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राज्यपाल ने 1932 खतियान संबंधी विधेयक को लौटाया, सरकार और राजभवन के बीच बढ़ी दूरी 

BY -
Shreya Gupta
Shreya Gupta
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 5:49:52 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : राज्यपाल ने 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति से संबंधित विधेयक को लौटा दिया है. इस विधेयक के वापस किए जाने के बाद पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर हमलावर है. यह विधेयक राज्यपाल ने ऐसे समय में लौटाया है जब मुख्यमंत्री सूबे में खतियानी जोहार यात्रा कर रहे हैं,आज यानि सोमवार भी मुख्यमंत्री सरायकेला खरसवा में खातियानी जोहार यात्रा कर रहे है. विधेयक वापस के बाद अब राजनीति तेज हो गई है.    

क्यों हुई विधेयक की वापसी

झारखंड के  राज्यपाल  रमेश बैस ने द्वारा झारखंड विधान सभा से पारित 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति संबंधी विधेयक को वापस लौटा दिया है. राज्यपाल ने ‘झारखंड स्थानीय व्यक्तियों की परिभाषा और परिणामी सामाजिक, सांस्कृतिक और अन्य लाभों को ऐसे स्थानीय व्यक्तियों तक विस्तारित करने के लिए विधेयक, 2022 की पुनर्समीक्षा हेतु राज्य सरकार को वापस करते हुए  कहा है कि राज्य सरकार इस विधेयक की वैधानिकता की समीक्षा करें कि यह संविधान के अनुरूप और माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों और  निदेशों के अनुरूप हो. इस अधिनयम के अनुसार, स्थानीय व्यक्ति का अर्थ झारखंड का डोमिसाइल होगा जो एक भारतीय नागरिक है और झारखंड की क्षेत्रीय और भौगोलिक सीमा के भीतर रहता है और उसका या उसके पूर्वज का नाम 1932 या उससे पहले के खतियान में दर्ज है. इसमें उल्लेख है कि इस अधिनियम के तहत पहचाने गए स्थानीय व्यक्ति ही राज्य के वर्ग-3 और 4 के विरुद्ध नियुक्ति के लिए पात्र होंगे.

नियोजन के मामले में सभी को समान अधिकार

राज्यपाल ने यह कहा कि इस विधेयक की समीक्षा के क्रम में स्पष्ट पाया गया है कि संविधान की धारा 16 में सभी नागरिकों को नियोजन के मामले में समान अधिकार प्राप्त है. संविधान की धारा- 16(3) के अनुसार मात्र संसद को यह शक्तियां प्रदत्त हैं कि वे विशेष प्रावधान के तहत धारा 35 (A) के अंतर्गत नियोजन के मामले में किसी भी प्रकार की शर्तें लगाने का अधिकार अधिरोपित कर सकते हैं. राज्य विधानमंडल को यह शक्ति प्राप्त नहीं है. राज्यपाल ने इसे लौटाते हुए यह भी कहा है कि इस प्रकार यह विधेयक संविधान के प्रावधान और उच्चतम न्यायालय के आदेश के विपरीत है. वे विधेयक की वैधानिकता की गंभीरतापूर्वक समीक्षा कर लें, विधेयक संविधान और उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुरूप हो.

एक बार फिर बढ़ा सियासी पारा

इधर इस विधेयक के राज्यपाल द्वारा लौटाए जाने के बाद काफी दिनों से सुस्त पड़े झारखंड का सियासी पारा  एक बार फिर काफी बढ़ गया है. सत्तारूढ़ कांग्रेस ने विधेयक लौटाए जाने का ठीकरा बीजेपी पर फोड़ते हुए  राज्यपाल को कटघरे में खड़ा किया है. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी के लिए राज्यपाल बैकडोर से कार्य कर रहे हैं. इधर विपक्षी दल बीजेपी ने राज्यपाल के इस कदम को संविधान के तहत उठाया गया कदम बताया है. झामुमो ने कहा कि भाजपा देश में हावी हो गई है. वह नहीं चाहती की झारखंड सरकार कोई काम कर सके.  

सरकार और राजभवन के बीच बढ़ी दूरी  

1932 के खतियान आधारित इस विधेयक को हेमंत सरकार मास्टर स्टॉक मान रही थी. यह विधेयक ऐसे समय में लौटाया गया है. जब मुख्यमंत्री सूबे के जिलों में जाकर खतियानी जोहार यात्रा कर रहे हैं. ऐसे में झारखंड का सियासी पारा तो बढ़ा ही है सरकार और राजभवन के बीच दूरी भी एक बार फिर से बढ़ती दिख रही है.

रिपोर्ट : समीर हुसैन, रांची

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