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विरासत पर सियासत,बिहार में कर्पूरी जयंती के बहाने '36' को साधने का सियासी खेल शुरू

विरासत पर सियासत,बिहार में कर्पूरी जयंती के बहाने '36' को साधने का सियासी खेल शुरू

पटना(PATNA): आगामी लोकसभा और विधानसभा के चुनाव के मद्देनजर बिहार की सियासी गलियारे में जननायक कर्पूरी ठाकुर को साधने का खेल नए अंदाज में शुरू हो गया है. सभी राजनीतिक दलों का एक ही मकसद है अतिपिछड़ा वोट बैंक को साधने की. 

बीजेपी की नाराजगी है कि नीतीश सरकार नहीं चाहती है कि बीजेपी कर्पूरी जयंती मनाए. बीजेपी का आरोप है कि नीतीश कुमार और लालू प्रसाद डरे हुए हैं. उन्हें लगता है कि अतिपिछड़ा तो पहले से पीएम नरेंद्र मोदी के साथ हैं. ऐसे में बीजेपी कर्पूरी जयंती मनाएगी तो जो भी अतिपिछड़ा का वोट महागठबंधन को मिलने की संभावना है, वह नहीं मिलेगा. इसलिए जानबूझ कर जदयू ने उस मिलर स्कूल के मैदान पर कब्जा कर लिया है, जिस मैदान पर बीजेपी का पहले से तय कार्यक्रम कर्पूरी जयंती को ले कर बुक कराया जा चुका है. 

बिहार में कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनाई जा रही है. पर यह पहला मौका जरूर है, जब सत्ता और विपक्ष आमने-सामने हो गए हैं. कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनाने के पीछे राजनीतिक दलों का हिडेन एजेंडा परोक्ष रूप से अति पिछड़ा का 36 प्रतिशत वोट पर निशाना है. अपरोक्ष रूप से पिछड़े 36 प्रतिशत वोट को भी साधने की तैयारी है. 

कल यानि 24 जनवरी को -जेडीयू पटना के वैटनरी मैदान में,राजद श्री कृष्ण मेमोरियल में और बीजेपी मिलर स्कूल के मैदान में जननायक कर्पूरी ठाकुर की 100 वी जयंती मना रही है. सभी की तैयारी पूरी है. सभी पार्टियों इसे ऐतिहासिक बनाना चाहती है. अब तक जो देखा गया है कि नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार साथ रहते हैं तो ये एक और एक दो नहीं बल्कि 11 होते हैं. पर इस बार नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार दो ध्रुवों पर हैं इसीलिए महागठबंधन की स्थिति यहां मजबूत नजर आती है. 

बहरहाल कल बहाना भले ही कर्पूरी जयंती का रहेगा लेकिन सभी दलों का एक और केवल एक ही मकसद होगा ... पहला खुद को अतिपिछड़ा का सबसे बड़ा हिमायती घोषित करके अतिपिछड़ों का वोट बैंक को साधने की कोशिश करना. 

Published at:23 Jan 2024 07:01 PM (IST)
Tags:Karpuri Jayantibihar newsbihar politicsnitish kumarloksabha chunaw 2024Jananayak Karpuri Thakur
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