टीएनपी डेस्क(TNP DESK): देशभर में हर साल हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं. इनमें बड़ी संख्या उन लोगों की होती है जिन्हें दुर्घटना के बाद समय पर इलाज नहीं मिल पाता. कई बार एंबुलेंस देर से पहुंचती है और घायल व्यक्ति “गोल्डन ऑवर” के दौरान जरूरी चिकित्सा सुविधा से वंचित रह जाता है. अब इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा और अहम फैसला लिया है. नई व्यवस्था के तहत नेशनल हाईवे पर दुर्घटना की सूचना मिलते ही सिर्फ 10 मिनट के भीतर एंबुलेंस मौके पर पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है.
सरकार की इस नई पहल का मकसद सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करना और घायलों को तुरंत इलाज उपलब्ध कराना है. मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा यानी “गोल्डन ऑवर” सबसे महत्वपूर्ण होता है. यदि इस दौरान घायल को प्राथमिक उपचार मिल जाए और समय रहते अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है. इसी को ध्यान में रखते हुए अब राष्ट्रीय राजमार्गों पर एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एंबुलेंस की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है.
नई व्यवस्था के तहत हाईवे के अलग-अलग हिस्सों में एंबुलेंस को अलर्ट मोड में तैनात रखा जाएगा ताकि सूचना मिलते ही वे तुरंत घटनास्थल के लिए रवाना हो सकें. इससे सहायता पहुंचने में होने वाली देरी को काफी हद तक कम किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि यह सिस्टम देश में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाएगा.
इस पूरी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है. सभी एंबुलेंस में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और अत्याधुनिक कम्युनिकेशन डिवाइस लगाए जा रहे हैं. जैसे ही किसी हादसे की जानकारी कंट्रोल रूम या राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन नंबर 1033 पर मिलेगी, सबसे नजदीक मौजूद एंबुलेंस को तुरंत अलर्ट भेज दिया जाएगा. इससे राहत और बचाव कार्य पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेज हो सकेगा.
इतना ही नहीं, अब हाईवे और एक्सप्रेसवे पर लगे सीसीटीवी कैमरे और AI आधारित एक्सीडेंट डिटेक्शन सिस्टम भी दुर्घटनाओं पर नजर रखेंगे. जैसे ही कोई हादसा होगा, कंट्रोल रूम को अपने आप अलर्ट मिल जाएगा. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि कई मामलों में लोगों द्वारा सूचना देने का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा और मदद तुरंत शुरू हो जाएगी.
सरकार ने यात्रियों से अपील की है कि वे सफर के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग हेल्पलाइन नंबर 1033 अपने मोबाइल में जरूर सेव रखें. किसी भी आपात स्थिति, दुर्घटना या सहायता की जरूरत पड़ने पर इस नंबर पर तुरंत संपर्क किया जा सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि 10 मिनट एंबुलेंस रिस्पॉन्स सिस्टम भारत की सड़क सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. इससे न केवल हजारों लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी, बल्कि हाईवे यात्रा भी पहले से ज्यादा सुरक्षित, तेज और भरोसेमंद बन सकेगी.