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धर्मांतरित जनजाती को आरक्षण से करें मुक्त - जनजाति सुरक्षा मंच

धर्मांतरित जनजाती को आरक्षण से करें मुक्त - जनजाति सुरक्षा मंच

दुमका (DUMKA) : जनजातीय सुरक्षा मंच के बैनर तले जनजाती समाज का विशाल जनसभा और रैली दुमका के यज्ञ मैदान में संपन्न हुआ. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कृपाशंकर भगत, जनजाति सुरक्षा मंच राष्ट्रीय टोली सदस्य, डॉ राजकिशोर हांसदा, अखिल भारतीय जनजाति सुरक्षा मंच राष्ट्रीय सह संयोजक ने किया. जनजातीय सुरक्षा मंच के नेतृत्व में दुमका जिला के विभिन्न प्रखंडों से लगभग 2000 से अधिक जनजातीय समाज के महिला - पुरुषों की उपस्थिति रैली व सभा को भव्यता प्रदान कर रही थी. पहले नगर में रैली निकाली गई तत्पश्चात कार्यक्रम यज्ञ मैदान में संपन्न हुआ. कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सुलेमान शंकर मुर्मू प्रांत सह संयोजक ने कहा कि आजादी के पूर्व अंग्रेजों द्वारा स्थापित चर्च की आड़ में जनजाति समाज का धर्मांतरण कर पहचान मिटाने की चेष्टा प्रारंभ की गई थी. आजादी के 75 वर्ष बाद भी जनजाति समाज की पहचान एवं अस्तित्व को मिटाने का कार्य आज भी जारी है. ईसाई मिशनरियों के द्वारा झारखंड में जनजाति समाज की लाखों एकड़ जमीन पर स्कूल और अस्पताल के नाम पर हजारों चर्च निर्माण कर चुके हैं. यह सभी चर्च हमारे भाई बंधुओं को धर्मांतरित कर ईसाई बनाने में लगा हुआ है. विदेशी इसाई धर्म अपनाते ही जनजाति समाज के रीति रिवाज पूजा परंपरा और संस्कृति समाप्त हो जाती है. धर्मांतरित ईसाई अनुसूचित जन जाति प्रमाण पत्र के आधार पर जनजाति के लिए आरक्षित पदों पर हजारों हजार नौकरियां प्राप्त कर चुके हैं. आज से 50 वर्ष पूर्व स्वर्गीय कार्तिक उरांव ने इसका विरोध किया था. अतः आज इस सभा के माध्यम से जनजातीय सुरक्षा मंच राज्य सरकार से मांग करती है कि जो भी जनजाति धर्मांतरित हो गए हैं, उन्हें अल्पसंख्यक जाति घोषित करें. जनजातियों की पुरानी रीति रिवाज पूजा पद्धति और परंपरा को मनाने वालों को ही अनुसूचित जाति का जाति प्रमाण पत्र दिया जाए.

इस सभा के माध्यम से जनजातीय सुरक्षा मंच के द्वारा सरकार से निम्नलिखित मांगे की गई - 


1) माता पिता और संतान यदि जनजाति धार्मिक आस्था एवं रूढ़िवादी परंपरा का निर्वाह कर रहे हैं तो ही उनकी संतान को जनजाति का जाति प्रमाण पत्र दिया जाए.


2) विवाह उपरांत महिला की पति के धार्मिक एवं रूढ़िवादी सामाजिक आस्था के आधार पर विवाहिता को जनजाति का जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया जाए.

3) धर्मांतरित जनजाति को  जनजाति आरक्षण से वंचित किया जाए.
 4) पेसा कानून के तहत ग्राम सभा से जिला परिषद तक एकल पद मूल जनजाति धर्म आस्था रीति रिवाज रूढ़ीवादी परंपराओं जनजाति के लिए आरक्षित है,  झारखंड में इसकी अवहेलना कर अल्पसंख्यकों को इन पदों पर चुना जा रहा है, इसकी जांच कर तत्काल कार्रवाई की जाए.

5) सी एन टी, एसपीटी एक्ट का उल्लंघन कर इसाई मिशनरियों द्वारा विद्यालय अस्पतालों का निर्माण किया गया है. असामाजिक तत्वों द्वारा भी हजारों एकड़ जमीन लेकर एक्ट का उल्लंघन किया गया है. उसकी जांच कर मूल रैयती को मालिकाना हक दिलवाया जाए.

कार्यक्रम में शामिल हुए दर्जनों कार्यकर्ता

कार्यक्रम का संचालन दत्ता हांसदा ने किया. कैलाश उरांव ने मंचस्थ अतिथियों का परिचय करवाया. कार्यक्रम को सफल बनाने में विमल मरांडी(जिला अध्यक्ष भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा), मनोज हांसदा, दिनेश मरांडी, जिला महामंत्री, संतोष मुर्मू जिला मीडिया प्रभारी, दिलीप कुमार हांसदा, मनोज हेम्ब्रम, सुनील सोरेन,आयटू मुर्मू ,सनत मुर्मू, गुरु बाबा उदय सर मुर्मू, रामदेव मरैया, लुखिराम टुडू, साहेब मुर्मू, राजमणि मरांडी,पोरमे हेम्ब्रम,वंदे उरांव, सूरज मुर्मू, सुबोध मुर्मू, बुधन हेंब्रम, सुशील मरांडी, मनोज हांसदा, दुर्गा मरांडी, रमेश मंडल, अशोक पाल आदि. दर्जनों कार्यकर्ता सम्मिलित हुए.

रिपोर्ट: पंचम झा, दुमका

Published at:20 Nov 2022 04:57 PM (IST)
Tags:tribal reservationdumka tribaldumka newsjharkhand latest newsthe news post
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