. कार्यक्रम में हर तरह के भेदभाव पर चर्चा हो रही है फिर वो चाहे दिव्यांग का ही मसला क्यों न हो. यही वजह है कि इन कार्यक्रमों में ग्रामीणों की सहभागिता भी अच्छी खासी हो रही है. ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह जैसी कुरीतियां अब भी मौजूद हैं और ऐसे कार्यक्रम कहीं न कहीं लोगों को सोचने पर मजबूर करते हैं. कुल 16 दिन का ये कार्यक्रम अपनी संवाद की दिलचस्प शैली से क्षेत्र में जरूर महिलाओं को जागरूक करने में कारगर होगा, यही सबको उम्मीद है.
रिपोर्ट: अन्नी अमृता, जमशेदपुर
