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मानसून आते ही झारखंड में बढ़ता ‘सांपों का खतरा’, हर साल सैकड़ों जानें जा रहीं

BY -
Diksha Benipuri
Diksha Benipuri
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 27, 2026, 2:45:29 PM

रांची: झारखंड में मानसून की शुरुआत होते ही सर्पदंश की घटनाओं में तेजी आने लगती है. खासकर ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में यह समस्या हर साल गंभीर रूप ले लेती है. स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में सांप काटने से होने वाली मौतों में सबसे बड़ा कारण रस्सेल वाइपर सांप को माना जाता है. इसका जहर शरीर के अंदर तेजी से असर करता है और कई अंगों को नुकसान पहुंचा देता है.

इसके अलावा कॉमन करैत नामक सांप भी बेहद खतरनाक माना जाता है. यह अधिकतर रात में हमला करता है और सोते हुए लोगों को काटता है. कई बार शुरुआती समय में दर्द महसूस नहीं होता, जिससे मरीज की हालत अचानक बिगड़ जाती है. राज्य गठन के बाद से अब तक झारखंड में सर्पदंश के 90 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं.

अगर सबसे अधिक प्रभावित इलाकों की बात करें तो पलामू और गढ़वा जिले सबसे संवेदनशील माने जाते हैं. मानसून के दौरान यहां बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचते हैं. इसके अलावा पश्चिम सिंहभूम, गुमला, लोहरदगा और गिरिडीह जिलों में भी हर साल कई मामले सामने आते हैं. ग्रामीण इलाकों में जमीन पर सोने की आदत और झाड़-फूंक पर भरोसा कई बार जानलेवा साबित हो जाता है.

झारखंड में पाए जाने वाले जहरीले सांपों में कॉमन करैत, नाग, रस्सेल वाइपर और बैंडेड करैत प्रमुख हैं. वहीं धामन, पानी सांप और अजगर जैसे कई सांप बिना जहर वाले भी होते हैं, लेकिन लोग डर के कारण उन्हें भी नुकसान पहुंचा देते हैं.

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार सर्पदंश का सबसे प्रभावी इलाज एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन है. राज्य सरकार ने सर्पदंश को राज्य विशेष आपदा की श्रेणी में रखा है. मौत होने की स्थिति में पीड़ित परिवार को 4 लाख रुपये तक मुआवजा देने का प्रावधान है. जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी वेनम की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.

डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि सांप काटने के बाद झाड़-फूंक में समय बर्बाद न करें और तुरंत अस्पताल पहुंचें. बरसात में जमीन पर सोने से बचें, रात में बाहर निकलते समय टॉर्च का इस्तेमाल करें और सांप काटने वाली जगह पर किसी तरह की कटाई या घरेलू इलाज करने से बचें.

 

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