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CBSE का बड़ा फैसला, अब 9वीं-10वीं में होंगी 3 भाषाओं की पढ़ाई, लागू होगा नया नियम

BY -
Varsha Varma CE
Varsha Varma CE
Copy Editor • TheNewsPost.in
PublishedAt: May 17, 2026, 1:18:20 PM

टीएनपी डेस्क (TNP DESK): देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 9वीं और 10वीं के लिए नई भाषा नीति लागू करने की घोषणा कर दी है. अब छात्रों को स्कूल में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य होगा. यह नया नियम 1 जुलाई से लागू किया जाएगा. बोर्ड ने यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF-SE) 2023 के तहत किया है.

नई व्यवस्था के अनुसार छात्रों को कुल तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होना जरूरी है. विदेशी भाषा को केवल तीसरी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में ही चुना जा सकेगा. CBSE का मानना है कि इससे छात्रों को भारतीय भाषाओं और संस्कृति से बेहतर जुड़ाव मिलेगा.

बोर्ड की ओर से जारी दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि स्कूलों को अभी से नई भाषा व्यवस्था के अनुसार तैयारी शुरू कर देनी चाहिए. भाषा शिक्षण को ज्यादा रोचक और व्यावहारिक बनाने के लिए स्थानीय साहित्य, कविता, कहानियों और क्षेत्रीय सामग्री को भी पढ़ाने की सलाह दी गई है.

CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि फिलहाल R3 भाषा यानी तीसरी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों का इस्तेमाल किया जाएगा. इसका उद्देश्य छात्रों पर अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव डाले बिना भाषा सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाना है.

नई नीति को लेकर कई स्कूलों में भाषा शिक्षकों की उपलब्धता को भी चुनौती माना जा रहा है. इसे ध्यान में रखते हुए बोर्ड ने स्कूलों को कुछ विशेष छूट दी है. यदि किसी स्कूल में भाषा शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो वे दूसरे स्कूलों के साथ संसाधन साझा कर सकते हैं. इसके अलावा ऑनलाइन क्लास, रिटायर्ड शिक्षकों और योग्य पोस्टग्रेजुएट्स की सेवाएं लेने की भी अनुमति दी गई है.

छात्रों और अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल बोर्ड परीक्षा को लेकर है. रिपोर्ट्स के अनुसार तीसरी भाषा का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा और उसके अंक मार्कशीट में भी शामिल होंगे. हालांकि केवल तीसरी भाषा की वजह से किसी छात्र को बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा.

CBSE ने अपने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे समय रहते नई नीति के अनुसार शिक्षकों, पाठ्यक्रम और अन्य जरूरी संसाधनों की तैयारी पूरी कर लें. माना जा रहा है कि यह बदलाव भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और छात्रों को बहुभाषी शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है.

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