TNP DESK- बिहार के डीजीपी, विशेष कर महिला पुलिस अधिकारियों के क्रियाकलापों से नाराज हैं. उन्होंने साफ कर दिया है कि ऐसे अफसर , जो वर्दी पहन कर पीड़ितों को प्रताड़ित करते हैं, उन्हें नौकरी छोड़कर घर में जाकर खाना बनाना चाहिए. जो ऑफिसर संवेदनहीन हैं और पीड़ितों का भयादोहन करते हैं, उन्हें डूब कर मर जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि पुलिस को हमेशा पीड़ितों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्हें ऐसा सलूक करना चाहिए कि उनके पास जाकर पीड़ित सुरक्षित महसूस कर सकें।
महिला पुलिस अधिकारियो को दी गई है नसीहत
खासकर महिलाओं का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। वह काफी उम्मीद लेकर पुलिस के पास आती हैं. उनके साथ ऐसा व्यवहार होना चाहिए कि उनकी तकलीफ कम हो सके. डीजीपी ने संवेदनहीन महिला पुलिस अफसर को कड़ी फटकार लगाई है. पूर्वी चंपारण के एक रेप पीड़िता का जिक्र करते हुए कहा कि वर्दी और हथियार जनता की हिफाजत के लिए है. इसे अपनी ताकत समझकर जनता के साथ दुर्व्यवहार नहीं करें। एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीजीपी ने कहा कि हमारी महिला पुलिस पदाधिकारी जिस ढंग से बात करती हैं. लगता है कि वह बहुत ताकतवर हो गई हैं. बात-बात में लोगों पर रौब झाड़ने लगाती हैं. उन्हें यह पता होना चाहिए कि उन्हें वर्दी और पिस्तौल दी गई है, उसका मकसद लोगों की हिफाजत करना है. पीड़ित के साथ कैसे बात करना है, इसका भी ध्यान नहीं रखा जाता है.
उल्लेखनीय है कि बिहार के पूर्वी चंपारण के हरसिद्धि थाना में एक महिला दरोगा को एक नाबालिक रेप पीड़िता के परिजनों से रिश्वत के रूप में पैसे और लग्जरी गाड़ी मांगने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है. सूचना के अनुसार पिछले साल 27 अप्रैल को एक नाबालिक लड़की के साथ उसके किसी रिश्तेदार ने दुष्कर्म किया था. पीड़िता जब शिकायत लेकर थाना पहुंची, तो महिला दरोगा ने मेडिकल जांच और कोर्ट में बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया को करने के लिए गाड़ी और कोर्ट खर्च के नाम पर 9000 रुपए की मांग कर दी. इस बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. जांच में आरोप सत्य पाए जाने पर एसपी ने महिला दरोगा को सस्पेंड कर दिया।