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‘अधूरा सपना’ ने जगाया इतिहास का गर्व, प्रेमचंद रंगशाला में दिखी बाबू वीर कुंवर सिंह की शौर्य गाथा

BY - Samir Hussain

Published at: 06 Mar 2026 11:50 PM (IST)

‘अधूरा सपना’ ने जगाया इतिहास का गर्व, प्रेमचंद रंगशाला में दिखी बाबू वीर कुंवर सिंह की शौर्य गाथा

पटना(PATNA): राजधानी के प्रेमचंद रंगशाला राजेंद्र नगर में कला एवं संस्कृति विभाग के पहल पर बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना के सहयोग से  पद्मश्री डॉ. जगदीश प्रसाद सिंह द्वारा लिखित नाटक “अधूरा सपना” का मंचन किया गया.जिसमें बाबू वीर कुंवर सिंह की शौर्य गाथा को दिखाया गया.कार्यक्रम में विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. साथ ही कई गणमान्य और वरिष्ठ अधिकारी ने इस नाटक के मंचन को देखा. नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी अभय सिन्हा द्वारा किया गया.

कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और सम्मानित अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया. 
कार्यक्रम में बिहार विधान परिषद के सभापति  अवधेश नारायण सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे.वहीं मिहिर कुमार सिंह, भा.प्र.से., विकास आयुक्त, बिहार सरकार विशिष्ट अतिथि,  प्रणव कुमार, भा.प्र.से., सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे. इस मौके पर  रूबी, निदेशक, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, कृष्ण कुमार, निदेशक, संग्रहालय, महमूद आलम, सचिव, बिहार संगीत नाटक अकादमी, पटना की भी  उपस्थिति रही.

वीर कुँवर सिंह की शौर्यगाथा पर आधारित नाट्य प्रस्तुति

नाटक “अधूरा सपना” में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बाबू वीर कुँवर सिंह के जीवन के महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया.नाटक की शुरुआत कुँवर सिंह के दरबार से होती है, जहाँ वे अपने साथियों के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में संलग्न दिखाई देते हैं.नाटक में वह ऐतिहासिक प्रसंग भी अत्यंत मार्मिक रूप में दर्शाया गया, जिसमें कुँवर सिंह अपने घायल भुजा को काटकर माँ गंगा को अर्पित करते हैं, जो उनके अदम्य साहस और देशभक्ति का प्रतीक है.स्वतंत्रता की इस लंबी लड़ाई में देश को आजाद देखने का उनका सपना अधूरा रह जाता है, लेकिन वे अपने बलिदान से इतिहास में अमर हो जाते हैं.

सब कहते हैं बाबू कुँवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था.”

इस मौके पर बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने संबोधन में वीर कुँवर सिंह की वीरता का स्मरण करते हुए कहा—कि “80 बरस की उमर में जागा जोश पुराना था,
सब कहते हैं बाबू कुँवर सिंह बड़ा वीर मर्दाना था.”

उन्होंने कहा कि यह पंक्तियाँ वीर कुँवर सिंह के अदम्य साहस और देशभक्ति को दर्शाती हैं. उन्होंने अपने संबोधन के दौरान वीर कुँवर सिंह के जीवन से जुड़ी कई रोचक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे महान स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाएँ आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.

 नाट्य प्रस्तुति उन वीरों की शौर्यगाथा को सामने लाती है 

विकास आयुक्त, बिहार सरकार  मिहिर कुमार सिंह ने  कहा कि यह नाट्य प्रस्तुति उन वीरों की शौर्यगाथा को सामने लाती है जिन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया.उन्होंने कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे सहित कई वीरों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष किया, लेकिन बाबू वीर कुँवर सिंह ऐसे महान योद्धा थे जिन्होंने अंतिम समय तक अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके.

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम की इस शौर्यगाथा में विभिन्न जाति और धर्म के लोगों ने मिलकर देश की आजादी के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया, जो हमारी राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है.उन्होंने कला एवं संस्कृति विभाग की पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि विभाग द्वारा हाल के दिनों में जिस सक्रियता और तत्परता के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय है.

देश भक्ति और बलिदान को प्रभावशाली तरीके से किया पेश:सचिव 

सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग प्रणव कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि आज प्रेमचंद रंगशाला के इस प्रांगण में बिहार विधान परिषद के  सभापति की उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ गई है.उन्होंने कहा कि यह नाटक बाबू वीर कुँवर सिंह की देशभक्ति और बलिदान की भावना को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है. उन्होंने उपस्थित सभी कला प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि ऐसे नाट्य आयोजनों के माध्यम से राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समाज के समक्ष लाने का कार्य किया जा रहा है.

कार्यक्रम का क्रम

कार्यक्रम के अंतर्गत संध्या समयानुसार अतिथियों का आगमन एवं स्वागत किया गया. इसके पश्चात दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ तथा अतिथियों का सम्मान किया गया, जिसके बाद क्रमशः सम्मानित अतिथि, विशिष्ट अतिथि एवं मुख्य अतिथि के संबोधन हुए.
तत्पश्चात “अधूरा सपना” का मंचन प्रारंभ हुआ, जिसे दर्शकों ने अत्यंत सराहा
 कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा कलाकारों को सम्मानित किया गया तथा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ.

कार्यक्रम का मंच संचालन  सोमा चक्रवर्ती द्वारा किया गया. प्रेमचंद रंगशाला में उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों के सशक्त अभिनय की भरपूर सराहना की और उन्हें खड़े होकर तालियों से सम्मानित किया.

इस मौके पर पटना आंतरिक वित्तीय सलाहकार राणा सुजीत कुमार टुनटुन, सुश्री कृति आलोक, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी सहित विभाग के अन्य पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहें.

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