रांची(RANCHI): झारखंड में जनगणना 2027 को लेकर अब सरकार पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गई है. ऑनलाइन स्व-गणना में लोगों की बेहद कम भागीदारी के बाद अब राज्यभर में “घर-घर जनगणना अभियान” की शुरुआत कर दी गई है. शनिवार 16 मई से शुरू हुए इस बड़े अभियान के तहत सरकारी प्रगणक अब खुद लोगों के घरों तक पहुंचकर जानकारी जुटाएंगे. यह अभियान 14 जून तक युद्धस्तर पर चलाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी परिवार और व्यक्ति जनगणना से छूटने न पाए.
दरअसल, 1 मई से 15 मई तक स्व-गणना का पहला चरण चलाया गया था, जिसमें लोगों को ऑनलाइन माध्यम से खुद अपनी जानकारी दर्ज करनी थी. पूरे राज्य से सिर्फ 1,69,184 लोगों ने ही ऑनलाइन फॉर्म भरा. इसके बाद प्रशासन ने अब पूरी प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर तेज करने का फैसला लिया है.
पहले चरण में मकानों की सूची तैयार करने और हाउस लिस्टिंग का काम किया जाएगा. इसके बाद फरवरी 2027 में दूसरे और अंतिम चरण के दौरान वास्तविक जनसंख्या की गणना होगी. इस विशाल कार्य को सफल बनाने के लिए सरकार ने करीब 75 हजार कर्मचारियों को मैदान में उतारा है. इन कर्मचारियों को काम के आधार पर कुल 25 हजार रुपये मानदेय दिया जाएगा. हाउस लिस्टिंग के लिए 9 हजार रुपये और अंतिम जनगणना कार्य के लिए 16 हजार रुपये निर्धारित किए गए हैं.
काम की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रत्येक प्रगणक को अधिकतम 200 घरों की जिम्मेदारी दी गई है. वहीं शिक्षकों की ड्यूटी लगने के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि शिक्षक सुबह 10 बजे के बाद ही स्कूल से जनगणना कार्य के लिए निकलेंगे.
ऑनलाइन स्व-गणना के आंकड़ों में राजधानी रांची सबसे आगे रहा, जहां 46,629 लोगों ने डिजिटल रजिस्ट्रेशन कराया. वहीं पूर्वी सिंहभूम दूसरे स्थान पर रहा. सबसे कम भागीदारी पाकुड़ जिले में दर्ज की गई, जहां सिर्फ 2,410 लोगों ने ऑनलाइन गणना कराई.
गौरतलब है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की आबादी 3.29 करोड़ थी. लेकिन अब विशेषज्ञों और सरकारी अनुमानों के मुताबिक राज्य की जनसंख्या 4.12 से 4.15 करोड़ के बीच पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. अब 2027 की जनगणना के अंतिम आंकड़े ही बताएंगे कि बीते वर्षों में झारखंड की आबादी और विकास की रफ्तार कितनी बदली है.