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स्मार्टफोन यूज से बच्चों में बढ़ रही वर्चुअल ऑटिज्म की समस्या, समय रहते रोके वरना नहीं होगा मानसिक विकास

BY -
Samir Hussain
Samir Hussain
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 18, 2026, 4:04:15 AM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK):आज कल गांव से लेकर शहर तक किसी भी इंसान के हाथ में आपको स्मार्टफोन दिखाई देगा. जिस तरह से देश डिजिटल हो रहा है. वहीं दूसरी तरफ इसके कई साइड इफेक्ट लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहे है. फोन के ज्यादा इस्तेमाल से जहां बड़े लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ रही है. तो वहीं छोटे बच्चे भी ज्यादा पीछे नहीं है.

बच्चों का बचपना छिन रहा है मोबाईल

आजकल के पेरेंट्स रोते हुए बच्चों को चुप कराने के लिए उनके हाथ में मोबाइल या फिर लैपटॉप में वीडियो प्ले करके दे देते हैं. जिससे बच्चे तो तुरंत चुप हो जाते हैं. लेकिन उन्हें वर्चुअल ऑटिज्म की समस्या हो जाती है. इसमें बच्चों को कई कई घंटे फोन पर समय बिताने की लत लग जाती है. और धीरे-धीरे ये परिवार और समाज से कटने लगते हैं.

वर्चुअल ऑटिज्म की बीमारी से हो रहे हैं ग्रस्त

दुनिया भर में इस विषय पर रिसर्च किया गया. जिसमें खुलासा हुआ है कि कम उम्र में बच्चों को फोन थमाने से उनका मानसिक विकास प्रभावित होता है. इतना ही नहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक मोबाइल गैजेट्स और ज्यादा टीवी देखनेवाले बच्चों का भविष्य खराब होता है. और सभी तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है. बच्चे बाहर खेलने और लोगों से बात करने के बजाय फोन में घुसे रहते हैं.

4 से 5 साल के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलती है समस्या

वर्चुअल ऑटिज्म का असर 4 से 5 साल के बच्चों में ज्यादा देखने को मिलता है. यह बच्चे समाज से कटते जाते हैं. और लोगों से उन्हें बात करने में भी डर लगता है. वे अपनी दुनिया मोबाइल में ही खोजते हैं. जिसकी वजह से सामाजिक गतिविधियों से दूर रहते हैं. जिस उम्र में बच्चों को मैदान में खेलना चाहिए या फिर घर के लोगों के साथ खेलना चाहिए. वो घर और परिवार से कटकर सीधे मोबाइल से कनेक्ट होते हैं. आगे जाकर इन बच्चों का स्वभाव आम लोगों की तरह नहीं बल्कि अजीब हो जाता है.

बच्चों को मोबाईल देने से बचे

इसलिए पेरेंट्स को चाहिए कि जब भी बच्चे रोए या फिर किसी चीज की जिद करें तो उन्हें दूसरी तरीके से मनाने की कोशिश करें ना कि उनके हाथों में फोन थमायें. फोन की वजह से बच्चों का बचपना छिनता जा रहा है. जो कि बहुत ही गंभीर समस्या है.

रिपोर्ट-प्रियंका कुमारी

 

Tags:The problem of virtual autism is increasing in children due to smartphone usestop it in timeotherwise there will be no mental development

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