रांची(RANCHI): हेमंत और कल्पना को एक दूजे के हुए आज 20 साल बीत गए. आज के दिन 07 फरवरी 2006 को कल्पना हेमंत की हुई थी. एक साधारण परिवार की बेटी कल्पना झारखंड के सबसे पवार फूल परिवार की बहु बनी. इन बीस साल में कल्पना ने बखूबी एक बहु का फर्ज निभाया. लेकिन जब परिवार के सामने संकट आया तो वह ढाल बन कर खड़ी हो गई. इस खबर में पवरफुल तस्वीर की बात करेंगे.
सबसे पहली तस्वीर 2019 के विधानसभा चुनाव की है. हेमंत सोरेन ने कल्पना सोरेन मतदान करने पहुंची है. जिसमें दोनों के चेहरे पर मुस्कान है. इस समय कल्पना का राजनीति से कोई नाता नहीं था. भले ही वह झारखंड के कद्दावर राजनीति परिवार की बहु थी. इस तस्वीर में हेमंत के साथ कल्पना वोट देने के बाद विक्ट्री साइन दिखा रही थी.

दूसरी तस्वीर जब हेमंत मुख्यमंत्री बन गए और पार्टी सत्ता में आ गई. हेमंत-कल्पना अपने घर पर समय बीता रहे थे. अपने पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन और बच्चों के साथ बैठे दिखे.

इसके बाद एक समय आया जब सोरेन परिवार के सामने एक बड़ा संकट आया. कथित जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन की गिरफ़्तारी हो गई.इस समय अगर सबसे मजबूती से कोई खड़ा दिखा तो वह हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन थी. उन्होंने आँसू नहीं बहाया बल्कि हेमंत सोरेन को हिम्मत दी.

अब चुनाव की दहलीज पर झारखंड पहुंचा और लोकसभा चुनाव का ऐलान हुआ. झामुमो और हेमंत सोच रहे थे की आखिर कौन संभालेगा. तब फिर कल्पना मुर्मू सोरेन घर की दहलीज से बाहर निकली और झामुमो की कमान संभाल कर हेमंत के झोली में जीत डाल दिया.

लोकसभा चुनाव के बाद हेमंत सोरेन को कोर्ट से जमानत मिल गई. वह बाहर निकल गए. लेकिन अब विधानसभा चुनाव भी सामने था. लेकिन कल्पना ने हेमंत के साथ और अकेले प्रचार का जिम्मा उठाया. एक दिन में 10 10 रैली किया. जिसका नतीजा हुआ की इंडिया गठबंधन की प्रचंड जीत हुई. और जब कल्पना अपने क्षेत्र gandey विधानसभा से वापस रांची लौटी तो खुद जीत की बधाई देने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एयरपोर्ट पहुंचे और कल्पना का स्वागत किया.

इसके बाद से हर जगह कल्पना और हेमंत एक साथ दिखते है. और पूरे देश ने देखा की जब महिला घर की दलीज लांघ कर बाहर निकलती है तो कैसे पूरा परिणाम बदल देती है. एक महिला कभी हार नहीं मानती.
