धनबाद(DHANBAD) - कोयले की राजधानी धनबाद में फिर एक बार गंभीर बिजली संकट शुरू हो गया है. बता दें कि DVC ने फिर अपना बकाया वसूलने के लिए लोगों का जीवन परेशानी में डाल दिया है. मिली जानकारी के अनुसार 21 00 करोड़ बकाया पाने के लिए DVC ने झारखंड के अपने कमांड एरिया में शुक्रवार की आधी रात से बिजली कटौती शुरू कर दी है. यह कटौती भी आधे से भी अधिक की हो रही है.
600 मेगावाट की जगह केवल 300
बता दें कि डीवीसी झारखंड में रोजाना 600 मेगा वाट बिजली की आपूर्ति करता है. उनका कहना है कि बहुत प्रयास के बाद भी 21 00 सौ करोड़ अभी भी बकाया है. वहीं राज्य सरकार सुन नहीं रही है, इसलिए बाध्य होकर बिजली कटौती करनी पड़ रही है. डीवीसी के कमांड एरिया में धनबाद, कोडरमा, हजारीबाग, रामगढ़ ,गिरिडीह और बोकारो और चतरा समेत सात जिले आते है.
रघुवर सरकार के समय से चला आ रहा विवाद
बकाया का मामला पिछले रघुवर सरकार के समय से भी चला आ रहा है. किश्तवार भुगतान भी किए गए हैं लेकिन DVC का कहना है कि अभी भी 2100 करोड़ बकाया है और जब तक झारखंड सरकार पूरा भुगतान नहीं करती है तब तक बिजली कटौती जारी रहेगी. झारखंड में अभी ऊर्जा मंत्रालय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है. अब देखना यह है कि लोगों को तत्काल राहत देने के लिए मुख्यमंत्री क्या पहल करते है. इसके पहले भी DVC के नख़रे के कारण राज्य सरकार को तत्काल 400 करोड़ का भुगतान करना पड़ा था. यहां तक कि केंद्र सरकार ने तो राज्य को बिना बताए बकाये की 700 करोड़ रुपया आवंटित राज्य अंशदान में से काट लिया था. जिस पर केन्द्र व राज्य में विवाद भी हुई थी.
डीबीसी की मंशा में खोट
बता दें कि DVC ने जो पत्र JBVNL को भेजा है, उसमें लिखा गया है कि 31 अक्टूबर तक कुल बकाया 2100 करोड़ हो गया है. डीवीसी को प्रति माह 100 करोड़ की किश्त मिल रही है. जेबीवीएनएल से आगे के भुगतान का रोड मैप मांगा गया था, लेकिन नहीं दिया गया. इस कारण DVC का वर्किंग कैपिटल प्रभावित हो रही है और कोयले का भुगतान नहीं हो पा रहा है. DVC के इस पत्र पर जेबीवीएनएल एतराज कर रहा है. कहा है कि डीवीसी ने 01 नवंबर को पत्र देकर रोड मैप मांगा जरूर था, लेकिन इसके लिए 7 दिन का समय दिया गया था, फिर अचानक 5 नवंबर से ही बिजली कटौती शुरू कर दी गई. एक बार फिर DVC और JBVNl की लड़ाई में आम जनता पीसने वाली है. उपभोक्ता पूछ रहें है, आख़िर हमारा क्या क़सूर है.
रिपोर्ट : अभिषेक कुमार सिंह, ब्यूरो चीफ, धनबाद
