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जमशेदपुर के पास छिपा है रामायण काल का रहस्य, राजाबासा गांव में आज भी जिंदा है लक्ष्मण रेखा की मान्यता

BY -
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Rohit Kumar Sr. Correspondent
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 3, 2026, 5:17:50 PM

जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): पूर्वी सिंहभूम जिले में  पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच छिपा एक ऐसा गांव है, जहां रामायण काल की कहानी जिंदा होने का दावा किया जाता है. यह गांव है राजभाषा जो जमशेदपुर से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित है. यह गांव डुमरिया प्रखंड में स्थित है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण यहां कुछ समय के लिए ठहरे थे. यही वजह है कि यह गांव अब आस्था, रहस्य और इतिहास का केंद्र बन चुका है. राजबासा गांव चारों ओर से पहाड़ियों से घिरा हुआ है. गांव के पास एक सुंदर झरना है, जिसे लोग राम-लक्ष्मण पंजा झरना के नाम से जानते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वनवास के समय भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण इसी रास्ते से गुजरते हुए यहां पहुंचे थे. कुछ दिन विश्राम करने के बाद वे आगे बढ़े, लेकिन उनके ठहरने की निशानियां आज भी यहां मौजूद हैं.

लक्ष्मण रेखा को लेकर होती है चर्चा
सबसे ज्यादा चर्चा यहां मौजूद “लक्ष्मण रेखा” को लेकर होती है. गांव वालों के अनुसार झरने के पास एक बड़ी चट्टान पर माता सीता बैठी थीं. उनकी सुरक्षा के लिए लक्ष्मण ने पत्थर पर एक रेखा खींच दी थी. यही रेखा आज भी चट्टान पर साफ दिखाई देती है और लोग इसे श्रद्धा के साथ देखते हैं. इस रेखा को लेकर सबसे रोचक मान्यता यह है कि कोई पुरुष अकेले इसे पार नहीं कर सकता. ग्रामीणों का दावा है कि जिसने भी इसे लांघने की कोशिश की, वह फिसलकर नीचे झरने की ओर गिर पड़ा. इसलिए आज भी पुरुष अकेले इस रेखा को पार करने से बचते हैं. कई लोग इसे चमत्कार मानते हैं, तो कुछ इसे आस्था से जुड़ी परंपरा बताते हैं. झरने से करीब एक किलोमीटर नीचे एक और स्थान है, जिसे “सीता झरना” कहा जाता है. मान्यता है कि माता सीता यहां स्नान करने आती थीं. चारों तरफ हरियाली, चट्टानें और बहता पानी इस जगह को बेहद आकर्षक बनाते हैं. 

स्थान आज भी देख रहा विकास की राह
इतनी मान्यता और प्राकृतिक सुंदरता होने के बावजूद यह स्थान आज भी विकास की राह देख रहा है. गांव वालों का कहना है कि यहां पहुंचने के लिए रास्ता कठिन है और पर्यटन सुविधाओं का अभाव है. यदि सड़क, सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यह जगह झारखंड का बड़ा धार्मिक पर्यटन स्थल बन सकती है. कुछ लोग इसे इतिहास मानते हैं, कुछ लोककथा, लेकिन राजबासा गांव का यह रहस्य आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है. पूर्वी सिंहभूम की पहाड़ियों में बसी यह कहानी आस्था और रोमांच दोनों का अनोखा संगम है. गांव के ग्राम प्रधान कान्हुराम टुडू ने बताया कि राम-लक्ष्मण पंजा झरना और सीता झरना घने जंगल में हैं. ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के बावजूद सरकार इन स्थलों को विकसित करने के लिए कदम नहीं उठा रही है.

गांव के राजा से मिलने गए थे भगवान राम
ग्राम प्रधान ने बताया कि वनवास काल में भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण राजाबासा गांव के राजा से मिलने यहां पहुंचे थे. उस समय पहाड़ पर स्थित एक खास पत्थर पर माता सीता विराजमान थीं. उनकी सुरक्षा के लिए लक्ष्मणजी ने वहां एक रेखा खींची थी, जिसे लोग आज भी लक्ष्मण रेखा के नाम से जानते है. इसके बाद लक्ष्मण भगवान राम के साथ राजाबासा के राजा से मिलने चले गए थे. ग्रामीणों का दावा है कि वह रेखा आज भी मौजूद है और कोई पुरुष अकेले उसे पार नहीं कर सकता. इस झरने तक पहुंचना काफी मुश्किल है. यह झरना भीषण गर्मी में भी नहीं सूखता है. 

 

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