जमशेदपुर (JAMSHEDPUR ) : कांग्रेस-झामुमो की सरकार है और दोनों ही पार्टी के नेता कार्यकर्ता सड़क पर आंदोलनरत हैं. मंगलवार को जहां मंत्री बन्ना गुप्ता ने भगवान बिरसा मुंडा जयंती को लेकर टाटा को आड़े हाथों लेते हुए मौन व्रत धारण किया. वहीं तयशुदा कार्यक्रम के अनुसार टाटा मोटर्स की सहयोगी इकाई टाटा कमिंस के पूना शिफ्ट होने के खिलाफ झामुमो ने बुधवार को टाटा ग्रुप की विभिन्न कंपनियों के गेटों को जाम कर दिया.
कोल्हान के विधायक संजीव सरदार और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में झामुमो के कार्यकर्ता अलग अलग गेटों पर डट गए. कोरोना काल के दौरान एक अरसे से शिथिल पड़ी राजनीतिक गतिविधियों से उलट आज नज़ारा कुछ बदला बदला सा था. मानों कार्यकर्ताओं में जान आ गई हो. लेकिन ये सवाल उठ रहा है कि जब अपनी ही सरकार है तो आंदोलन की नौबत क्यों है? क्या सरकार टाटा को निर्देशित नहीं कर सकती, क्या टाटा पर सरकार दबाव नहीं बना सकती कि वह झारखंड के मज़दूरों के हित में काम करे. सरकारें आईं और गईं लेकिन आज भी जमशेदपुर में स्थित टाटा ग्रुप की कंपनियों में स्थानीय लोगों को वरीयता नहीं मिली. इस मुद्दे पर सालों से आंदोलनरत झामुमो की अपनी सरकार में भी हालात नहीं बदले.
सरकार की चुप्पी पर सवाल
इन सवालों को द न्यूज़ पोस्ट ने टाटा स्टील के मेन गेट का घेराव करने आए पोटका विधायक संजीव सरदार, वरिष्ठ नेताओं मोहन कर्मकार, राजू गिरि, केन्द्रीय महासचिव आस्तिक महतो से पूछा. सबने एक स्वर में कहा कि आज का आंदोलन महज एक शुरूआत है. हालांकि टाटा कमिंस के मुद्दे पर विधायक सरयू राय के सवालों का माकूल जवाब ये लोग नहीं दे पाए, जो ट्वीटर पर उठाए गए हैं. दरअसल सरयू राय ने दो बातें ट्वीट के जरिए उठाई हैं, पहलू ये कि आखिर क्यों एक एक करके टाटा की कंपनियों के मुख्यालय राज्य से बाहर शिफ्ट हो रहे हैं, इस पर सरकार क्यों चुप है? दूसरा ये कि टाटा कमिंस तो तीन साल पहले ही पूना शिफ्ट हो गया है और तकनीकी कारणों से सरकार की एनओसी की जरूरत कंपनी को भी है, तो जो मुद्दा अपने ही हाथ में है उसे लेकर क्यों नहीं सरकार से बात हो रही?
रिपोर्ट : अन्नी अमृता (जमशेदपुर )
