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मानव तस्करी के शिकार झारखंड के 14 बच्चों को दिल्ली में कराया गया मुक्त, सभी साहेबगंज के बच्चे

BY -
Vishal Kumar
Vishal Kumar
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 11:56:40 PM

रांची(RANCHI): मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सार्थक प्रयास से लगातार मानव तस्करी के शिकार लड़के और लड़कियां को मुक्त कराया जा रहा है और उन्हें उनके घर वापस भेजा जा रहा है. उसी कड़ी में मानव तस्करी के शिकार झारखंड के साहेबगंज जिले के 3 लड़के और 11 लड़कियों को  दिल्ली में मुक्त कराया गया है. इन बच्चों से काउंसेलिंग के दौरान यह पता चला कि रेखा (काल्पनिक नाम) नाम की एक 12 वर्षीय बच्ची को उसके गांव के एक व्यक्ति ने अपहरण कर एक साल पहले दिल्ली लाकर एक साल तक दिल्ली के ही अलग-अलग इलाकों की घरों में काम के लिए लगाया था. जब बच्ची इसका विरोध करने लगी तब उसे रेड लाइट एरिया ले जाकर बेच दिया गया. वहीं, मौका मिलते ही लड़की एक दिन खिड़की से कूदकर भाग निकली और ऑटो वाले की मदद से पुलिस स्टेशन पहुंच गई. जहां पुलिस द्वारा झारखंड भवन से समन्वय स्थापित किया गया और बच्ची के घर का पता लगाया गया. बता दें कि रेखा की मां की मृत्यु हो चुकी है और पिता ने दूसरी शादी कर ली है. घर की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण गांव के एक व्यक्ति द्वारा जबरन उसे दिल्ली ले जाया गया था.

दिल्ली में एकीकृत पुनर्वास संसाधन केंद्र चलाया जा रहा

बता दें कि मानव तस्करी पर झारखंड सरकार और महिला एवं बाल विकास विभाग काफी संवेदनशील है और त्वरित कार्यवाही कर रही है. यही कारण है कि दिल्ली में एकीकृत पुनर्वास संसाधन केंद्र चलाया जा रहा है, जिसका काम है मानव तस्करी के शिकार बच्चें और बच्चियों को मुक्त कराकर उनके जिलों में वापस लाना. सरकार की ओर से सुविधा के लिए टोल फ्री नबंर- 10582 दिया गया है, जो 24 घंटे और सातों दिन काम करता है.

दिल्ली पुलिस का रहा अहम सहयोग

वहीं, इस केंद्र की नोडल ऑफिसर नचिकेता ने बताया गया कि यह केंद्र दिल्ली में प्रधान स्थानिक आयुक्त मस्तराम मीना की देखरेख में और महिला एवं बाल विकास विभाग, झारखंड सरकार के अंतर्गत काम करती है. उन्होंने कहा कि हमारे सचिव कृपानंद झा मानव तस्करी के मुद्दे पर काफ़ी संवेदनशील हैं. उनके द्वारा सख्त निर्देश दिया गया है कि दिल्ली और उसके आस-पास के सीमा क्षेत्र पर विशेष नजर रखी जाए. उसी क्रम में हमें इस बार बड़ी कामयाबी मिली है और साहेबगंज जिले के 14 बच्चों में से 09 बच्चों को दिल्ली पुलिस के सहयोग से दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्र हरियाणा और उत्तर प्रदेश से मुक्त कराया गया है.

14 बच्चों के साथ वापस लौट रही टीम  

बता दें कि महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक छवि रंजन द्वारा सभी जिले को सख्त निर्देश दिया गया है कि जिस भी जिले के बच्चे को दिल्ली में रेस्क्यू किया जाता है, उस जिले के जिला समाज कल्याण पदाधिकारी और बाल संरक्षण पदाधिकारी द्वारा उन्हें वापस उनके जिले में पुनर्वास किया जाएगा. इसी कड़ी में साहेबगंज जिला प्रशासन द्वारा यह पता चलते ही कि उनके बच्चें दिल्ली में रेस्क्यू किए गए हैं, इस मुददे पर तत्वरित कार्रवाई की गई. वहीं, जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पूनम कुमारी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया, जो पिछले छह दिनों से दिल्ली में कैम्प कर आज यानी गुरुवार को 14 बच्चों के साथ वापस झारखंड लौट रही है. जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी द्वारा यह जानकारी दी गई कि इन सभी बच्चों को झारखंड सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ते हुए इनकी निगरानी की जाएगी, ताकि ये बच्चें दोबारा मानव तस्करी का शिकार ना होने पाएं.

मुक्त लोगों को भेजा जा रहा अपने जिले वापस

दरअसल, आयुक्त मस्तराम मीणा के निर्देशानुसार एकीकृत पुनर्वास-सह-संसाधन केंद्र, नई दिल्ली द्वारा लगातार दिल्ली के विभिन्न बालगृहों का भ्रमण कर मानव तस्करी के शिकार, भूले- भटके या किसी के बहकावे में फंसकर असुरक्षित पलायन कर चुके बच्चे, युवतियों को वापस भेजने की कार्रवाई की जा रही है. इसे लेकर दिल्ली पुलिस, बाल कल्याण समिति, नई दिल्ली और सीमावर्ती राज्यों की बाल कल्याण समिति से लगातार समन्वय स्थापित कर मानव तस्करी के शिकार लोगों की पहचान कर मुक्त कराया जा रहा है. उसके बाद मुक्त लोगों को सुरक्षित उनके जिला भेजने का काम किया जा रहा है, जहां उनका पुनर्वास किया जा रहा है.

दलालों के माध्यम से किए थे पलायन

दिल्ली से मुक्त कराए गए बच्चों को दलालों के माध्यम से लाया गया था. झारखंड में ऐसे दलाल बहुत सक्रिय हैं, जो छोटी बच्चियों को बहला-फुसलाकर अच्छी जिंदगी जीने का लालच देकर उन्हें दिल्ली लाते हैं और विभिन्न घरों में उन्हें काम पर लगाने के बहाने से बेच देते हैं. इससे उन्हें एक मोटी रकम मिलती है और इन बच्चियों की जिंदगी नर्क से भी बदतर बना दी जाती है.

माता-पिता भी हैं जिम्मेदार

दलालों के चंगुल में बच्चों को भेजने में उनके माता-पिता की भी अहम भूमिका होती है. कई बार ऐसा देखा गया है कि बच्चे अपने माता पिता, अपने रिश्तेदारों की सहमति से ही दलालों के चंगुल में फंसकर मानव तस्करी के शिकार बन जाते हैं.

मुक्त लोगों की होगी निगरानी

समाज कल्याण महिला बाल विकास विभाग के निर्देशानुसार झारखंड भेजे जा रहे बच्चों को जिले में संचालित कल्याणकारी योजनाओं, स्पॉन्सरशिप, फॉस्टरकेयर, कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय से जोड़ते हुए उनकी ग्राम बाल संरक्षण समिति (VLCPC) के माध्यम से पूरी तरह से निगरानी की जाएगी, ताकि इन्हें पुन: मानव तस्करी का शिकार होने से बचाया जा सके. एस्कॉर्ट टीम में एकीकृत पुनर्वास-सह-संसाधन केंद्र की परामर्शी निर्मला खलखो और कार्यालय सहायक राहुल कुमार ने बहुत अहम भूमिका निभाई.

         

    

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