☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. News Update

संध्या अर्घ्य के बाद भरी गई कोसी, जानिए क्या है कोसी भरने की परंपरा

संध्या अर्घ्य के बाद भरी गई कोसी, जानिए क्या है कोसी भरने की परंपरा

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR) : छठ महापर्व में शाम का अर्घ्य देने के बाद घाट से लौटकर या घाट पर कोसी भरने की परंपरा रही है. रंगोली बनाकर बड़े दीयों पर ठेकुआ, पूरी और छोटे दीए सजाकर दीप जलाकर रखे जाते हैं. घर के पुरुष मिलकर गन्नों  से इसकी घेराबंदी करते हैं. महिलाएं  परिवार के सदस्यों के नाम लेकर छठ के गीत गाती हैं. हालांकि सभी घरों में ऐसा नहीं होता, लेकिन बिहार के कुछ चुंनिंदा जिलों के रहनेवाले लोग इस परंपरा का पालन करते हैं.

छठ व्रती संध्या कुमारी बताती हैं कि हमलोग छपरा के रहने वाले हैं. यहां छठ पर्व पर कोसी भरने की परंपरा है. जब कोई मनता (ईश्वर से की गई मांग) पूरी होती है, तो हमारे परिवार में उस साल छठ पर कोसी भी भरी जाती है. वहीं बिहार की ही श्वेता रानी कहती हैं कि हमारे परिवार में हर साल कोसी भरने की परंपरा है. दादी सास भी कोसी भरती थीं. सासु मां को भी ऐसा करते देखा. जब वे छठ से थकीं, तो पिछले साल से मैंने छठ करना शुरू किया. अब मैं भी कोसी भरने की परंपरा निभा रही हूं.

Published at:10 Nov 2021 06:44 PM (IST)
Tags:News
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.