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श्रद्धालुओं की भीड़, आस्था और विश्वास का दिखा संगम, परगला नदी के तट पर मकर संक्रांति पर लगा भव्य मेला

BY -
Rajnish Sinha
Rajnish Sinha
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 19, 2026, 8:43:04 AM

पाकुड़ : जिला के हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत रानीपुर गांव के परगला नदी तट पर मकर संक्रांति के अवसर पर आज भव्य मेले का आयोजन किया गया. इस मेले में संथाल परगना प्रमंडल के सभी जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे. मेले में पहुंचे श्रद्धालु सुबह से ही परगला नदी में पवित्र स्नान करते हैं. स्नान के बाद नदी के ऊपर स्थित मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है. इस दौरान भगवान राम-लखन सहित अन्य देवी-देवताओं की विधिवत पूजा होती है. साफाहोड़ धर्म के धर्मगुरुओं ने बताया कि इस पूजा का मुख्य उद्देश्य पूर्व में हुई किसी भी भूल-चूक या पाप से मुक्ति पाना और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करना है.

अग्नी की पूजा-अर्चना

मेले की एक खास परंपरा आग की पूजा भी है. इसमें साफाहोड़ धर्म के लोग जलती हुई आग को लांघते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है कि इससे चर्म रोग, घाव, फोड़े-फुंसी जैसी बीमारियों से राहत मिलती है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरे विश्वास के साथ निभाई जाती है. दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले साफाहोड़ धर्मावलंबी 13 जनवरी को ही रानीपुर पहुंच जाते हैं. 14 जनवरी की अहले सुबह से पूजा-पाठ शुरू हो जाता है जो शाम तक चलता है.

पारंपरिक संस्कृति को मजबूती से जोड़ने का कार्य 

मेले में खाने-पीने, खिलौनों, मिठाइयों और घरेलू उपयोग की वस्तुओं की कई दुकानें लगती है. मेला देखने आए लोग यहां से अपने घर के लिए तरह-तरह का सामान खरीदते हैं. यह मेला 14 जनवरी को सुबह से शाम करीब 7 बजे तक चलता है. मेले के दौरान शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से पूरी व्यवस्था की गई है. पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात हैं ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या भगदड़ की स्थिति न बने और मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके. कुल मिलाकर रानीपुर का यह मेला न सिर्फ धार्मिक आस्था का केंद्र है बल्कि यह सामाजिक मेल-मिलाप और पारंपरिक संस्कृति को भी मजबूती से जोड़ने का कार्य करता है.

रिपोर्ट : विकास शाह 

Tags:PAKURMAKAR SANKARANTIHIRANPURRANIPURMELA

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