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जन्मदिन नहीं जयंती: स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के गीत सदियों तक बजते रहेंगे

BY -
Samiksha Singh
Samiksha Singh
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: January 14, 2026, 2:15:31 AM

टीएनपी डेस्क(TNP DESK):  यह पहला अवसर है जब हम सरस्वती की प्रतिमूर्ति स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर का जन्मदिन नहीं बल्कि जयंती मना रहे हैं. इसी साल फरवरी में उनका निधन हो गया. लता मंगेशकर का जन्म 1929 में इंदौर में हुआ था. उन्होंने बॉलीवुड में काफी संघर्ष किया और अपनी पहचान बनाई. अपनी आवाज की बदौलत उनकी प्रसिद्धि जल्द ही मिलने लगी. उस समय के प्रसिद्ध है गायिकाओं में से उन्होंने अपने लिए जगह बनाई.

लता मंगेशकर में 30 से अधिक भाषाओं में गाने गाए. दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित लता मंगेशकर को भारत सरकार ने भारत रत्न के सम्मान से भी सम्मानित किया. भारत रत्न लता मंगेशकर ने अपने जीवन काल में 20,000 से अधिक गाने गाए. लता दीदी ने हर तरह के गाने गाए. 'ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी' यह देशभक्ति गीत आज भी जो कोई सुनता है, उसके रोंगटे खड़े हो जाते हैं और आंखों में आंसू.

भक्ति गीत में भी लता दीदी का कोई जोड़ नहीं था. 'यशोमती मैया से बोले नंदलाला, राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला', माता वैष्णो देवी भक्ति माला में भी उनके गाए गीत अद्भुत है. रोमांटिक गानों में भी लता मंगेशकर का कोई जोड़ नहीं. 'मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी-कभी'.. 'आज फिर जीने की तमन्ना है आज फिर मरने का इरादा है'... 'ये गलियां ये चौबारा यहां आना ना दोबारा, कि हम तो हुए परदेसी'.... 'जब तक है जान जाने जहां मैं नाचूंगी'... ऐसे कई गाने हैं जो आज भी लोगों को मनु रंजीत करते हैं और दशकों तक करते रहेंगे. आने वाली कई पीढ़ियां उनके गानों को सुनती रहेगी .

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जयंती के मौके पर स्वर साम्राज्य लता मंगेशकर को नमन करते हुए उनके साथ बातचीत के संस्मरण को शेयर किया है उत्तर प्रदेश के अयोध्या में एक चौराहे का नामकरण दिवंगत गायिका लता मंगेशकर के नाम पर किया जा रहा है. आज भले लता मंगेशकर हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके गाये गीत के माध्यम से सुबह हमारे जेहन में रहेंगी,यह हर भारतीय या संगीत प्रेमी की भावना है. जयंती पर स्वर की इस देवी को नमन.

Tags:News

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