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सीयूजे में जनजातीय जीवन पर फ़िल्म प्रदर्शनी का आयोजन, छात्रों को दिखाई गई ये सभी फिल्में 

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 5:20:48 AM

रांची(RANCHI): झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय के जनसंचार विभाग में फिल्म प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. इस अवसर पर आदिवासी जीवन को समर्पित तीन फिल्में प्रदर्शित की गईं. जिनमें चेन्तेई खियामनिउंगन की "स्ट्रेंथ इन डायवर्सिटी", मिंकेट लेप्चा की "वॉयस ऑफ तीस्ता" और अखरा कम्युनिकेशन, रांची की "करम" नामक फिल्में छात्रों को दिखाई गई. 

कहानी कहना मानव सभ्यता का केंद्र है: प्रोफेसर देव व्रत सिंह 

कार्यक्रम की शुरुआत सीयूजे के जनसंचार विभाग के पूर्व एचओडी और डीन प्रोफेसर देव व्रत सिंह ने की. फिल्मों के महत्व पर विचार करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा, "कहानी कहना मानव सभ्यता का केंद्र है और एक जनसंचार पेशेवर के रूप में हमलोगों  फिल्मों, उपन्यासों, किताबों आदि के साथ इस परंपरा को आगे ले जाने का दायित्व है." इसके बाद टाटा स्टील फाउंडेशन के अधिकारी कुमार गौरव, सूरज गिलुआ और नीतीश कुमार का संबोधन हुआ, जिन्होंने संवाद: ए ट्राइबल कॉन्क्लेव की शुरुआत और यात्रा पर प्रकाश डाला. औपचारिक संबोधन के बाद, चेंतेई खिआम्नियुंगन की फ़िल्में "स्ट्रेंथ इन डायवर्सिटी: स्ट्रेस-रेसिस्टेंट क्रॉप्स ऑफ़ नागालैंड"; मिंकेट लेप्चा की "वॉयस ऑफ तीस्ता"; और अखरा कम्युनिकेशन की "करम" को प्रदर्शित किया गया.  

कार्यक्रम का आयोजन सहायक प्रो. डॉ. सुदर्शन यादव और प्रो. डॉ. अमृत कुमार ने किया

कार्यक्रम का समापन जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमृत कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ  किया. कार्यक्रम का आयोजन जनसंचार विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुदर्शन यादव और प्रोफेसर डॉ. अमृत कुमार ने किया. जिसमें जनसंचार विभाग, सीयूजे के सहायक प्रोफेसर डॉ. राजेश कुमार, सहायक प्रोफेसर रश्मि वर्मा एवं तकनीकी सहायक रामनिवास सुथार की सक्रीय भूमिका रही. 

फिल्म के बारे में जानिए 

"स्ट्रेंथ इन डाइवर्सिटी" नागालैंड के खियामनियुंगन की पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जैविक खाद्य पदार्थों की खेती पर आधारित  फिल्म है. यह फ़िल्म पीढ़ी दर पीढ़ी पारंपरिक ज्ञान के हस्तांतरण को भी चित्रित करता है. "वॉयस ऑफ तीस्ता" में मिंकेट लेप्चा द्वारा सिक्किम, पश्चिम बंगाल और तीस्ता नदी में विभिन्न समूहों और समुदायों के बीच संबंधों को समझने की कोशिश की गई है. यह फिल्म स्थानीय लोगों की कमजोर और अनसुनी आवाजों का पता लगाने की कोशिश करती है. अखरा कम्युनिकेशन द्वारा "करम" , करम (बोलचाल की भाषा में करमा) के बारे में एक वृत्तचित्र है, जो भारतीय राज्य झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार में मनाया जाने वाला फसल उत्सव है.  

Tags:jharkhandranchiFilm exhibition on tribal life organized in CUJcentral university of jharkhandFilm exhibition in cuj

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