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इस जंगल में मेटल डिटेक्टर भी नहीं करता काम!लेकिन जमीन के अंदर है बारूदी जाल,जानिए कैसे नक्सलियों से लोहा लेते हैं जवान

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 2, 2026, 1:29:12 PM

रांची(RANCHI): झारखंड के जंगल में खनिज की कमी नहीं है. लेकिन यही मिनिर्लस नक्सलियों के खिलाफ अभियान में सुरक्षा बल के जवानों के सामने एक बड़ी चुनौती के रूप में है. खास कर पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा जंगल में नक्सलियों का डेरा है. इसे जानते हुए भी जवान सीधे वार नहीं पाते है. उन्हे हर कदम संभल कर रखना पड़ता है. इस रिपोर्ट में जानेंगे की आखिर कैसे इस जंगल में जवानों का मेटल डिटेक्टर भी काम करना बंद कर देता है.और नक्सलियों के जाल में जवान फंस जाते है.

यह सबसे बड़ी चुनौती नक्सल अभियान में है. आय दिन खबर सामने आती है कि सारंडा में नक्सल अभियान के दौरान IED (Improvised explosive devices)  ब्लास्ट हुआ और जवान की शहादत या फिर घायल हुए. ऐसे में अभियान फिर धीमा हो जाता है और यही से नक्सलियों को भागने का रास्ता बड़े ही आसानी से मिलता है. जब सुरक्षा बल के जवान दोबारा अभियान शुरू करते है  तब तक नक्सली अपना ठिकाना बदल चुके होते है. माना जाता है कि अगर आईईडी जंगल में नहीं होता तो नक्सली कब का खत्म हो गए होते.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहां पर सामने आता है कि नक्सल अभियान में झारखंड जागुआर की बम निरोधक दस्ता भी साथ चलता है इसके बावजूद कैसे घटना होती है. आखिर वजह क्या है कि इतना हाई टेक होने के बाद भी ब्लास्ट हो जाता है और मेटल डिटेक्टर उस बम को डिटेक्ट क्यों नहीं कर पाता है. इसे समझने के लिए सबसे पहले सारंडा के जंगल को जानना होगा. सारंडा का जंगल में पहले तो एशिया का सबसे घना साल के पेड़ का जंगल है. दूसरा इस जंगल के अंदर यानि जमीन के नीचे खनिज. वह भी ऐसा जो खुद मेटल है.

सारंडा के जंगल में कई खनिज है. जिसमें आयरन भी शामिल है. ऐसे में यह खुद मेटल डिटेक्टर से डिटेक्ट होता है. माना जाता है कि कई बार IRON के वजह से IED को डिटेक्ट बम निरोधक दस्ता नहीं कर पाता है. हर जगह वह बीप करता है. ऐसे में जवानों को सबसे बड़ी कठनाई होती है. कई बार जिस जगह पर बम है उस पर पैर पड़ता है और फिर जोरदार ब्लास्ट हो जाता है.

अगर हम हाल में देखे तो झारखंड के सारंडा जंगल में छोटा नागर थाना क्षेत्र में नक्सलियों के खिलाफ जवान अभियान चला रहे थे. इस अभियान में जवानों का सामना माओवादी नेता मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ हुआ. जिसमें जवान जैसे ही आगे बढ़े उनका पैर IED पर पड़ा और फिर ब्लास्ट हुआ. जिसमें चार जवान घायल हुए. इससे पहले भी सारंडा में कई ब्लास्ट हुए जिसमें कई जवान शहीद हो गए.लेकिन फिर भी जवान हौसले के साथ नक्सलियों से लोहा ले रहे है और इस चुनौती के बाद भी नक्सलियों के खिलाफ कई कामयाबी मिली है.

हाल ही में जवानों ने मुठभेड़ में एक करोड़ के इनामी अनल दा उर्फ तूफान जी समेत 17 माओवादी को मुठभेड़ में ढ़ेर किया. इसके बाद भी बीते दिनों में मिसिर बेसरा के दस्ते का इस्राइल पूर्ति को जवानों ने मार गिराया. अब आखरी टारगेट एक करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा है. जिसके साथ 45 की संख्या में दस्ता मौजूद होने की सूचना है.                                                   

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