टीएनपी डेस्क(TNP DESK):पीरियड किसी भी लड़की या महिला के लिए वह वरदान है जो उसे स्त्री बनने का दरजा देता है. पीरियड ना हो तो एक महिला पूर्ण रूप से महिला नहीं बन पाती, ना ही वह भविष्य में मां बन पाती है.पीरियड शुरू होने की सही उमर 11 से 15 साल के बीच है. जब बच्चियां स्कूल में होती है तब से उनके मासिक धर्म शुरू हो जाते है. ऐसे में उन्हें काफी ज्यादा परेशानियाँ का सामना भी करना पड़ता है, लेकिन यह एक प्राकृतिक चक्र है जो बच्चियों के स्वास्थ्य के लिए भी काफी ज्यादा जरूरी होता है. अगर ये सही समय पर ना आए तो भी काफी ज्यादा परेशानियाँ होती है.
सेनेटरी पैड नहीं मिलने से बच्चियों को होती थी दिक्कत
पीरियड बताकर नहीं आता यहां हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकता है. किसी को पीरियड उनके डेट से 2 दिन पहले होते है 3 दिन पहले होते है तो वहीं किसी को यह दो-तीन दिन बाद भी हो सकते है पीरियड सटीक तारीख पर शायद ही कभी आता होगा.ऐसे में बच्चियों को स्कूल में पीरियड होने पर काफी ज्यादा परेशानियाँ का सामना करना पड़ता है.क्योंकि इसकी सही टाइमिंग नहीं पता होने की वजह से स्कूल यूनिफॉर्म पैंट में खून लगने का डर लगा रहता है. स्कूल में पीरियड हो जाए और समय पर उन्हें सैनिटरी पैड ना मिले तो कपडे में ब्लड लगने की वजह से उन्हें काफी ज्यादा शर्मिंदगी महसूस होती है.वही उन्हें पढाई में भी बहुत बाधा आती है ऐसे में सभी स्कूलों में सीनेटरी पैड रखना अब अनिवर्य कर दिया गया है.
पढ़े क्यों सुप्रीम कोर्ट ने लिया ये फैसला
बच्चियों का दिन का अधिकतर समय स्कूल में ही बीतता है. ऐसे में अगर वह स्कूल में पीरियड हो जाती है, तो सीनेटरी पैड नहीं मिलने की वजह से उन्हें काफी ज्यादा शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. वही उनके पढाई में भी बहुत परेशानी आती है इसके साथ ही कपडे या पैंटी में ब्लड लग जाने की वजह से कपडे भी खराब हो जाते है और उनके स्वास्थ्य पर भी काफी बुरा असर पड़ता है.सेनेटरी पैड समय पर नहीं मिलने की वजह से बच्चे अन्य असुरक्षित स्रोत यानी गंदा कपड़ा या कॉटन का उपयोग करती है जिससे संक्रमण का डर रहता है.ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सभी स्कूलों को यानी सरकारी और गैर सरकारी स्कूलों में सेनेटरी पैड बच्चियों को देने का आदेश दिया है.
स्कूल में नहीं मिला सैनिटरी पैड तो लग जाएगा ताला
यदि आपकी भी बेटी चाहे वह सरकारी स्कूल में पढ़ती हो या गैर सरकारी स्कूल में पढ़ती हो स्कूल में पीरियड होती है और स्कूल में फ्री में सेनेटरी पैड नहीं मिलता है तो आप स्कूल में ताला लगवा सकते है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि बच्चों को अगर स्कूल में फ्री में सीनेटरी पैड नहीं दिया गया तो उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है.सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से करोडो बच्चियों का भविष्य सुरक्षित हुआ है जो स्कूल में पढ़ती है और किसी ना किसी महीने में जरूर स्कूल में पीरियड हो जाती है अब उन्हें कोई शर्मिंदगी का सामना नहीं करना पड़ेगा अब वह खुलकर स्कूल में भी अपनी पढ़ाई कर पाएंगी और जी पाएंगी.
जिला शिक्षा पदाधिकारी को करें शिकायत
यदि आपकी बेटी स्कूल में पढ़ती है और स्कूल में सेनेटरी पैड नहीं दिया जाता है तो आप क्या कार्रवाई सकते है. चलिए हम आपको बताते है.यदि कोई स्कूल सेनेटरी पैड नहीं रखता है या टाल मटोल करता है तो इसके लिए आप जिला शिक्षा पदाधिकारी को लिखित शिकायत कर सकते है.जिसमे आपके स्कूल का नाम तारीख और इससे जो संबंधित सबूत संलग्न करना पड़ेगा.अगर स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होती.तो राज्य शिक्षा विभाग या महिला एवं बाल विकास विभाग में मामला उठाया जा सकता है.
स्कूलों के लिए मान्यता हो सकती है रद्द
सुप्रीम कोर्ट की ओर से साफ़ कहा गया है कि स्कूल में लड़कियों के लिए सीनेटरी पैड रखना जरूरी है वरना स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी.इसके साथ ही उपयोग किया गया सीनेटर पैड फेंकने के लिए भी सही व्यवस्था होनी जरूरी है.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शौचालय की सही सुविधा नहीं मिलेगी तो इस पर विद्यालय नप जाएंगे . कई स्कूलों में मेनस्ट्रुअल हाइजीन कॉर्नर बनाने के निर्देश दिए गए है. जिससे बच्चियां बिना हिचक जरूरत की चीज ले सकें.यदि कोई भी स्कूल सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश का पालन नहीं करता है और लापरवाही बरतता है तो शिक्षा विभाग कार्रवाई कर सकता है.
