☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • News Update
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. Jharkhand

महिला आयोग में अध्यक्ष की कुर्सी वर्षों से खाली,कौन सुनेगा महिलाओं का दर्द

महिला आयोग में अध्यक्ष की कुर्सी वर्षों से खाली,कौन सुनेगा महिलाओं का दर्द

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):राज्य में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार की घटनाएं लगातार सामने आती हैं. कहीं डायन-बिसाही के नाम पर महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है, तो कहीं राह चलते छेड़खानी और बदसलूकी का शिकार होना पड़ता है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि महिलाएं अपने ही घरों में सुरक्षित नहीं हैं। कई मामलों में पति द्वारा मारपीट, ससुराल पक्ष की प्रताड़ना, दहेज की मांग और मानसिक उत्पीड़न जैसी घटनाएं सामने आती हैं. ऐसे में जब महिलाएं न्याय की उम्मीद लेकर शिकायत दर्ज कराने के लिए संबंधित संस्थाओं के पास पहुंचती हैं, तो उन्हें वहां भी निराशा ही हाथ लगती है.

राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए झारखंड राज्य महिला आयोगआज खुद निष्क्रिय अवस्था में है. लंबे समय से आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई है. बाता दें कि 2020 में तत्कालीन अध्यक्ष कल्याणी शरण का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से अब तक नए अध्यक्ष की नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी.

अध्यक्ष और सदस्यों के अभाव में आयोग न तो स्वतः संज्ञान ले पा रहा है और न ही महिलाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई कर पा रहा है. राज्य में महिला अपराध के बढ़ते मामलों के बीच आयोग की यह स्थिति और भी गंभीर चिंता का विषय बन गई है. जिन महिलाओं को यहां न्याय और संरक्षण मिलने की उम्मीद होती थी, वे अब मायूस होकर लौटने को मजबूर हैं.

स्थिति यह है कि पहले जहां आयोग में 15 से 20 कर्मचारी कार्यरत थे, वहीं अब केवल तीन कर्मियों के सहारे कार्यालय किसी तरह चल रहा है. एक सफाई कर्मी, एक कंप्यूटर ऑपरेटर और एक सुरक्षाकर्मी सीमित संसाधनों में व्यवस्था संभाल रहे हैं.  प्रशासनिक स्तर पर एक अवर सचिव प्रतिनियुक्ति पर काम देख रहे हैं, लेकिन उनके पास नीतिगत फैसले लेने या शिकायतों पर ठोस कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है.

लंबे समय से पद रिक्त होने के कारण महिलाओं का विश्वास भी डगमगाने लगा है. कई महिलाएं समस्या लेकर कार्यालय पहुंचती हैं, लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि सुनवाई करने वाला कोई पदाधिकारी ही मौजूद नहीं है, तो वे निराश होकर वापस लौट जाती हैं। धीरे-धीरे कार्यालय में आने वाली शिकायतों की संख्या में भी कमी आई है.

रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2024 तक महिलाओं से जुड़े पांच हजार से अधिक मामले लंबित हैं. इन मामलों में घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना, संपत्ति विवाद, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं. आयोग की निष्क्रियता के कारण इन मामलों का निपटारा नहीं हो पा रहा है। पीड़ित महिलाओं को या तो न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है या फिर अदालत और पुलिस का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां प्रक्रिया अक्सर जटिल और समय लेने वाली होती है. कई बार कानूनी प्रक्रिया की लंबाई और सामाजिक दबाव के कारण महिलाएं शिकायत करना भी छोड़ देती हैं.

महिला आयोग जैसी संस्था का मूल उद्देश्य यही था कि महिलाएं बिना भय और दबाव के अपनी बात रख सकें. आयोग को पुलिस और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मामलों में हस्तक्षेप करने, जांच की निगरानी करने और पीड़िताओं को कानूनी सहायता प्रदान करने का अधिकार दिया गया था. लेकिन वर्तमान हालात में ये सभी अधिकार निष्क्रिय पड़े हैं. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में आयोग न तो विभागों को दिशा-निर्देश जारी कर पा रहा है और न ही लंबित मामलों की समीक्षा कर पा रहा है.

राज्य में महिला अपराध के बढ़ते आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि एक मजबूत और सक्रिय तंत्र की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है. यदि महिला आयोग जैसी संस्था ही प्रभावी रूप से काम न करे, तो महिला सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयास अधूरे रह जाएंगे.

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक यह स्थिति बनी रहेगी. क्या राज्य सरकार जल्द ही अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति कर आयोग को फिर से सक्रिय करेगी. जब तक यह कदम नहीं उठाया जाता, तब तक झारखंड की हजारों पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए लंबा इंतजार करना पड़ेगा.

Published at: 25 Feb 2026 01:01 PM (IST)
Tags:Women's CommissionWomen'sThe chair of the president has been vacant for years.jharkhandranchiWomen's Commission in ranchiwho will listen to the pain of women

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.