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शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती है मसल्स पेन, अपनाएं लाइफस्टाइल के ये 9 जरूरी बदलाव

BY -
Rashmi Prasad  CE
Rashmi Prasad CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 20, 2026, 4:24:31 PM

टीनपी डेस्क (TNP DESK): आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर में दर्द होना एक आम समस्या बन चुका है. बुजुर्ग के साथ साथ युवाओं में अक्सर देखा गया है की लोग पीठ, कंधों या पैरों की मांसपेशियों में दर्द की समस्या होने लगती है. इसके बावजूद अक्सर  शरीर में होने वाले दर्द को थकान या काम का तनाव मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मांसपेशियों में होने वाले इस दर्द की एक बड़ी और मुख्य वजह शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन (Dehydration) हो सकती है? जी हाँ, हमारा शरीर लगभग 60% पानी से बना है, और हमारी मांसपेशियों (Muscles) में तो लगभग 75% तक पानी होता है. ऐसे में जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, तो इसका सीधा असर हमारी मांसपेशियों की कार्यप्रणाली पर पड़ता है. लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये कुछ आसान तरीके अपनाकर इसे बचा जा सकता है, बस आपको अपनी लाइफस्टाइल में 9 जरूरी बदलाव लाने की जरूरत है.

पानी की कमी और मसल्स पेन का क्या संबंध है?

  1. इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन: पानी की कमी से शरीर में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगड़ जाता है. ये मिनरल्स मांसपेशियों के संकुचन (Contraction) और आराम (Relaxation) के लिए जिम्मेदार होते हैं. इनकी कमी से मांसपेशियों में अचानक ऐंठन (Cramps) और दर्द होने लगता है.
  2. रक्त संचार में कमी: पानी की कमी होने पर खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे मांसपेशियों तक ऑक्सीजन और जरूरी पोषक तत्वों की आपूर्ति ठीक से नहीं हो पाती. इस वजह से टॉक्सिन्स (जैसे लैक्टिक एसिड) मांसपेशियों में जमा होने लगते हैं, जो दर्द का कारण बनते हैं.

मांसपेशियों के दर्द से बचने के लिए लाइफस्टाइल के 9 जरूरी बदलाव

यदि आप भी अक्सर मसल्स पेन या ऐंठन से परेशान रहते हैं, तो दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जीवनशैली में नीचे दिए गए 9 आसान और प्रभावी बदलावों को अपनाएं:

  1. हाइड्रेशन का 'गोल्डन रूल' अपनाएं (भरपूर पानी पीएं)

मांसपेशियों को स्वस्थ रखने का सबसे पहला और बुनियादी नियम है पर्याप्त पानी पीना. एक वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 8 से 10 गिलास (लगभग 2.5 से 3 लीटर) पानी जरूर पीना चाहिए. यदि आप वर्कआउट करते हैं या धूप में ज्यादा रहते हैं, तो पानी की इस मात्रा को और बढ़ा दें. सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीने की आदत डालें.

  1. डाइट में शामिल करें इलेक्ट्रोलाइट्स रिच फूड्स

सिर्फ सादा पानी पीना ही काफी नहीं है, शरीर में मिनरल्स का होना भी जरूरी है. अपनी दैनिक डाइट में नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस (ORS) जैसी चीजों को शामिल करें. नारियल पानी पोटेशियम और मैग्नीशियम का प्राकृतिक स्रोत है, जो मांसपेशियों की ऐंठन को तुरंत ठीक करने में मदद करता है.

  1. रसीले फल और सब्जियों का सेवन बढ़ाएं

अपने भोजन में ऐसे फल और सब्जियों को जगह दें जिनमें पानी की मात्रा अधिक होती है. तरबूज, खरबूजा, संतरा, खीरा, ककड़ी, टमाटर और हरी पत्तेदार सब्जियां न केवल शरीर को हाइड्रेट रखती हैं, बल्कि मांसपेशियों को मजबूती देने वाले विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स भी प्रदान करती हैं.

  1. वर्कआउट से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग है जरूरी

यदि आप जिम जाते हैं, रनिंग करते हैं या योग करते हैं, तो बिना वार्म-अप और स्ट्रेचिंग के व्यायाम शुरू न करें. वर्कआउट शुरू करने से पहले 5-10 मिनट हल्के व्यायाम करें और खत्म करने के बाद मांसपेशियों को 'कूल डाउन' करने के लिए स्ट्रेचिंग करें. इससे मांसपेशियों का लचीलापन बढ़ता है और दर्द की संभावना कम हो जाती है.

  1. कैफीन और अल्कोहल का सेवन सीमित करें

चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और अल्कोहल का अत्यधिक सेवन शरीर को हाइड्रेट करने के बजाय डिहाइड्रेट करता है. ये चीजें 'डाईयूरेटिक' (Diuretic) की तरह काम करती हैं, जिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर का पानी बाहर निकल जाता है. इसलिए इनका सेवन सीमित करें और इनके स्थान पर हर्बल टी या फ्रेश जूस को प्राथमिकता दें.

  1. लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठने से बचें

आजकल डेस्क जॉब के कारण लोग लगातार कई घंटों तक एक ही मुद्रा में बैठे रहते हैं. इससे मांसपेशियों में जकड़न (Stiffness) आ जाती है और रक्त प्रवाह धीमा हो जाता है. हर 45 से 60 मिनट में अपनी सीट से उठें, थोड़ा टहलें और अपनी पीठ व गर्दन को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें.

  1. मैग्नीशियम से भरपूर खाद्य पदार्थ खाएं

मैग्नीशियम मांसपेशियों को आराम देने (Muscle Relaxant) का काम करता है. इसकी कमी से मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है. अपनी डाइट में बादाम, काजू, कद्दू के बीज, अलसी के बीज, डार्क चॉकलेट और साबुत अनाज जैसी मैग्नीशियम से भरपूर चीजों को शामिल करें.

  1. पर्याप्त और गहरी नींद लें

जब हम सोते हैं, तो हमारा शरीर डैमेज टिश्यूज और मांसपेशियों की मरम्मत (Repair) करता है. अधूरी नींद के कारण शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन (Cortisol) का स्तर बढ़ जाता है, जिससे दर्द की संवेदनशीलता बढ़ जाती है. इसलिए रोजाना 7 से 8 घंटे की शांतिपूर्ण नींद जरूर लें.

  1. गुनगुने पानी से स्नान या सिकाई करें

यदि मांसपेशियों में लगातार हल्का दर्द बना रहता है, तो गुनगुने पानी से स्नान करना बेहद फायदेमंद होता है. आप नहाने के पानी में एप्सम साल्ट (Epsom Salt) भी मिला सकते हैं. एप्सम साल्ट में मैग्नीशियम सल्फेट होता है, जो त्वचा के जरिए अवशोषित होकर मांसपेशियों के दर्द और सूजन को तेजी से कम करता है

डिहाइड्रेशन के अन्य लक्षणों को पहचानें

मांसपेशियों में दर्द के अलावा, आपका शरीर पानी की कमी होने पर कई अन्य संकेत भी देता है, जिन्हें पहचानना जरूरी है:

  • पेशाब का रंग गहरा पीला होना.
  • बार-बार मुंह और होठों का सूखना.
  • बिना वजह सिरदर्द या चक्कर आना.
  • हर समय अत्यधिक थकान और सुस्ती महसूस होना.
  • त्वचा का रूखा और बेजान हो जाना.

महत्वपूर्ण नोट: यदि लाइफस्टाइल में बदलाव करने और पर्याप्त पानी पीने के बाद भी आपकी मांसपेशियों का दर्द ठीक नहीं हो रहा है, या दर्द के साथ सूजन और लालिमा बढ़ रही है, तो इसे नजरअंदाज न करें. यह किसी अन्य अंतर्निहित चिकित्सीय स्थिति (Medical Condition) का संकेत हो सकता है, ऐसी स्थिति में तुरंत किसी डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें.

हमारा शरीर एक मशीन की तरह है, जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए पानी रूपी ईंधन की अत्यंत आवश्यकता होती है. मांसपेशियों के दर्द से मुक्त और सक्रिय जीवन जीने के लिए खुद को हाइड्रेटेड रखना सबसे आसान और प्रभावी उपाय है. आज ही से अपने पास पानी की बोतल रखने की आदत डालें, संतुलित आहार लें और एक स्वस्थ जीवनशैली की ओर कदम बढ़ाएं.

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