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वीर क्रांतिकारी शहीद पांडेय गणपत राय का 165 वां शहादत दिवस, सीएम ने किया नमन, जानिये उनके जीवन से जुड़े रोचक किस्से  

वीर क्रांतिकारी शहीद पांडेय गणपत राय का 165 वां शहादत दिवस, सीएम ने किया नमन, जानिये उनके जीवन से जुड़े रोचक किस्से  

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): आज 21 अप्रैल शुक्रवार को 1857 के वीर क्रांतिकारी शहीद पांडेय गणपत राय का 165वां शहादत दिवस है. जिनको आज झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने श्रद्धांजलि देकर नमन किया. मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शहीद पांडेय गणपत राय एक ऐसे वीर क्रांतिकारी हैं, जिन्होने ने अपनी साहस और वीरता से अंग्रेजों के अत्याचार की जड़े हिला दी थी. उनके165वां शहादत दिवस पर उनको शत् शत् नमन. इनकी शहादत को देश के लोग कभी भूला नहीं सकते हैं.

नागवंशी महाराजा ने किया था दीवान घोषित

आपको बताएं कि वीर क्रांतिकारी शहीद पांडेय गणपत राय का जन्म झारखंड के लोहरदगा स्थित भौंरो गांव में 17 जनवरी साल 1809 में एक कायस्थ जमींदार परिवार में हुआ था. गणपत राय के पिता का नाम रामकिशुन राय श्रीवास्तव और माता का नाम सुमित्रा देवी था. बचपन से ही पढ़ने में आगे और दिमाग से बड़े तेज थे. जिसकी वजह से उन्हें चाचा सदाशिव राय श्रीवास्तव की मौत के बाद छोटानागपुर प्रदेश के नागवंशी महाराजा जगन्नाथ शाहदेव ने गणपत राय को दीवान घोषित कर दिया.

काफी शानोशौकत से हुई थी परवरिश

आपको बताये कि गणपत राय के चाचा सदाशिव राय छोटानागपुर नागवंशी महाराजा जगन्नाथ शाहदेव के दीवान थे. जिसकी वजह से इनकी पढ़ाई-लिखाई और परवरिश शाही महल में हुई. जहां उन्होंने उर्दू, फारसी, और हिंदी भाषा के साथ कई अन्य भाषाओं को भी सीखा. इसके साथ ही बंदूक चलाना, घुड़सवारी,  और कई वीरता से जुड़ी शिक्षा प्राप्त की.

बचपन से अंग्रेजी शासन के प्रति था आक्रोश

 शहीद पांडेय गणपत राय का मन बचपन से ही देश में अंग्रेजों के शासन को देखकर आक्रोश में रहता था. जिसको लेकर वो अक्सर अपने दोस्तों और परिजनों से इस पर बात करने की कोशिश किया करते थे. लेकिन छोटी उम्र को देख कोई उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेता था.

अंग्रजों ने शवों को पेड़ों पर टांग दिया था

झारखंड के चतरा जिले में मेजर इंगलिश की सेना से गणपत राय की मुठभेड़ हुई. जिसमें 150 क्रान्तिकारियों के साथ 58 अंग्रेज मारे गये थे. लोगों में भय बढ़ाने के इरादे से अंग्रेजों ने सभी के शवों को तालाब के आस-पास लगे पेड़ों पर टांग दिया. जो ‘फाँसी के नाम से प्रसिद्ध है.

21 अप्रैल 1958 को दी गई थी फांसी

इस मुठभेड़ में गणपत राय की जान बच गई थी. लेकिन अंग्रेजों ने एक रात उनके गांव को घेर लिया. जिसके बाद पुरोहित उदयनाथ पाठक के साथ गणपतराय लोहरदगा जाने लगे. लेकिन गलती से रास्ता भटकर परहेपाट गांव पहुंच गये. जहां देशद्रोही जमींदार महेश शाही ने उन्हें अंग्रेजों के हाथों पकड़वा दिया. जिसके बाद रांची में उन पर मुकदमा चलाया गया. रांची के तत्कालीन हाईस्कूल के पास लगे कदम्ब के पेड़ पर 21 अप्रैल को गणपत राय को फांसी दी गई. जो आज शहीद ‘चौक’ के नाम से काफी प्रसिद्ध है.

रिपोर्ट- प्रियंका कुमारी 

Published at:21 Apr 2023 01:13 PM (IST)
Tags:Brave revolutionary martyr Pandey Ganpat Rai's 165th martyrdom dayCM paid tributeknow interesting stories related to his life.
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