✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • Health Post
  • Foodly Post
  • TNP Special Stories
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Know Your MLA
  • Art & Culture
  • Tour & Travel
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • News Update
  • Education & Job
  • Special Story
  • Religion
  • Top News
  • Latest News
  • YouTube
☰
  1. Home
  2. /
  3. Trending

सियासी सफर: जेपी आंदोलन से बिहार की सत्ता तक: कैसे बने ‘सुशासन बाबू’ और क्यों घिर गए सियासी चक्रव्यूह में नीतीश कुमार

BY - Rajesh Tomar

Published at: 05 Mar 2026 05:38 PM (IST)

सियासी सफर: जेपी आंदोलन से बिहार की सत्ता तक: कैसे बने ‘सुशासन बाबू’ और क्यों घिर गए सियासी चक्रव्यूह में नीतीश कुमार

TNP DESK- भारतीय राजनीति में कुछ नेता समय के साथ चलते हैं, और कुछ ऐसे होते हैं जो समय की दिशा ही बदल देते हैं. बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने न सिर्फ राजनीति की चालें समझीं, बल्कि सामाजिक समीकरणों को भी अपने हिसाब से साधा.
एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर से लेकर देश के सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले मुख्यमंत्रियों में शामिल होने तक का उनका सफर उतार-चढ़ाव, उपलब्धियों और सियासी प्रयोगों से भरा रहा है.

आज जब बिहार की राजनीति में यह चर्चा तेज है कि आने वाले समय में उन्हें राज्यसभा या केंद्र की राजनीति में भेजा जा सकता है और भाजपा राज्य में अपना मुख्यमंत्री बना सकती है, तब यह सवाल फिर उठ रहा है कि जेपी आंदोलन के इस सिपाही का सफर आखिर इस मोड़ तक कैसे पहुँचा.

*जेपी आंदोलन से राजनीति की शुरुआत*

1970 के दशक में जब देश में सत्ता के खिलाफ असंतोष उभर रहा था, तब Jayaprakash Narayan के नेतृत्व में शुरू हुए आंदोलन ने बिहार की राजनीति को कई बड़े चेहरे दिए. इसी आंदोलन से Lalu Prasad Yadav, Ram Vilas Paswan और Nitish Kumar जैसे नेता उभरे.

पटना इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र रहे नीतीश कुमार के सामने एक सुरक्षित इंजीनियरिंग करियर था, लेकिन उन्होंने राजनीति का रास्ता चुना. आपातकाल के दौरान जेल जाने का अनुभव भी उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को मजबूत बनाने वाला साबित हुआ.

*दिल्ली की राजनीति और ‘काम करने वाले मंत्री’ की छवि*

बिहार में पूरी तरह सक्रिय होने से पहले उन्होंने केंद्र की राजनीति में लंबा समय बिताया. वे कई बार सांसद बने और Atal Bihari Vajpayee की सरकार में रेल, कृषि और भूतल परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले.

रेल मंत्री रहते हुए ग़ैसल ट्रेन दुर्घटना के बाद उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया. उस दौर में यह कदम भारतीय राजनीति में जवाबदेही का उदाहरण माना गया.

*लालू राज को चुनौती और सत्ता की राह*

1990 के दशक में बिहार की राजनीति पर Lalu Prasad Yadav का दबदबा था. उनके विरोधी इसे “जंगलराज” कहते थे.
नीतीश कुमार ने George Fernandes के साथ मिलकर समता पार्टी बनाई, जो आगे चलकर जनता दल (यूनाइटेड) बनी.

उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन कर ‘लव-कुश’ (कुर्मी-कोयरी) और अति-पिछड़ा समीकरण के सहारे लालू के MY (मुस्लिम-यादव) समीकरण को चुनौती दी.
आखिरकार 2005 में उन्होंने लालू-राबड़ी शासन को हटाकर बिहार की सत्ता हासिल कर ली.

*सुशासन बाबू और विकास का दौर*

2005 से 2010 तक का समय नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन का स्वर्णिम काल माना जाता है.
इस दौरान बिहार में सड़क निर्माण, कानून व्यवस्था, शिक्षा और महिलाओं की भागीदारी जैसे क्षेत्रों में बड़े बदलाव हुए.

‘बालिका साइकिल योजना’ ने लड़कियों की शिक्षा में नई क्रांति ला दी. अपराध में कमी आई और राज्य में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हुआ. इसी दौर में उन्हें “सुशासन बाबू” कहा जाने लगा.

*शराबबंदी: सामाजिक प्रयोग और राजनीतिक जोखिम*

2016 में नीतीश ने बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की. यह निर्णय महिलाओं के लंबे आंदोलन और सामाजिक दबाव के बाद लिया गया था.

*शराबबंदी के प्रभाव:*

ग्रामीण इलाकों में घरेलू हिंसा के मामलों में कमी आने की बात कई सर्वे में सामने आई.
महिलाओं के बीच नीतीश कुमार की लोकप्रियता बढ़ी.
लेकिन दूसरी तरफ शराब की तस्करी और अवैध कारोबार भी बढ़ा.
हजारों लोग शराबबंदी कानून के तहत जेल गए, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ा.

इसके बावजूद शराबबंदी आज भी उनकी सबसे बड़ी सामाजिक मुहिम मानी जाती है और महिला वोटरों के बीच उनका मजबूत आधार बनी हुई है.

*सियासी पलटियाँ और विश्वसनीयता का संकट*

नीतीश कुमार की राजनीति का सबसे विवादित पहलू उनकी बार-बार बदलती राजनीतिक साझेदारियाँ रही हैं.

2013 -  भाजपा से अलगाव
2015 -  लालू प्रसाद के साथ महागठबंधन
2017- फिर भाजपा के साथ
2022- दोबारा महागठबंधन
2024-  फिर एनडीए में वापसी

इन बदलावों ने उनकी छवि को प्रभावित किया और विरोधियों ने उन्हें “पलटी राम” कहना शुरू कर दिया.

*वर्तमान राजनीति: क्या बदल रहा है समीकरण?*

2024 के बाद राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. भाजपा बिहार में अपनी ताकत बढ़ा चुकी है और अब राज्य में खुद का नेतृत्व स्थापित करने की चर्चा तेज है.

*राजनीतिक जानकारों के मुताबिक संभावित स्थितियाँ यह हो सकती हैं:*

नीतीश कुमार को केंद्र की राजनीति में भेजा जाए.
भाजपा बिहार में अपना मुख्यमंत्री बनाए.
जदयू का भविष्य नए नेतृत्व या विलय के रास्ते तय हो.

हालांकि बिहार की राजनीति में समीकरण अक्सर अचानक बदल जाते हैं, इसलिए अंतिम फैसला अभी दूर दिखता है.


*उपलब्धियों और विवादों से भरी विरासत*

नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर ( political Journey) भारतीय राजनीति की सबसे दिलचस्प कहानियों में से एक है.
जेपी आंदोलन से लेकर दिल्ली की सत्ता तक, और फिर बिहार को नई दिशा देने तक, उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले लिए.

इतिहास शायद उन्हें उनकी सियासी पलटियों के लिए भी याद रखेगा, लेकिन इससे ज्यादा उन्हें उस नेता के रूप में याद किया जाएगा जिसने बिहार को सड़क, बिजली, कानून व्यवस्था और सामाजिक बदलाव की नई दिशा दी.

आज जब उनकी राजनीति अपने अंतिम दौर में दिखाई देती है, तब भी यह सच है कि पिछले दो दशकों में बिहार की राजनीति की धुरी नीतीश कुमार ही रहे हैं. ये

Tags:Bihar newsBihar politicsPolitical newsNitish KumarBihar cmPoliticalJP movement

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.