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झारखंड में नौकरी के लिए दौड़ लगा रहें अभ्यर्थियों की क्यों हो रही मौत?  क्या है वजह और कौन है जिम्मेदार

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
Published: September 2, 2024,
Updated: 4:08 PM

रांची(RANCHI): भारत में जनसंख्या विस्फोट की स्थिति है. इस स्थिति में सभी को सरकारी नौकरी नहीं दिया जा सकता, इसके बाबजूद हर युवा का सपना होता है कि सरकारी नौकरी प्राप्त कर ना केवल अपना भविष्य सँवारे बल्कि अपने माता पिता के अरमानों को पूरा करे. अपनी क्षमता के अनुरूप हर शिक्षित बेरोजगार युवक सरकारी नौकरी की तैयारी में लग जाता है. कोई अपनी विद्वता के आधार पर करता है तो कोई शारीरिक क्षमता के आधार पर. लेकिन कुछ ऐसे भी बदनसीब युवा होते हैं कि अपने सपना को साकार करने के क्रम में इस दुनियां को ही अलविदा कह देते हैं.

झारखंड में चल रहे उत्पाद सिपाही भर्ती की बहाली प्रक्रिया में अभियर्थियों की हो रही मौत को देख कर तो यही कहा जा सकता है. एक तरफ मौत का आंकड़ा बढ़ कर 12 पहुंच गया वहीं दूसरी तरफ इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई है. आरोप-प्रत्यारोप के बीच कोई भी मौत की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार कब तक अपनी जिम्मेदारी से बचते रहेंगे. आज नहीं तो कल जबाब तो उन्हें देना ही पड़ेगा.

झारखंड में उत्पाद सिपाही भर्ती के लिए दौड़ शुरू है. लेकिन इस दौड़ में अब तक 12 अभ्यर्थियों की मौत हो चुकी है तो वही 100 से अधिक अभ्यर्थी बीमार है और अस्पताल में भर्ती हैं. सबसे अधिक मौत का मामला पलामू से सामने आया है. अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर लगातार हो रहे अभ्यर्थियों की मौत के पीछे की वजह क्या है. जो अभ्यर्थी नौकरी का सपना लेकर आए थे उसमें से कुछ तो मौत के मुंह में समा गए और कुछ अस्पताल में जिंदगी के लिए मौत से जंग लड़ रहे हैं. इसे सिस्टम और सरकार की लापरवाही कहेंगे या युवाओं की बदनीसीबी......

वही इस मामले में एक तरफ पुलिस प्रशासन इसे अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर जांच करने की बात कह रही है तो वहीं दूसरी तरफ अभ्यर्थी और विपक्ष अधिकारियों और प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं. आईजी ऑपरेशन अमोल वी होममेकर ने कहा कि एक्साइज कांस्टेबल भर्ती के लिए 22 अगस्त से रांची, गिरिडीह, हजारीबाग, पलामू, पूर्वी सिहभूम, साहिबगंज जिला के सात केंद्रों पर अभ्यर्थियों का फिजिकल टेस्ट लिया जा  रहा था. टेस्ट के दौरान ही 12 अभ्यर्थियों की मौत हो गयी।  उन्होंने अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए आरोप पर सफाई देते हुए कहा कि सभी केंद्रों पर चिकित्सा दल, दबाए, एंबुलेंस, मोबाइल, शौचालय, पेयजल सहित तमाम व्यवस्थाएं की गई है. व्यवस्था में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है. तो वहीं दूसरी तरफ फिजिकल टेस्ट में शामिल हुए अभ्यर्थियों ने बताया है कि कई केंद्रों पर समुचित व्यवस्था नहीं है. ना तो अभ्यर्थियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था की गई है और ना ही मुकम्मल स्वास्थ्य सुविधा है. इसके साथ ही विपक्ष के नेता भी इस मामले को लेकर कई तरह के आरोप सरकार पर लगा रहे हैं. 

बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर सवाल उठाया और कहा कि सरकार अभ्यर्थियों को नौकरी के बदले मौत बांट रही है. उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों को तीन महीने पहले सूचित किया जाना चाहिए कि उन्हें कब दौड़ना है ताकि वह फिजिकल के लिए प्रैक्टिस कर सके.  लेकिन अभ्यर्थियों को 15 दिन पहले सूचित किया गया. उन्होंने कहा कि एक केंद्र में 6000 बच्चों को दौड़ाया जा रहा है. रात 12:00 से लाइन लगती है और उनका नंबर 12:00 बजे दिन में आता है. इसीलिए वे नींद पूरी नहीं कर पाते और इसी वजह से अभ्यर्थी सरकार की कुव्यवस्था के कारण मौत के मुंह में समा रहे हैं. 

अभ्यर्थियों के मौत की क्या है वजह 

वहीं सरकार में बैठे लोग इस मौत की वजह अप्राकृतिक घटना और गर्मी बता रहे हैं. लेकिन इस मौत की वजह और भी है. डॉक्टर को शक है कि क्षमता बढ़ाने वाले स्टेरॉयड जैसी दवा, इंजेक्शन या ड्रिंक का इस्तेमाल किया गया होगा. जिसका साइड इफेक्ट है, और इसी वजह से अभ्यर्थियों की मौत हुई है. अभी तक इस बात की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.ल,  ना ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अभी तक ऐसा कुछ सामने आया है.

अब सवाल उठता है कि अगर यह घटना अभ्यर्थियों के मेडिसिन लेने की वजह से हुई तो जब अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया गया तब उनकी फिजिकल स्क्रीनिंग कमेटी क्यों नहीं बनाई गई?

जब अभ्यर्थियों का डेथ हुआ तो फिर पोस्टमार्टम में देरी क्यों की गई?

क्या कोई मजबूरी है या फिर राजनीतिक लाभ लेने के लिए ऐसा किया गया. कहीं सरकार अपनी गलती अभ्यर्थियों के माथे तो नहीं मढ़ रही. इसी तरह के कई सवाल खड़े हो रहे हैं. 

विपक्ष ने सरकार पर खड़ा किया सवाल 

विपक्ष ने हेमंत सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि भीषण गर्मी और उबर खाबड़ ट्रेक के बीच युवाओं को दौड़ाया गया. आनन फ़ानन और इतनी कुव्यवस्था के बीच उत्पाद सिपाहियों की नियुक्ति में जल्दबाज़ी  क्यों  की गई.

5 साल के अंदर 5 लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा करने वाली सरकार इतनी जल्दबाज़ी में क्यों है?

क्या चुनाव आने वाला है इसलिए या कॉड ऑफ कंडक्ट लागू होने वाला है इसलिए 

एक दिन में में 6-6 हज़ार अभ्यर्थियों को इस गर्मी के बीच दौड़ाया जा रहा तो मौतें तो होंगी ही.

अब सरकार पर इस तरह के सवाल उठने लाज़मी भी हैं. क्योंकि देश और दुनिया में शायद ही कोई ऐसी नौकरी  होगी जिसे पाने के लिए इतनी ज्यादा संख्या में अभ्यर्थियों को अपनी जान देनी पड़ी हो.

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