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झारखंड की लाइफ लाइन हॉस्पीटल रिम्स में बदइंतजामी जारी! स्वास्थ्य मंत्री के छूट रहे पसीने, नहीं दिख रहा कोई निदान

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 4:18:00 PM

रांची (RANCHI) : झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल रिम्स (RIMS) एक बार फिर बदइंतजामी और अव्यवस्था को लेकर सुर्खियों में है. राज्य का यह “लाइफ लाइन” अस्पताल अब खुद ही बीमार नजर आ रहा है. मरीजों की बढ़ती भीड़, सफाई व्यवस्था की खामियां, दवा की कमी और डॉक्टरों की लापरवाही ने स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है.

अस्पताल के वार्डों में गंदगी का आलम है. कई मरीजों को बिस्तर नहीं मिल रहे हैं, तो कहीं वार्डों में पंखे और लाइटें तक खराब पड़ी हैं. दवा काउंटरों पर लंबी कतारें लगी रहती हैं और जांच रिपोर्ट आने में घंटों लग जाते हैं. मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन लापरवाह हो गया है. न तो समय पर इलाज मिल पाता है, न जरूरी दवाएं. ज़्यादातर दवाएं और सेलाइन (एनएस) जैसी बुनियादी चीजें भी बाहर से खरीदनी पड़ती हैं, जिससे गरीब मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

शनिवार को स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने बुंडू में सड़क हादसे के घायलों से मिलने के बाद रिम्स का औचक निरीक्षण किया. जैसे ही मंत्री ट्रॉमा सेंटर पहुंचे, वहां का हाल देखकर उनके होश उड़ गए. कई वार्डों में मरीजों के परिजन खुद स्ट्रेचर और ट्रॉली धकेलते नजर आए. इस पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा, “ये क्या व्यवस्था है? मरीज के परिजन ट्रॉली धकेलेंगे और कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे रहेंगे?”

निरीक्षण के दौरान एक मरीज को ह्वीलचेयर पर लाने वाला कोई कर्मचारी नहीं मिला. मंत्री ने खुद आगे बढ़कर मरीज की ह्वीलचेयर धकेली और कहा कि यह स्थिति बेहद शर्मनाक है. उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों को फटकार लगाई और व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया. लेकिन जैसे ही मंत्री रिम्स से निकले, हालात फिर वैसे ही हो गए, न कर्मचारी दिखे, न सफाई.

निरीक्षण के दौरान मरीजों के परिजनों ने मंत्री को घेर लिया और अपनी पीड़ा साझा की. एक महिला ने कहा, “सर, यहां दवाएं नहीं मिलतीं, हमें एनएस, आरएल से लेकर मामूली गोली तक बाहर से खरीदनी पड़ती है.” इस पर मंत्री ने रिम्स निदेशक से पूछा, “क्या ये सच है? अस्पताल में दवा क्यों नहीं है?” निदेशक ने सफाई दी कि दवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन मंत्री ने सख्त लहजे में कहा, “अगर दवा है, तो फिर मरीज क्यों खरीद रहे हैं? कहीं न कहीं चोरी हो रही है!”

मंत्री ने ट्रॉमा सेंटर से लेकर ब्लड बैंक तक की व्यवस्था की हकीकत देखी और कहा कि बार-बार निरीक्षण और कोर्ट की फटकार के बावजूद रिम्स की हालत जस की तस बनी हुई है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सुधार नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

रिम्स को राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कहा जाता है, लेकिन जिस तरह यहां मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है. अस्पताल प्रशासन सुधार के दावे तो कर रहा है, मगर जमीन पर कोई बदलाव नहीं दिखता. मंत्री की नाराजगी और निरीक्षण के बावजूद रिम्स की स्थिति “जैसी थी, वैसी ही” बनी हुई है.

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