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जरमुंडी विधानसभा सीट: पूर्व मंत्री बादल के टिकट पर लग सकता है ग्रहण, प्रियंका गांधी के कहने के बावजूद भी लोकसभा चुनाव में नहीं दिला सके थे बढ़त

BY -
Shivani CE
Shivani CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 12, 2026, 8:56:52 AM

देवघर(DEOGARH): झारखंड गठन के बाद से संताल परगना क्षेत्र हमेशा से झारखंड की राजनीति में अहम भूमिका निभाती आ रही है. चाहे मुख्यमंत्री बनना हो चाहे मंत्री शुरू से ही इस प्रमंडल का दबदबा रहा है. इस प्रमंडल में 6 जिला आते हैं और सभी जिला अंतर्गत कुल 18 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. प्रमंडल का मुख्यालय और राज्य की उपराजधानी दुमका जिला है. जिसने राज्य को दो-दो सीएम दिया है और दर्ज़नों मंत्री. इन्ही में से एक विधानसभा क्षेत्र है जरमुंडी. इस विधानसभा से भी कई मंत्री बने हैं. हरिनारायण राय के बाद बादल पत्रलेख. झामुमो पार्टी में रहे हरिनारायण ने हाल ही में भाजपा का दामन थाम लिया है. वहीं, बादल अभी भी कॉंग्रेस के वर्तमान विधायक है. लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद ही इनको मंत्री पद गवाना पड़ा. बादल कृषि मंत्री थे.

बादल को टिकट मिलने पर लग सकता है ग्रहण

झारखंड में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया है. संताल परगना प्रमंडल अंतर्गत सभी 18 विधानसभा क्षेत्र का चुनाव दूसरे और अंतिम चरण यानी 20 नवंबर को होना है. सभी सीट से अपना-अपना उम्मीदवार उतारने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा कभी भी हो सकती है. बात अगर जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र की करें तो वर्तमान में यहां के विधायक बादल पत्रलेख है, जो की कॉंग्रेस के टिकट से दूसरी बार विधायक बने है. इस बार हेमंत सरकार में कृषि मंत्री भी बने थे. लेकिन लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद ही इन्हें अपने मंत्री पद की कुर्सी छोड़नी पड़ी थी.

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा चुनाव में लगातार दो बार से अपने क्षेत्र से पार्टी या गठबंधन उम्मीदवार को बढ़त नहीं दिलाना माना जा रहा है. 2019 से परे 2024 का लोकसभा चुनाव गठबंधन के लिए अहम था. खासकर गठबंधन दल गोड्डा लोकसभा सीट हर हाल में जितना चाहती थी. लेकिन ऐसा नही हुआ. गोड्डा लोकसभा से लगातार चौथी बार सांसद चुन कर संसद पहुंचे भाजपा के निशिकांत दुबे हमेशा से हेमंत सरकार पर निशाना साधते रहे हैं. जिसका परिणाम भी झारखंड वासियों ने देखा है.

हेमंत सोरेन को लोकसभा चुनाव के वक़्त एक मामले में ईडी ने जेल में भी डाल दिया था. दूसरी ओर चुनाव प्रचार के दौरान गोड्डा के गांधी मैदान में पार्टी प्रत्याशी प्रदीप यादव के पक्ष में कॉंग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी सभा को संबोधित करने गोड्डा आई थी. सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी ने महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह और जरमुंडी विधायक और तत्कालीन कृषि मंत्री बादल पत्रलेख को हर हाल में अपने अपने विधानसभा क्षेत्र से बड़ी बढ़त दिलाने का कार्य सौंपा था. इसमें दीपिका पांडेय सिंह ने तो अपने क्षेत्र से मामूली बढ़त दिला दी थी. लेकिन जरमुंडी से लगातार दो बार से जितने वाले बादल पत्रलेख 2019 की तरह इस बार भी बुरी तरह से पिछड़ गए.

नए सरकार से बादल का हो गया पत्ता साफ

सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी ने खुद बादल पत्रलेख को अपने क्षेत्र से 50 हज़ार से बढ़त दिलाने की बात कही. सूत्र बताते हैं कि उस समय यह बात मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ नेताओं ने भी सुनी थी. लेकिन जब चुनाव परिणाम आया तो बादल के विधानसभा क्षेत्र जरमुंडी से लगभग 47 हज़ार से पिछड़ कर बहुत बड़ी बढ़त भाजपा को मिली. इससे नाराज आलाकमान जब जेल से छूटने के बाद हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बने तब नए सरकार से बादल का पत्ता साफ हो गया और इनकी जगह महगामा विधायक दीपिका को मंत्री बनाया गया.

दूसरी ओर क्षेत्र में भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब विधायक बादल नहीं बना था तो यहां से किसी न किसी तरह से इनके द्वारा बढ़त हासिल की गई थी. लेकिन विधायक और मंत्री बनने के बाद ऐसा नहीं होने से क्षेत्र की जनता दबे जुबान बादल का जनाधार घटने की चर्चा जोरों से कर रहे हैं. प्रियंका गांधी और पार्टी आलाकमान की बात नहीं मानना और क्षेत्र में घटते जनाधार को लेकर जरमुंडी विधानसभा क्षेत्र से बादल पत्रलेख का टिकट कटने की चर्चा न सिर्फ क्षेत्र में बल्कि पार्टी नेताओं के बीच भी हो रही है. खैर अब देखना होगा कि इस विषय पर पार्टी आलाकमान क्या निर्णय लेती है.

रिपोर्ट: ऋतुराज/देवघर

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