जामताड़ा (JAMTARA) - कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं होते, तबीयत से एक पत्थर तो उछालो यारो. विद्रोही कवि दुष्यंत की यह कविता जामताड़ा में रविवार को शिक्षा विभाग ने चरितार्थ किया है.
कोरोना काल में बाल दिवस मनाने का फरमान
बंगाल की खाड़ी में हवा का दबाव है. लिहाजा शनिवार से झमाझम बारिश हो रही है. साथ में कोरोना के तीसरे लहर का आहट भी है. ऐसे में जामताड़ा शिक्षा विभाग ने बाल दिवस मनाने का फरमान जारी किया. जिसका अनुपालन छात्रों की रैली निकाल कर किया गया. बता दें कि कुछ बच्चे विद्यालय भी आए और रेलियां भी निकली. मौके पर शिक्षकों ने बच्चों की कम उपस्थिति का कारण बेमौसम बरसात को बताया.
जोखिम में जान
ऐसे में सवाल यह है कि बच्चों के जान जोखिम में डालने का अधिकार शिक्षा विभाग को किसने दिया. जबकि अभी भी कोविड-19 का टीका बच्चों को नहीं लगा है. हम अभिभावक को धन्यवाद देते हैं. जिन्होंने खराब मौसम और कोविड-19 के खतरे के आशंका में अपने बच्चों को सड़क पर आने से रोक लिया. चाचा नेहरू के सम्मान में रैली निकलनी चाहिए. ऐसे में क्या चाचा नेहरू रहते तो देश के भविष्य को जोखिम में डालने की इजाजत देते. अगर नहीं तो डी-रेल हुई ऐसे दुस्साहसी शिक्षा व्यवस्था को कौन पटरी पर लाएगा.
रिपोर्ट : आरपी सिंह, जामताड़ा
