गढ़वा (GARHWA): आपने एक से बढ़ कर एक शादी के किस्से सुने होंगे. कभी लड़के वाले मनमानी पर उतर आते हैं तो कभी लड़की वाले ही रंगबाज़ बनने लग जाते हैं. ऐसे में गढ़वा जिले में एक शादी समारोह से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर आप भी माथा पीट लेंगे. दरअसल विवाह की सभी रस्में पूरी होने के बाद दुल्हन पक्ष ने विदाई से इनकार कर दिया. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि दूल्हा और उसके साथ आए बारातियों को करीब 12 घंटे तक रोक कर रखा गया. बाद में गांव की सामाजिक पंचायत के हस्तक्षेप से समझौता हुआ और बारात को वापस लौटने दिया गया.
घटना गढ़वा के हसनदाग गांव की है. जानकारी के अनुसार पलामू जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र के सरहुआ निवासी धनंजय चौधरी की बारात 24 फरवरी को हसनदाग पहुंची थी. विवाह की सभी पारंपरिक रस्में, जिसमें सिंदूरदान भी शामिल है, पूरी कर ली गई थीं. सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन अगली सुबह स्थिति बदल गई.
दुल्हन के परिजनों ने अचानक विदाई रोक दी. जब दूल्हे पक्ष ने कारण पूछा तो आरोप लगाया गया कि दूल्हा दिव्यांग है और यह बात पहले स्पष्ट नहीं की गई थी. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ा और बारातियों को गांव में ही रोक लिया गया.
मामले को सुलझाने के लिए ग्रामीणों की पंचायत बुलाई गई. लंबी चर्चा के बाद यह तय हुआ कि शादी में हुए खर्च का आपसी बंटवारा किया जाएगा. दूल्हे पक्ष की ओर से दिया गया दहेज और अन्य सामान वापस कर दिया गया. समझौते के बाद ही बारातियों को मुक्त किया गया और वे अपने घर लौट सके.
दूल्हे के पिता दिनेश चौधरी ने बताया कि विवाह अक्टूबर 2025 में तय हुआ था और सभी तैयारियां आपसी सहमति से हुई थीं. उन्होंने कहा कि शादी की पूरी प्रक्रिया संपन्न होने के बाद इस तरह का आरोप लगाकर विदाई रोकना उनके लिए अप्रत्याशित था. फिलहाल मामला पंचायत स्तर पर सुलझा लिया गया है.
