पटना (PATNA): बिहार के ग्रामीण इलाकों में अब सड़क संपर्क की तस्वीर तेजी से बदल रही है. मुख्यमंत्री ग्रामीण संपर्क योजना (अवशेष) के जरिए उन गांवों तक पक्की सड़कें पहुंचाई जा रही हैं, जो अब तक मुख्य मार्गों से नहीं जुड़ पाए थे. इस योजना का उद्देश्य हर गांव और बसावट को बारहमासी सड़क नेटवर्क से जोड़कर विकास की मुख्य धारा में लाना है.
ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा इस योजना के तहत लगातार काम किया जा रहा है. पहले जिन इलाकों में भौगोलिक या तकनीकी कारणों से सड़क नहीं बन पाई थी, अब वहां प्राथमिकता के आधार पर निर्माण कार्य किया जा रहा है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान हो रहा है और लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों में बड़ी राहत मिल रही है.
इस योजना के अंतर्गत राज्य में कुल 8,034 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है. इसमें से अब तक 2,485 किलोमीटर लंबी पक्की सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा चुका है. इन सड़कों के बनने से ग्रामीण जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पहले जहां आवागमन कठिन था, वहां अब एंबुलेंस, स्कूल वाहन और सार्वजनिक परिवहन की सीधी पहुंच सुनिश्चित हो गई है. इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता में सुधार हुआ है और किसानों को अपनी उपज समय पर बाजार तक पहुंचाने में काफी सुविधा मिली है.
वैशाली में मजबूत हुआ सड़क और पुलों का आधारभूत ढांचा
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण वैशाली जिले में भी ग्रामीण संपर्क व्यवस्था को सुदृढ़ करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. भगवान महावीर की जन्मभूमि और भगवान बुद्ध से जुड़े इस जिले में सड़क और पुल निर्माण ने विकास की रफ्तार बढ़ा दी है.
नाबार्ड योजना के तहत यहां 99 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों के निर्माण को मंजूरी दी गई थी, जिनमें से 95 किलोमीटर का कार्य पूरा हो चुका है. इसके साथ ही 30 पुलों में से 19 का निर्माण भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है. इन परियोजनाओं ने न केवल आवागमन को सुगम बनाया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा प्रदान की है.