☰
✕
  • Jharkhand
  • Bihar
  • Politics
  • Business
  • Sports
  • National
  • Crime Post
  • Life Style
  • TNP Special Stories
  • Health Post
  • Foodly Post
  • Big Stories
  • Know your Neta ji
  • Entertainment
  • Art & Culture
  • Know Your MLA
  • Lok Sabha Chunav 2024
  • Local News
  • Tour & Travel
  • TNP Photo
  • Techno Post
  • Special Stories
  • LS Election 2024
  • covid -19
  • TNP Explainer
  • Blogs
  • Trending
  • Education & Job
  • News Update
  • Special Story
  • Religion
  • YouTube
  1. Home
  2. /
  3. Crime Post

कभी दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मानता था आदर्श, लेकिन बन गया एक करोड़ का इनामी माओवादी  

कभी दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मानता था आदर्श, लेकिन बन गया एक करोड़ का इनामी माओवादी  

टीएनपी स्पेशल(TNPSPECIAL): झारखंड का नाम सुनते से लोगों के जेहन में माओवाद आता है. यहां माओवाद की जड़ काफी मजबूत है,आए दिन माओवादी हमले में जवानों की शहदत की खबरें आती रहती है.हाल के दिनों में माओवादी पोलित ब्योरों सदस्य एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा की चर्चा जोरों से झारखंड के हर लोगों के बीच है. हम आपको बताते है कि कौन है यह मिसिर बेसरा और कैसे जवानों के खून का प्यासा हो गया. कभी झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन को आदर्श मानने वाला बेसरा जवानों के खून का प्यासा कैसे बन गया. दुरदांत  माओवादी मिसिर बेसरा की सुरक्षा कैसी है कि उसे पुलिस अब तक पकड़ नहीं पाई है. इससे जुड़ी कुछ  जानकारी हम आपको बताते है.

माओवादियों से हुई दोस्ती और फिर वह हिंसा के रास्ते पर चल पड़ा

मिसिर बेसरा झारखंड की राजधानी रांची से करीब 150 किलोमीटर दूर गिरिडीह जिला के सुदुर्वर्ती पीरटांड़ प्रखण्ड के मदनाडीह गांव का रहने वाला है.करीब तीस साल पहले वह गांव में सक्रिय था गरीब असहाय लोगों के लिए हक की आवाज उठाता था. बताया जाता है कि वह अपना आदर्श झामुमो सुप्रीमो दिशोम गुरु को मानता था. गुरु जी जमींदारों के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे और  जंगल में अपना ठिकाना बना लिया था तब मिसिर बेसरा का झुकाव गुरुजी की ओर हुआ. लेकिन बाद में उसकी मुलाकात माओवादियों से हुई और फिर वह हिंसा के रास्ते पर चल पड़ा.

माओवादी में उसका कद और बढ़ा और ERB का सचिव भी बना

बाद में उसकी सक्रियता माओवाद की ओर बढ़ती गई. शुरू में एक कैडर के रूप में शामिल हुआ लेकिन बाद में वह कुख्यात बनता चला गया और जवानों के खून से अपने कद को ऊपर उठता चला गया. बाद में वह देश के टॉप 5 माओवादी की लिस्ट में शामिल हो गया. इसके आतंक का अंदाज इस बात से लगा सकते है कि  सरकार की ओर से इसपर एक करोड़ का इनाम रख दिया गया. फिलहाल माओवादी पोलित ब्योरों का ईसे सदस्य बना दिया गया. प्रशांत बोस के गिरफ़्तारी के बाद माओवादी में उसका कद और बढ़ा और ERB का सचिव भी बना दिया गया. जब कई जगहों पर पुलिसिया दबिश बढ़ी और माओवादियों का सफाया हो गया तो मिसिर बेसरा ने अब कोल्हान के जंगल को अपना ठिकाना बना लिया है.

कैसी होती है सुरक्षा

इतने दिनों में पुलिस के हत्थे क्यों नहीं चढ़ा मिसिर बेसरा.इसके बारे में बताया जाता है कि इसकी सुरक्षा कड़ी होती है.तीन सुरक्षा घेरे में पोलित ब्योरों सदस्य रहता है. पहला सुरक्षा घेरा मिसिर बेसरा के साथ साए के जैसा  साथ रहता है. यह काफी तेजी से घातक हमला कर देता है. इसके अलावा जंगल के बारे में पूरी जानकारी इस दस्ते के पास रहती है. दूसरा दस्ता मिसिर बेसरा से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर तैनात रहता है. यह दस्ता मिसिर बेसरा से एक किलोमीटर की दूरी के इलाके को घेर कर रहता है. तीसरा दस्ता जंगल के पास मौजूद गांव में भ्रमणशील रहते है. सभी आस पास के गतिविधि पर नज़र रखते है. यही कारण है कि पुलिस के पहुँच से मिसिर बेसरा दूर है. 

Published at:18 Aug 2023 12:11 PM (IST)
Tags:Who is this Misir Besrahow did he become thirsty for the blood of soldiersjharkhandMaocpimaoMaowadinaxalismKolhanjharkhand maowadiranchicrime storiesSpecial storiy
  • YouTube

© Copyrights 2023 CH9 Internet Media Pvt. Ltd. All rights reserved.