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शव के साथ प्रदर्शन पड़ सकता है भारी, गहलोत सरकार ने पारित किया ऑनर ऑफ डेड बॉडी बिल 2023, जानें क्या है प्रावधान

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 3:50:42 PM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):अक्सर आपने देखा होगा कि हत्या या किसी हादसे के बाद परिजन या ग्रामीण दोषी को सजा दिलाने, सरकार या पुलिस से जांच की मांग, या मुआवजे की मांग को लेकर मृत व्यक्ति के शरीर को सड़क पर रखकर प्रदर्शन करते हैं. इसकी वजह से शव के अंतिम संस्कार करने में काफी देर होती है. वहीं इसकी वजह से सड़क पर आने जाने-वाले लोग इसको देखकर विचलित होते हैं. लेकिन अब ऐसा करना कानून अपराध है. क्योंक अब इसकी रोक के लिए गहलोत सरकार ने एक बिल पास किया है.

शव के साथ सड़क पर प्रदर्शन पड़ सकता है भारी

आपको बताएं कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने विधानसभा में एक बिल पास किया है. जिसके प्रावधान के अनुसार यदि कोई व्यक्ति किसी के भी शव को लेकर सड़क पर विरोध प्रदर्शन, किसी तरह का हंगामा या फिर मांग करता है, तो उसे जेल जाना पड़ सकता है.तो आईये जानते है इस बिल के अनुसार कितने साल की सजा या जुर्माने का प्रावधान है.

राजस्थान सरकार ने पास किया ऑनर ऑफ डेड बॉडी बिल 2023

आपको बताये कि राजस्थान सरकार ने इस बिल का नाम ऑनर ऑफ डेड बॉडी बिल 2023 रखा है. जिसके पास करने का एक ही मकसद है कि मृत व्यक्ति के शरीर को मरने के बाद किसी तरह का कोई कष्ट ना हो. और समय रहते हैं उसका सही समय पर अंतिम संस्कार किया जा सके. इस बिल के बारे में जानकारी देते हुए गहलोत सरकार के मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि इस तरह का कानून किसी भी राज्य में नहीं था. जिसकी वजह से लोग शव के साथ गलत व्यवहार करते थे. और सड़क पर रखकर सरकार से नाजायज मांग किया करते थे. लेकिन इस बिल के आने से अब इस पर रोक लग जाएगी.

विधानसभा में इस बिल को ध्वनिमत से पास कर दिया गया

आपको बताये कि राजस्थान विधानसभा में इस बिल को ध्वनिमत पास कर दिया गया. वहीं मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि कुछ लोग मृत व्यक्ति के शरीर को सड़क पर रखकर अनुचित और नाजायज मांगे करते हैं, और इसके मामले लगातार राजस्थान में बढ़ रहे थे. जो चिंता का विषय है. जिसको देखते हुए इस बिल को पास किया गया, ताकि कोई भी इस तरह की हरकत करने से पहले 100 बार सोचें.

बिल में 6 महीने तक की सजा का प्रवाधान

वहीं आगे मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि हाल के दिनों में बहुत सारे ऐसे मामले सामने आए हैं जहां परिवार के लोग अपने मृत परिजनों के शरीर को लेने से मना कर देते हैं, और मुआवजे की मांग को लेकर सरकार सड़क पर अड़ जाते हैं. जिस तरह से किसी जिंदा व्यक्ति के साथ व्यवहार किया जाता है, उसी तरह मृत व्यक्ति के शरीर की भी गरीमा होती है. उनके साथ भी सही व्यवहार किया जाना चाहिए. उनको भी सही तरीके से दफनाने, अंतिम संस्कार का अधिकार है.

जानें बिल से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां

वहीं चलिए जान लेते हैं कि इस बिल में कितने साल की सजा का प्रावधान है. तो आपको बता दें कि परिवार के मृत सदस्यों के अलावा यदि कोई बाहरी व्यक्ति किसी के मृत शरीर का इस्तेमाल किसी मांग के लिए करता है, तो उसे कम से कम 6 महीने की जेल काटनी पड़ सकती है. वहीं आगे इसे 5 साल तक बढ़ाया भी जा सकता है. और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.

शव लेने से इंकार करने पर हो सकती है 1 साल की सजा

वहीं यदि मृतक के परिजन यदि शव लेने से इंकार करते है, तो 1 साल के साथ जुर्माना का प्रावधान है. इसके साथ ही कोई ऑथराइज्ड व्यक्ति मृत्यु व्यक्ति से जुड़े जेनेटिक खुलासे सार्वजनिक करता है, या दोषी पाया जाता है, तो उसे 3 से 10 साल की सजा काटना पड़ सकती है.

2022 में उत्तर प्रदेश में एसओपी जारी किया गया था

वहीं इस बिल के विरोध में बीजेपी विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता राजेंद्र राठौर ने इसका विरोध जताया है. और कहा है कि इस बिल के जरिए लाठी तंत्र लाना चाहती है. क्योंकि इसके प्रावधान के अनुसार एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट सड़क पर जमे भीड़ को भगाने और बल प्रयोग कर सकते हैं. वहीं आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2022 में हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य सरकार ने एसओपी जारी किया था. इसके मुताबिक शव के साथ धरना प्रदर्शन करना अपराध है.

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