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जानिए देवघर विधानसभा क्षेत्र को, क्या है जातीय समीकरण और किसके किसके बीच हो सकता है मुकाबला

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 10:05:47 PM

देवघर(DEOGARH:) झारखंड का देवघर जिला अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है. देश के पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा बैद्यनाथ कामना लिंग के रूप में यहां विराजमान हैं. प्रत्येक वर्ष श्रावण मास में यहां बड़ा मेला लगता है. विश्व प्रसिद्ध राजकीय मासव्यापी इस मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु सुल्तानगंज से कांवर में गंगाजल भर कर नंगे पांव 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर पहुंचते हैं और पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंग का जलार्पण करते हैं. इस वर्ष श्रावणी मेला में लगभग 50 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण किया. कहने के लिए यह एक बड़ा धार्मिक आयोजन है. लेकिन इस मेले को देवघर जिला ही नहीं बल्कि पूरे संताल परगना की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. एक माह चलने वाले इस मेले में अरबों का कारोबार होता है. दूसरी जगहों से भी सावन में यहां लोग रोजी-रोजगार के लिए पहुंचते हैं. इसी विशेषता के कारण देवघर को झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी भी कहा जाता है.

हर चुनाव में पेयजल की समस्या बनी चुनावी चर्चा का मुद्दा

आध्यात्मिक नगरी के साथ देवघर अपने कई रमणीक पर्यटन स्थल के लिए भी जाना जाता है. त्रिकुट पहाड़, तपोवन, नौलखा मंदिर, सत्संग आश्रम, रिखिया आश्रम जैसे अनेकों जगह है जहां सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. देवघर बिहार के नक्सल प्रभावित जमुई और बांका जिला से लगती है. देवघर जिले में लोगों की आजीविका का मुख्य आधार कृषि है. लेकिन सिंचाई सुविधा का अभाव किसानों के लिए बड़ी समस्या रही है. देवघर जिले में पेयजल की समस्या सबसे बड़ी समस्या रही है. हर चुनाव में लोगों की यह परेशानी चुनावी चर्चा का मुद्दा बनती रही है. हालांकि, जहां तक देवघर शहरी क्षेत्र में पेयजल की समस्या का सवाल है उसके लिए पुनासी जलाशय योजना से इसे दूर करने का प्रयास अब अंतिम चरण में है.

जस की तस है रोजगार की समस्या

लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इसके नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती रही है. इस बार भी पेयजल की समस्या ही चुनाव का बड़ा मुद्दा बनने की उम्मीद है. इसके अलावा किसानों की समस्या, बेरोजगारी और पलायन इस जिले की मुख्य समस्या रही है. कुछ छोटे, लघु और कुटीर उद्योग भी कार्यरत हैं, जो लोगों के स्वरोजगार का जरिया है. पिछले 5 वर्षों में देवघर का भले ही तेज़ी से विकास हुआ हो, लेकिन रोजगार की समस्या जस की तस है. एयरपोर्ट, ऐम्स(AIIMS), प्लास्टिक पार्क, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क, फ़ूड क्राफ्ट इंस्टिट्यूट इत्यादि के स्थापित होने से निकट भविष्य में रोजगार के सुनहरे अवसर अवश्य प्राप्त होंगे. लेकिन अभी दिल्ली दूर जैसी कहावत चरितार्थ हो रही है.

देवघर विधानसभा की स्थिति, मतदाता और जातीय समीकरण

देवघर विधानसभा जिसका निर्वाचन क्षेत्र संख्या 15 है. यह अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. इस क्षेत्र में जसीडीह, नगर निगम, मोहनपुर का पूरा क्षेत्र और देवीपुर के कुछ पंचायत आते हैं. मतदाताओं की बात करें तो कुल मतदाता 4,36,621 हैं. जिनमे पुरुष मतदाता 2,26,161 व महिला मतदाता 2,10,448 हैं. जबकि 12 थर्ड जेंडर मतदाता हैं. वहीं, 347 भवन में कुल मतदान केंद्र 460 है. अब जातीय समीकरण की तरफ देखें तो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इस विधानसभा में करीब 88 हज़ार हरिजन, 82 हज़ार यादव, 45 हज़ार मुस्लिम और 40 हज़ार आदिवासी के अलावा अन्य में ब्राहृम्ण, भूमिहार, राजपूत, कायस्थ, वैश्य इत्यादी मतदाता है.

पिछले दो बार से भाजपा के नारायण दास इस क्षेत्र के विधायक है

देवघर विधानसभा क्षेत्र से 2014 से लगातार भाजपा के नारायण दास विधायक के रूप में चुने जा रहे हैं. 2014 के जनादेश के अनुसार देवघर विधानसभा (अनुसूचित जाति सुरक्षित) सीट से भारतीय जनता पार्टी के नारायण दास विजयी रहे थे. इन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के सिटिंग विधायक और तत्कालीन सरकार में मंत्री सुरेश पासवान को 45 हज़ार 152 वोट से पराजित किया था. नारायण दास को 92 हज़ार 22 मत मिले थे. जबकि सुरेश पासवान 46 हज़ार 870 मत ही ला सके थे. जेएमएम की निर्मला भारती 23 हज़ार 447 मत हासिल कर तीसरे स्थान पर रही थी. तब देवघर विधानसभा क्षेत्र में 423 मतदान केंद्र थे. उस समय कुल मतदाताओं की संख्या 3 लाख 35 हज़ार 692 थी. इनमें से 2 लाख 17 हज़ार 504 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया.

इसके बाद 2019 के आम चुनाव में भाजपा के नारायण दास लगातार दूसरी बार राजद के सुरेश पासवान को पटकनी देते हुए विधायक बने. नारायण दास 2,624 मत के अंतर से हराकर विधानसभा पहुंचे. नारायण को 95 हज़ार 491 मत मिले थे जबकि सुरेश पासवान को 92 हज़ार 867 मत ही मिल पाए.

इस बार भी नारायण और सुरेश के बीच टक्कर होने की प्रबल संभावना

झारखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है. दो चरणों में होने वाले चुनाव में देवघर में दूसरे और अंतिम चरण में चुनाव होना है. यानी 20 नवंबर को मतदान होगा. सभी संभावित राजनीतिक दलों ने अपना-अपना उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारने का फैसला भी कर लिया है. सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है. देवघर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व की तरह इस बार भी सिटिंग विधायक भाजपा के नारायण दास और राजद के टिकट पर सुरेश पासवान के ही चुनावी मैदान में आपस में दो-दो हाथ करने की प्रबल संभावना है. आज कल में इसका निर्णय भी हो जाएगा. इससे पहले ही दोनों मुख्य उम्मीदवार ने क्षेत्र की बागडोर संभाल ली है और दोनों द्वारा लगातार विधानसभा क्षेत्र का भ्रमण भी किया जा रहा है.

प्रबल दावेदारों का परिचय

वर्तमान विधायक नारायण दास 2014 से अभी तक भाजपा के विधायक हैं. 2019 के बाद इनको जिलाध्यक्ष भी बनाया गया. इनके ही जिलाध्यक्ष बनने के बाद ऐम्स (AIIMS) और एयरपोर्ट का उदघाटन पीएम ने किया. इसके बाद जिलाध्यक्ष बनने के बाद कई केंद्रीय नेताओं का आगमन देवघर में हुआ. इसी वर्ष जिलाध्यक्ष के पद से हटे हैं. पार्टी आलाकमान ने पूरा भरोसा दिलाया है कि इस बार भी टिकट इन्हीं को मिलने जा रहा है.

वहीं, राजद के टिकट पर चुनाव लड़ने की पूरी संभावना सुरेश पासवान की है. सुरेश पासवान 1985 और 1990 में सीपीआई के टीकट पर चुनाव लड़े और हार गए थे. 1995 में इन्होंने जनता दल का दामन थामा और पहली बार देवघर के विधायक बने. फिर इन्होंने 2000 में राजद के टिकट से चुनाव जीता लेकिन राजद के ही टीकट पर 2005 में जदयू के कामेश्वर नाथ दास से लगभग 10 हजार वोट से हार गए. पुनः 2009 में राजद से टीकट से चुनाव जीता और जेवीएम उम्मीदवार बालदेव दास को 17 हजार से ज्यादा मतो से हराया और हेमंत सरकार में पर्यटन एवं नगर विकास मंत्री बनाए गए. 2014 में मंत्री रहते वे चुनाव हार गए. इन्हें भाजपा के टीकट से पहली बार चुनाव लड़े नारायण दास ने हराया. इसके बाद 2019 में भी नारायण दास से लगातार दूसरी बार हारे. ऐसे में एक बार फिर 2024 के चुनाव में महागठबंधन के उम्मीदवार राजद से सुरेश पासवान और भाजपा से नारायण दास में सीधी टक्कर होने की प्रबल संभावना है.

रिपोर्ट-ऋतुराज 

 

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