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धड़ल्ले से मिल रहे हैं कार्बाइड से पके फल, एक्सपर्ट से जानिए कितना खतरनाक है इनका सेवन और कैसे करें बचाव

धड़ल्ले से मिल रहे हैं कार्बाइड से पके फल, एक्सपर्ट से जानिए कितना खतरनाक है इनका सेवन और कैसे करें बचाव

टीएनपी डेस्क (TNP DESK) : गर्मियों का दिन आ चुका है. गर्मी के मौसम में फल के बाजारों की रौनक देखने लायक होती है. हर तरफ लगे रंग-बिरंगे, छोटे-बड़े, मीठे और रसीले फलों के ठेले आपको अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इन फलों को देखते ही उन्हें खा लेने का जी करता है. देखने में तो ये बिल्कुल पके और ताजे लगते हैं, लेकिन समय से पहले बाजार में बेचने और मुनाफे की लालच में फल आर्टिफिशियल तरीके से पकाए जाते हैं. कैल्सियम कार्बाइड से पकाये गए ये फल कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. इस बाबत जब हमने रांची की सीनियर कॉनसुलन्ट dietician एण्ड nutritionist डॉ. मनीषा घई से बात की और पता लगाया कि हमारे हेल्थ पर इन फलों का सेवन कितना खतरनाक हो सकता है और इनसे बचने के क्या हैं उपाय- 

न्यूरो संबंधित समस्या

डॉ. मनीषा घई बताती हैं कि artificially पकाये गए फलों का लगातार सेवन करने से शरीर के अलग-अलग अंग प्रभावित होते हैं. ज्यादा मात्रा में कार्बाइड से पके फलों को खाने के बाद लोगों को सबसे ज्यादा न्यूरो संबंधित समस्या होती है. इसके साथ ही वो घबराहट, चिड़चिड़ापन, कैंसर, आंतों के अल्सर, सांस लेने में तकलीफ आदि से पीड़ित हो जाते हैं.  

 

खाने से पहले फलों को 12 घंटे रखें sodium carbonate के घोल में..  

डॉ. मनीषा घई ने कैल्सियम कार्बाइड से पकाये गए फलों को खाने से होने वाली सभी समस्या को अवॉइड करने का एक सरल तरीका बताया. उन्होंने बताया कि पहले तो लोगों की कोशिश यही होनी चाहिए कि गर्मी के मौसम के फलों को मई के अंतिम दिनों या फिर जून के शुरुआती दिनों से ही खाना शुरू करें. लेकिन अगर कार्बाइड से पके हुए फ्रूट खाने भी हो तो उनको खाने से पहले खाने वाला सोडा और पानी के घोल में 12 घंटे के लिए डूबा कर रखना चाहिए. ऐसा करने से कैल्सियम कार्बाइड और sodium carbonate (खाने वाला सोडा) के बीच केमिकल रिएक्शन के कारण कार्बाइड का हानिकारक असर बहुत हद तक नष्ट हो जाता है.     

गर्भवती महिलाएं ऐसे फल न खाएं

डॉक्टरों का कहना है कि प्रेगनेंट महिलाओं को कार्बाइड से पके फलों को खाने से बचना चाहिए. इससे न केवल उनका स्वास्थ्य खराब हो सकता है्, बल्कि उनके होने वाले बच्चे पर भी इसका दुष्परिणाम हो सकता है. मां के ऐसे फल खाने से गर्भस्थ शिशु के सांस लेने में तकलीफ और उसके पाचन तंत्र में भी गड़बड़ी हो सकती है.

बैन हैं कार्बाइड

जानकारों के अनुसार कार्बाइड को बहुत पहले ही बैन किया जा चुका है. ऐसे में अगर कोई भी फल विक्रेता या अन्य कोई भी यदि कार्बाइड से फलों को पकाता है तो इसमें सजा का प्रावधान है. यही वजह है कि इन दिनों फलों को पकाने के लिए कार्बाइड की जगह एथेफॉन केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है. बता दें कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा दिये गए गाइड्लाइन के अनुसार 10 किलो आम को पकाने के लिए 0.5 प्रतिशत से ज्यादा एथेफॉन का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए.

 

Published at:18 May 2022 05:26 PM (IST)
Tags:News
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