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प्रेमानंद की माने तो खानपान या भोजनशैली तय करता है आपकी पर्सनल्टी ,इसलिए आज से ही बदल डाले पुराने तौर तरीके

BY -
Priya Jha CE
Priya Jha CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 11:32:59 AM

TNP DESK:संत प्रेमानंद जी महाराज मानते हैं कि भोजन केवल भूख मिटाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक क्रिया है. जब हम भोजन को प्रसाद मानकर खाते हैं, तो वह न केवल हमारे शरीर को पोषण देता है बल्कि मन को शांत और आत्मा को शुद्ध करता है. अगर आप भी नहीं जानते कि खाना खाते वक्त किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, तो इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि प्रेमानंद जी महाराज खाना खाते समय किन नियमों का पालन करने को कहते हैं.

भोजन करने से पहले भगवान को करें याद 

महाराज जी कहते हैं भोजन करने से पहले भगवान को याद करें और उनका धन्यवाद करे. भोजन करने से पहले हाथ धोएं,शांत मन से बैठें और भोजन को ‘प्रसाद’ समझ कर खाए .ऐसा करने से आत्मा भी शुद्ध होती है. भोजन को प्रसाद समझकर ग्रहण करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शरीर को सकारात्मक ऊर्जा मिलती है.

 सात्विक भोजन से मिलती है शांति 

प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार भोजन हल्का, सात्विक और सदा होना चाहिए.प्याज़-लहसुन जैसे तामसिक भोजन खाने से दूरी बनाएं और खीर, पूरी, दाल-सब्ज़ी जैसे शुद्ध सात्विक भोजन रोज खाए. ऐसा करने से न केवल हमारा शरीर हल्का बनाता है, बल्कि मन को भी शांति और स्थिरता मिलती है.अगर आप तामसिक भोजन खाते है तो आपको दिन भर आलस, क्रोध या थकावट महसूस होती रहती है .इसलिए महाराज जी हमें सलाह देते है कि सात्विक भोजन ही करना चाहिए.

समय का पालन, रात का भोजन सूर्यास्त से पहले करे

महाराज जी सलाह देते हैं कि सूरज के साथ खाओ, चाँद से पहले सो जाओ .उनका कहना है कि रात का खाना हमें 9 बजे नहीं बल्कि शाम के 6 बजे से पहले ही कर लेना चाहिए.अगर हम रात में देरी से खाना खाते है तो फिर पाचन में दिक्कत होती है,और इस वजह से नींद पूरी नहीं हो पाती है. खाते वक्त मन को शांत करके खाए ,और इधर उधर काम पर ध्यान न दे.भोजन करते समय दिशा का खास ध्यान रखना चाहिए, कि हम हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ ही मुंह करके खाए.

पेट को खाली छोड़ो, मन को हल्का रखो 

महाराज जी कहते हैं की पेट को हमेशा थोड़ा खाली रखना चाहिए, इससे मन हल्का रहता है.जितनी भूख है, उससे हमेशा थोड़ा कम खाओ.अगर आप पीट भर कर खा लेते है ,तो आप न सिर्फ अपने शरीर को तकलीफ दे रहे है,बल्कि अपनी आत्मा को भी भारी कर रहे हैं.आपको बताए हमारे पेट में तीन हिस्से होते हैं, एक खाना के लिए,एक पानी के लिए और और एक हवा के लिए.लेकिन अगर हम ठूस कर खा लेते है ,तो एसिडिटी, अपच, गैस, और बेचैनी जैसी समस्या होने लगती है.

भोजन, आत्मा की शांति के लिए जरूरी 

महाराज जी का ये भी कहना है कि खाना सिर्फ भूख मिटने के लिए नहीं है ,बल्कि आत्मा को शांत करने का ज़रिया भी है.जब आप भगवान के नाम के साथ, सात्विक भोजन, कम भोजन और शांत वातावरण में खाते हैं ,तब भोजन एक साधना बन जाता है .ऐसा करने से न सिर्फ शरीर स्वस्थ होता है, बल्कि जीवन में आती है आध्यात्मिक प्रगति.

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