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बड़ी खबर : 2883 करोड़ का शराब घोटाला बेनकाब, ईडी की कार्रवाई में विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया मुख्य आरोपी

BY -
Shreya Upadhyay  CE
Shreya Upadhyay CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 12:15:16 PM

रांची (RANCHI): प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छत्तीसगढ़ के आबकारी विभाग से जुड़े करीब 2883 करोड़ रुपये के बड़े शराब घोटाले का खुलासा किया है. इस मामले में ईडी ने 26 दिसंबर 2025 को एक अतिरिक्त अभियोजन शिकायत दर्ज की है. इसमें झारखंड एसीबी द्वारा पहले गिरफ्तार किए जा चुके विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया समेत कुल 81 लोगों को आरोपी बनाया गया है.

ईडी की जांच में सामने आया है कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच एक संगठित आपराधिक गिरोह ने राज्य की शराब नीति का दुरुपयोग किया. इस सिंडिकेट ने अवैध कमीशन, फर्जी होलोग्राम और बिना हिसाब-किताब की शराब बिक्री के जरिए भारी मात्रा में काली कमाई की.

इस घोटाले में झारखंड से जुड़े दो अहम नाम विधु गुप्ता और सिद्धार्थ सिंघानिया हैं. विधु गुप्ता प्रिज्म होलोग्राफी सिक्योरिटी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड के एमडी हैं और उन पर नकली होलोग्राम सप्लाई करने का आरोप है. झारखंड एसीबी ने उन्हें 3 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी. जांच में यह भी सामने आया है कि होलोग्राम सप्लाई के बदले अधिकारियों को करीब 9 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था.

ईडी का दावा है कि यह कमीशन मद्य निषेध विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे तक भी पहुंचता था. वहीं सिद्धार्थ सिंघानिया को एसीबी ने 18 जून 2025 को गिरफ्तार किया था और उन्हें भी बाद में जमानत मिल गई थी.

ईडी की जांच के अनुसार इस घोटाले में चार प्रमुख तरीकों से अवैध कमाई की गई. शराब सप्लायरों से आधिकारिक बिक्री पर रिश्वत ली गई. नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों से बिना हिसाब की देसी शराब बेची गई, जिससे टैक्स और शुल्क की चोरी हुई. डिस्टिलरी कंपनियों से बाजार में पकड़ बनाए रखने के बदले नियमित कमीशन वसूला गया. विदेशी शराब निर्माताओं से कमीशन लेने के लिए FL-10A नाम की नई लाइसेंस व्यवस्था लागू की गई, जिसमें मुनाफे का बड़ा हिस्सा सिंडिकेट तक पहुंचा.

इस मामले में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आईएएस निरंजन दास, आईटीएस अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और फील्ड स्टाफ भी जांच के दायरे में हैं. ईडी का कहना है कि यह घोटाला एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा था, जिसकी परतें अब लगातार खुलती जा रही हैं.

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