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अमृत है मां का दूध, इन बीमारियों से होती है नवजात और मां की रक्षा, जानें ब्रेस्टफीडिंग के फायदे    

BY -
Priyanka Kumari CE
Priyanka Kumari CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 15, 2026, 5:13:18 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): जब बच्चे का जन्म होता है, तो डॉक्टर सबसे पहले उसे मां का दूध पिलाने की सलाह देते है. मां के दूध को बच्चे के लिए अमृत के समान माना जाता है. जो बच्चे की शारीरिक विकास और मानसिक विकास के लिए सबसे उपयोगी होता है. लेकिन आजकल की मॉडल महिलाएं ब्रेस्टफीडिंग कराना पसंद नहीं करती हैं. उनको लगता है कि ब्रेस्टफीडिंग से उनका फिगर खराब हो जाएगा. लेकिन उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि ब्रेस्टफीडिंग से कोई नुकसान नहीं होता. बल्कि इससे कई गंभीर बीमारियों से बच्चे और मां की रक्षा होती है. आज हम बात करेंगे ब्रेस्टफीडिंग से होने वाले फायदे की.

6 महीने तक लगातार बच्चे को मां का ही दूध पिलाना चाहिए- WHO

 WHO भी मां के दूध को बच्चे के लिए सबसे लाभकारी मानता है. इसकी ओर से बच्चे के जन्म के एक घंटे बाद ही उसे मां का दूध पिलाने की सालह दी जाती है. और कम से कम 6 महीने तक लगातार बच्चे को मां का ही दूध पिलाना चाहिए. इसके आलावा मां की इक्छा हो तो वो दो साल तक बच्चे को अपना दूध पिला सकती है. बच्चा जितना ज्यादा मां का दूध पियेगा, उतना ही ज्यादा वो बीमारियों से दूर रहेगा. और मजबूत बनेगा. लेकिन यदि कोई महिला ऐसा नहीं करना चाहती तो बच्चे को 2 साल तक कभी-कभी दूध पिलाते रहने चाहिए.

स्तनपान कराने से मां और बच्चे के बीच इमोशनल एटैचमेंट बढ़ता है

आपको बता दें कि स्तनपान कराने से मां और बच्चे के बीच स्किन-टू-स्किन कोंटेक्ट होता है. जिससे दोनों के बीच इमोशनल एटैचमेंट बढ़ता है. इसके साथ ही ब्रेस्टफीड कराने से महिला का कैलोरी बर्न होता है. जो प्रेग्नेंसी में बढ़े वजन को जल्दी कम करने में मदद करता है.

मां को मिलता है इमोशनल सैटिसफेक्शन

इसके साथ ही महिलाओं को डेलीवरी के समय जो दर्द से हड्डियों में दिक्कतें आती है. उससे भी निजात मिलता है. आर्थराइटिस और ओस्टियोपोरोसिस का खतरा कम होता है. स्तनपान से मां को इमोशनल सैटिसफेक्शन मिलता है. जिससे डिप्रेशन का खतरा भी कम रहता है.

बच्चे को इन बीमारियों से बचाता है मां का दूध

ब्रेस्टफीडिंग से नवजात को बहुत सारी छोटी और बड़ी बीमारियों से बचाती है. जो बच्चे मां का दूध पीते है. उनमे, मोटापा, अस्थमा, मधुमेह और अचानक मृत्यु सिंड्रोम एसआईडीएस का खतरा कम रहता है. इसके साथ ही शिशुओं में कान के संक्रमण और पेट में कीड़े होने की संभावना भी नहीं होती है.

ये खाने से बढ़ता है दूध

ऐसा नहीं है कि सभी महिलाएं अपनी इक्छा से स्तनपान नहीं कराती है. कुछ महिलाएं अपने बच्चों को दूध तो पिलाना चाहती है. लेकिन उनको स्वास्थ्य से संबंधी कुछ परेशानियां भी हो सकती है. जो वहीं कुछ को दूध ही नहीं बनता है. जिन महिलाओं को दूध कम होता है. उनको कुछ उपाय करने चाहिए. जिससे उनको ज्यादा दूध बनेगा. और वो भी अपने बच्चे को दूध पिला पायेंगी.

तेल मसाला बिल्कुल परहेज करना चाहिए

जिन महिलाओं को दूध कम होता है. उनको अपना डाईट का खास ख्याल रखना चाहिए. उनको अपने खाने में हरी सब्जी, सलाद और पका पपीता को शामिल करना चाहिए. इसको खाने खाने से भी ब्रेस्ट मिल्क बढ़ता है. एक दिन में 250 ग्राम पपीता ही खाना है. तेल मसाला बिल्कुल परहेज करना चाहिए.

एक दिन में 750 से 1000 मिलीलीटर दूध बनता है

आपको बता दे कि एक स्तनपान कराने वाली महिला को एक दिन में एक दिन में 750 से 1000 मिलीलीटर दूध बनता है. लेकिन यदि बच्चा पूरी तरह से मां पर निर्भर है तो उसकी मांग के आधार पर ये मात्रा अधिक हो सकती है.

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